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Ghaziabad News: बच्चों के इलाज में लापरवाही, बांट दी एक्सपायरी पैरासिटामोल
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गाजियाबाद। विजयनगर द्वितीय में सुदामापुरी स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में दवा की गुणवत्ता जांचने की व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। यहां बुखार और सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए आने वाले बच्चों को 100 एमजी की एक्सपायरी पैरासिटामोल बांट दी गई। मंगलवार को 15 से अधिक बच्चों को यह दवा दिए जाने की बात सामने आई है।
मामला तब खुला, जब शांति नगर निवासी रूपम शर्मा की तीन माह की बेटी को भी यही दवा दी गई। परिजनों की आपत्ति व हंगामे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित दवा का स्टॉक हटवा दिया और उसे ड्रग वेयरहाउस वापस भेज दिया।
स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना 150 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, इनमें 50 से ज्यादा बच्चे होते हैं। बच्चों में बुखार, सर्दी-जुकाम और अन्य सामान्य बीमारियों के उपचार के दौरान पैरासिटामोल भी दी जाती है। ऐसे में बच्चों को नियमित रूप से दी जाने वाली पैरासिटामोल जैसी दवा का स्टॉक बिना जांच के मरीजों तक पहुंचना दवा वितरण व्यवस्था की गंभीर चूक माना जा रहा है।
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स्टॉक आने से मरीज तक पहुंचने तक निगरानी नहीं
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र पर दवाओं का स्टॉक आने के बाद उसके पैकेट और एक्सपायरी डेट की नियमित जांच नहीं होती। दवा बांटने से पहले स्टॉक की जांच की जाती तो एक्सपायरी दवा मरीजों तक पहुंचने से रोकी जा सकती थी।
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घटना के बाद जागा विभाग
सर्विलांस अधिकारी राकेश गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र पर दवा वितरण से पहले एक्सपायरी डेट जांचने के निर्देश दिए गए हैं। खासकर बच्चों को दी जाने वाली दवाओं के मामले में किसी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, सीएमओ डॉ. सचिन चंद्र वैश्य ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि पता लगाया जा सके कि चूक किस स्तर से हुई। हालांकि, घटना के तीन दिन बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि एक्सपायरी दवा मरीजों तक कैसे पहुंची और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। स्वास्थ्य विभाग अब आगे से जांच के निर्देश दे रहा है, लेकिन सवाल यह है कि जिस जांच की व्यवस्था पहले से होनी चाहिए थी, वह बच्चों को एक्सपायरी दवा दिए जाने के बाद क्यों याद आई। सवाल यह भी है कि स्टॉक की जांच की जिम्मेदारी किस कर्मचारी की थी और निगरानी किस स्तर पर हो रही थी।
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मामला तब खुला, जब शांति नगर निवासी रूपम शर्मा की तीन माह की बेटी को भी यही दवा दी गई। परिजनों की आपत्ति व हंगामे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित दवा का स्टॉक हटवा दिया और उसे ड्रग वेयरहाउस वापस भेज दिया।
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स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना 150 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, इनमें 50 से ज्यादा बच्चे होते हैं। बच्चों में बुखार, सर्दी-जुकाम और अन्य सामान्य बीमारियों के उपचार के दौरान पैरासिटामोल भी दी जाती है। ऐसे में बच्चों को नियमित रूप से दी जाने वाली पैरासिटामोल जैसी दवा का स्टॉक बिना जांच के मरीजों तक पहुंचना दवा वितरण व्यवस्था की गंभीर चूक माना जा रहा है।
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स्टॉक आने से मरीज तक पहुंचने तक निगरानी नहीं
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र पर दवाओं का स्टॉक आने के बाद उसके पैकेट और एक्सपायरी डेट की नियमित जांच नहीं होती। दवा बांटने से पहले स्टॉक की जांच की जाती तो एक्सपायरी दवा मरीजों तक पहुंचने से रोकी जा सकती थी।
घटना के बाद जागा विभाग
सर्विलांस अधिकारी राकेश गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र पर दवा वितरण से पहले एक्सपायरी डेट जांचने के निर्देश दिए गए हैं। खासकर बच्चों को दी जाने वाली दवाओं के मामले में किसी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, सीएमओ डॉ. सचिन चंद्र वैश्य ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि पता लगाया जा सके कि चूक किस स्तर से हुई। हालांकि, घटना के तीन दिन बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि एक्सपायरी दवा मरीजों तक कैसे पहुंची और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। स्वास्थ्य विभाग अब आगे से जांच के निर्देश दे रहा है, लेकिन सवाल यह है कि जिस जांच की व्यवस्था पहले से होनी चाहिए थी, वह बच्चों को एक्सपायरी दवा दिए जाने के बाद क्यों याद आई। सवाल यह भी है कि स्टॉक की जांच की जिम्मेदारी किस कर्मचारी की थी और निगरानी किस स्तर पर हो रही थी।