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ताउम्र जेल में रहेंगे दुष्कर्मी: कोर्ट के फैसले पर छलका मां का दर्द, हमें तो मृत्युदंड की उम्मीद थी, लेकिन...
Tue, 24 Jan 2023 08:42 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 24 Jan 2023 08:42 AM IST
सार
गाजियाबाद के खोड़ा में 11 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले दोनों दोषियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने दोनों पर लगाया 50 - 50 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। मुकदमा दर्ज होने के 110 दिन में फैसला आ गया।
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खोड़ा थाना
- फोटो : ट्विटर
विस्तार
गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र में एक साल पहले 11 वर्षीय बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म में पाक्सो कोर्ट ने दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस मामले में तीसरे आरोपी की अलग सुनवाई चल रही है, जबकि एक किशोरी बाल सुधार गृह में है और बच्चे की मौसी अभी भी फरार है।
अभियुक्तों ने पड़ोसी होते हुए भी अकेला देखकर बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और फिर आठ माह तक करते रहे जिसकी वजह से वह महज 11 साल की उम्र में गर्भवती हो गई और पढ़ने-लिखने, खेलने-कूदने की उम्र में उसने बच्चे को जन्म दिया। उनके घिनौने कृत्य ने बच्ची का बचपन और संपूर्ण जीवन बर्बाद कर दिया... यह टिप्पणी करते हुए विशेष न्यायधीश (पॉक्सो एक्ट) हर्षवर्धन ने सोमवार दोपहर को सामूहिक दुष्कर्म के दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
19 और 21 साल उम्र के खोड़ा के निवासी दोनों दोषी सगे भाई हैं और कॉलेज के छात्र हैं। उन्हें 50-50 हजार रुपये अर्थदंड भी देना होगा। यह एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में पीड़ित बच्ची को दिए जाएंगे। पांच सितंबर 2022 को खोड़ा थाना में एफआईआर दर्ज होने के बाद 110 दिन में यह फैसला आया।
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दोनों आरोपी भाइयों को अगले दिन छह सितंबर को गिरफ्तार कर लिया गया था। तब से जेल में बंद हैं। विशेष लोक अभियोजक हरीश कुमार ने बताया कि अभियोजन की ओर से 15 गवाह पेश किए गए। सबसे अहम साक्ष्य डीएनए रिपोर्ट रही। इससे पता चला कि बच्ची ने जिस बच्चे को जन्म दिया, उसका पिता दोषी पाए दो भाइयों में से बड़ा (21 साल उम्र) है।
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अभियुक्तों ने पड़ोसी होते हुए भी अकेला देखकर बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और फिर आठ माह तक करते रहे जिसकी वजह से वह महज 11 साल की उम्र में गर्भवती हो गई और पढ़ने-लिखने, खेलने-कूदने की उम्र में उसने बच्चे को जन्म दिया। उनके घिनौने कृत्य ने बच्ची का बचपन और संपूर्ण जीवन बर्बाद कर दिया... यह टिप्पणी करते हुए विशेष न्यायधीश (पॉक्सो एक्ट) हर्षवर्धन ने सोमवार दोपहर को सामूहिक दुष्कर्म के दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
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19 और 21 साल उम्र के खोड़ा के निवासी दोनों दोषी सगे भाई हैं और कॉलेज के छात्र हैं। उन्हें 50-50 हजार रुपये अर्थदंड भी देना होगा। यह एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में पीड़ित बच्ची को दिए जाएंगे। पांच सितंबर 2022 को खोड़ा थाना में एफआईआर दर्ज होने के बाद 110 दिन में यह फैसला आया।
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दोनों आरोपी भाइयों को अगले दिन छह सितंबर को गिरफ्तार कर लिया गया था। तब से जेल में बंद हैं। विशेष लोक अभियोजक हरीश कुमार ने बताया कि अभियोजन की ओर से 15 गवाह पेश किए गए। सबसे अहम साक्ष्य डीएनए रिपोर्ट रही। इससे पता चला कि बच्ची ने जिस बच्चे को जन्म दिया, उसका पिता दोषी पाए दो भाइयों में से बड़ा (21 साल उम्र) है।
यह था मामला
खोड़ा निवासी दोनों युवक और बच्ची का परिवार के मकान एक ही परिसर में है। बच्ची के माता-पिता मजदूर हैं। उनके मजदूरी पर जाने के बाद बच्ची को अकेला देख दोनों युवकों ने 15 जनवरी 2022 को दुष्कर्म किया। इसके बाद धमकी देकर उसे अपनी हवस का शिकार बनाते रहे। बच्ची के गर्भवती हो जाने के आठ महीने बाद उसके परिजनों का पता चला, तब एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जांच में पता चला कि पड़ोसी दो भाइयों के बाद एक दुकानदार ने भी दुष्कर्म किया। उसे भी जेल भेजा गया। दुष्कर्म में सहयोग के लिए बच्ची की 16 साल की सहेली पकड़ी गई। उसे बाल सुधार गृह भेजा गया।
खोड़ा निवासी दोनों युवक और बच्ची का परिवार के मकान एक ही परिसर में है। बच्ची के माता-पिता मजदूर हैं। उनके मजदूरी पर जाने के बाद बच्ची को अकेला देख दोनों युवकों ने 15 जनवरी 2022 को दुष्कर्म किया। इसके बाद धमकी देकर उसे अपनी हवस का शिकार बनाते रहे। बच्ची के गर्भवती हो जाने के आठ महीने बाद उसके परिजनों का पता चला, तब एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जांच में पता चला कि पड़ोसी दो भाइयों के बाद एक दुकानदार ने भी दुष्कर्म किया। उसे भी जेल भेजा गया। दुष्कर्म में सहयोग के लिए बच्ची की 16 साल की सहेली पकड़ी गई। उसे बाल सुधार गृह भेजा गया।
हमें मृत्युदंड की उम्मीद थी, मां का छलका दर्द
फैसला आने के बाद बच्ची की मां कहा कि उन्हें दोषी युवकों को फांसी की सजा मिलने की उम्मीद थी। इसके लिए ही प्रार्थना की थी। हमारी फूल सी बच्ची का जीवन बर्बाद हो गया है। यह पत्थर सी हो गई है। जो उसकी हालत देखता है और उसकी आपबीती सुनता है, उसके आंसू निकल आते हैं। उन्होंने बताया कि वह सिर्फ इसलिए कोर्ट नहीं गईं क्योंकि डर था कि फैसला सुनकर बच्ची को कोई घबराहट न हो जाए। उसे संभालना जरूरी था। वह पूछ रही थी कि कोर्ट में आज क्या होगा?। उन्हें तसल्ली है कि फैसला आने में बहुत देरी नहीं हुई। विशेष लोक अभियोजक हरीश कुमार ने पैरवी में कोई कमी नहीं की।
फैसला आने के बाद बच्ची की मां कहा कि उन्हें दोषी युवकों को फांसी की सजा मिलने की उम्मीद थी। इसके लिए ही प्रार्थना की थी। हमारी फूल सी बच्ची का जीवन बर्बाद हो गया है। यह पत्थर सी हो गई है। जो उसकी हालत देखता है और उसकी आपबीती सुनता है, उसके आंसू निकल आते हैं। उन्होंने बताया कि वह सिर्फ इसलिए कोर्ट नहीं गईं क्योंकि डर था कि फैसला सुनकर बच्ची को कोई घबराहट न हो जाए। उसे संभालना जरूरी था। वह पूछ रही थी कि कोर्ट में आज क्या होगा?। उन्हें तसल्ली है कि फैसला आने में बहुत देरी नहीं हुई। विशेष लोक अभियोजक हरीश कुमार ने पैरवी में कोई कमी नहीं की।
बच्ची की पढ़ाई छूटी, हर वक्त सहमी रहती है: पिता
बच्ची के पिता सुबह ही कोर्ट पहुंच गए थे। फैसले के बाद उन्होंने कहा कि दरिंदों को सजा तो मिल गई लेकिन बच्ची का जीवन तो बर्बाद ही हो गया। उसका बचपन कैसे लौट सकता है? वह सातवीं कक्षा में पढ़ती थी। बच्चे को जन्म देने बाद से स्कूल नहीं गई। उसकी पढ़ाई छूट चुकी है। हर वक्त सहमी रहती है। हमें डर रहता है कि उस पर कोई हमला न कर दे। दोषी पाए गए युवकों के परिजन समझौते के लिए दबाव बनाते हैं। कभी भी घर में आ जाते हैं। वे जान से मारने की धमकी दे चुके हैं। इसकी शिकायत खोड़ा थाना में दर्ज कराएंगे।
बच्ची के पिता सुबह ही कोर्ट पहुंच गए थे। फैसले के बाद उन्होंने कहा कि दरिंदों को सजा तो मिल गई लेकिन बच्ची का जीवन तो बर्बाद ही हो गया। उसका बचपन कैसे लौट सकता है? वह सातवीं कक्षा में पढ़ती थी। बच्चे को जन्म देने बाद से स्कूल नहीं गई। उसकी पढ़ाई छूट चुकी है। हर वक्त सहमी रहती है। हमें डर रहता है कि उस पर कोई हमला न कर दे। दोषी पाए गए युवकों के परिजन समझौते के लिए दबाव बनाते हैं। कभी भी घर में आ जाते हैं। वे जान से मारने की धमकी दे चुके हैं। इसकी शिकायत खोड़ा थाना में दर्ज कराएंगे।
तीसरे आरोपी ने दाखिल की जमानत अर्जी
दुष्कर्म के तीसरे आरोपी दुकानदार ने सोमवार को अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की। अदालत ने सुनवाई के लिए तीन फरवरी की तारीख लगाई है, जबकि मुकदमे में नियमित सुनवाई के लिए 25 जनवरी तारीख लगी है। दुष्कर्म में सहयोगी बच्ची की सहेली किशोरी संप्रेक्षण गृह में है।
अनाथालय में पल रहा है बच्चा
मेरठ मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में बेटा पैदा होने के बाद बच्ची के परिजनों ने उसे स्वीकार करने से इन्कार कर दिया था। बच्चा पैदा होने के बाद मां ने उसकी तरफ देखा भी नहीं था। मेरठ से आने के बाद प्रशासन की देखरेख में बच्चा अनाथालय में पल रहा है।
दुष्कर्म के तीसरे आरोपी दुकानदार ने सोमवार को अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की। अदालत ने सुनवाई के लिए तीन फरवरी की तारीख लगाई है, जबकि मुकदमे में नियमित सुनवाई के लिए 25 जनवरी तारीख लगी है। दुष्कर्म में सहयोगी बच्ची की सहेली किशोरी संप्रेक्षण गृह में है।
अनाथालय में पल रहा है बच्चा
मेरठ मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में बेटा पैदा होने के बाद बच्ची के परिजनों ने उसे स्वीकार करने से इन्कार कर दिया था। बच्चा पैदा होने के बाद मां ने उसकी तरफ देखा भी नहीं था। मेरठ से आने के बाद प्रशासन की देखरेख में बच्चा अनाथालय में पल रहा है।