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ब्रेड की सच्चाई सामने आने के बाद डरी मम्मियां और बच्चे, बना रहे दूरी

Wed, 25 May 2016 02:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Wed, 25 May 2016 02:56 PM IST
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Morning bread resort, would now edging
bread - फोटो : अमर उजाला

मैगी के बाद अब बच्चों का पसंदीदा सैंडविच, बर्गर व पिज्जा भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। सेंटर फॉॅर साइंस एंड एनवायरमेंट की रिपोर्ट से हुए खुलासे के बाद लोग ब्रेड को लेकर टेंशन में हैं। ब्रेड से कैंसर के खतरे की खबर जैसे ही मीडिया में आनी शुरू हुई है, वैसे ही लोग अब ब्रेड से दूरी बनाने लगे हैं।

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सबसे ज्यादा चिंतित मम्मियां और बच्चे हैं। मम्मियों के मुताबिक जल्दी नाश्ता तैयार करने का आसान तरीका ब्रेड ही है, मगर खतरनाक बीमारी के चलते वह नहीं चाहती कि उनका बच्चा ब्रेड खाए। महिलाएं का कहना है कि इससे तो उनकी रोटी-पराठा ही अच्छा है। कम से कम उनके बच्चों को कोई बीमारी तो नहीं होगी।
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आमतौर पर ज्यादातर घरों में दिन की शुरूआत ब्रेड से होती है। महिलाओं का कहना है कि ब्रेड से आसान, सुविधाजनक, पौष्टिक और स्वादिष्ट ब्रेकफास्ट तैयार किया जाता है। अकेले रहने वाले लोग तो नाश्ते के साथ रात के खाने भी ब्रेड का इस्तेमाल करते हैं।
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ऐसे में लोगों को मंगलवार को जब यह पता चला कि वह दिन की शुरूआत खाने की ऐसी चीज से कर रहे हैं, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है, तो लोगों के होश उड़ गए। कई परिवारों ने तो ब्रेड लाना ही बंद कर दिया है। ऐसे में महिलाओं को परेशानी हो रही है। उधर इस खबर के बाद से ब्रेड की बिक्री में भी मामूली रूप से गिरावट आई है।

सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए

Morning bread resort, would now edging
bread - फोटो : getty
बोले छात्र:
1. बीटेक सेकेंड ईयर के छात्र स्वर्णिम का कहना है कि वह लोग ब्रांडेंड शॉप से ही बर्गर खरीदते हैं। वैसे भी सरकार को चाहिए कि अगर इस तरह कोई खतरनाक केमिकल मिलाकर खाद्य सामग्री बेच रहा है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

2. अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कालेज के छात्र यशराज का कहना है कि ब्रेड आम आदमी की जिंदगी में शामिल हो चुका है। केक, बर्गर, पिज्जा से लेकर ऑमलेट तक में ब्रेड मिलाया जाता है। अब यह वाकई चौंकाने वाली बात है कि इसे खाने से कैंसर होता है। कोई क्या खाए और क्या न खाए।

3. निजी कंपनी में काम करने वाली उर्वशी नामक युवती का कहना है कि पहले मैगी और अब ब्रेड में खतरनाक केमिकल की बात चली है। आफिस की वजह से आमतौर पर सुबह के समय चाय-ब्रेड का ही नाश्ता लेती थी, मगर अब कोई और विकल्प सोचना पडे़गा।

4. गृहणी दीपमाला का कहना है कि बच्चों की सेहत से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। फिर कैंसर जैसी बीमारी का तो नाम सुनकर ही टेंशन हो जाती है। ब्रेड से ज्यादा अच्छा अपना रोटी-पराठा है। अब से बच्चों को नाश्ते में वहीं दिया करूंगी।

बोले दुकानदार:
1. कविनगर सी ब्लाक में जनरल स्टोर के मालिक सुरेंद्र कुमार ने बताया कि ब्रेड से कैंसर के खतरे वाली खबर मीडिया में आने के बाद ब्रेड की बिक्री में 10 प्रतिशत की कमी आई है। सबसे ज्यादा असर लोकल ब्रेड की बिक्री पर पड़ा है।

2. कविनगर बी ब्लाक में बेकरी चलाने वाले अचल का कहना है सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट की रिपोर्ट के बाद से ही वह खुद भी हैरान हैं। वह खुद भी बचपन से ब्रेड खाते आ रहे हैं, अब पता चल रहा है कि इससे कैंसर होता है।

3. पिज्जा के एक ब्रांडेड आउटलेट पर काम करने वाले शिवम ने बताया कि इस रिपोर्ट के बाद भी पिज्जा की बिक्री पर कोई असर नहीं पड़ा है। आज भी अन्य दिनों की तरह ही उनके पास ऑर्डर आए।

डॉक्टर बोले:
गाजियाबाद में कैंसर के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके लिए यहां की दूषित वायु, दूषित पानी और बदलते लाइफ स्टाइल को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है। जंक फूड भी इसका बड़ा कारण है।

पिछले पांच साल की बात करें तो कैंसर के मरीजों में 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। खास बात यह है कि अब कैंसर के ज्यादातर मामले आंत, पेट और लीवर से संबंधित सामने आ रहे हैं। - डॉ. आरके पोद्दार, संस्थापक जगन्नाथ कैंसर चेरिटेबिल सोसायटी
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