30 साल तक मिली एक रोटी: 31 बरस बाद मां से मिला तो पहली बार खाया भरपेट खाना, जानें 1993 की वो दर्दभरी कहानी
लापता होने के बाद इन 31 सालों में अपहरणकर्ताओं ने राजू से उसका बचपन और भविष्य तो छीना ही। इसके साथ ही उसकी असल पहचान भी छीन ली। उसके जीवन से जुड़ी हर वो याद को मिटाने की कोशिश की जिसे वे हटा सकते थे।
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लापता होने के 31 साल बाद घर पहुंचे राजू और उसके परिजनों की खुशी का एहसास केवल उनके सामने बैठा व्यक्ति ही कर सकता है। मां के आंचल और पिता के साए में बैठे राजू ने 31 साल में पहली बार बुधवार की रात दो रोटी खाई। राजू के लिए मां और बहन के हाथ की बनी यही दो रोटी भरपेट खाना थी। इन 31 सालों में राजू की जिंदगी में उसके बचपन के खोने के साथ-साथ उसकी पहचान तक को अपहरणकर्ताओं ने हमेशा के लिए मिटाने की कोशिश की थी। साल 1993 में जो भीमसिंह उर्फ पन्नू हुआ करता था, वह आज राजू है।
राजू ने पहली बार खाई दो रोटी
बृहस्पतिवार को जब अमर उजाला की टीम राजू के घर पहुंची तो लोगों का तांता लगा हुआ था। रिश्तेदारों से लेकर आस-पड़ोस तक के लोगों की भीड़ और उनके बीच माता-पिता के बीच बिना किसी डर और दहशत के बैठे राजू की खिलखिलाती हंसी अलग ही रंगत बिखेर रही थी। राजू की मां ने बताया कि बुधवार रात राजू ने पहली बार दो रोटी खाई। पता चला कि परिवार को दोबारा मिले राजू का असली नाम राजू है ही नहीं। राजू जब स्कूल में पढ़ाई करता था तब उसका नाम भीमसिंह था।
अपरणकर्ताओं ने छीना राजू का बचपन और भविष्य
प्यार से परिवार वाले उसे पन्नू नाम से पुकारते थे। लापता होने के बाद इन 31 सालों में अपहरणकर्ताओं ने राजू से उसका बचपन और भविष्य तो छीना ही। इसके साथ ही उसकी असल पहचान भी छीन ली। उसके जीवन से जुड़ी हर वो याद को मिटाने की कोशिश की जिसे वे हटा सकते थे। राजू को न तो मोबाइलों की जानकारी है और न ही टीवी आदि की। यहां तक कि वह भारतीय करंसी को भी ठीक से नहीं पहचान पा रहा है। वहीं परिजनों ने राजू की पढ़ाई दोबारा शुरू कराने के साथ-साथ रोजगार से जोड़ने और फिर शादी की बात कही है।
पुलिस ने खंगाली पुरानी फाइल
मामले में अपहरणकर्ताओं ने भीमसिंह उर्फ पन्नू उर्फ राजू पर कई अत्याचार किए। जंजीर में जकड़कर रखने से लेकर खाने में केवल एक रोटी देना तक। माता-पिता के पास आते ही राजू अपनी 31 साल की सभी प्रताड़नाओं को भूल गया। वहीं पुलिस आरोपियों को सजा दिलाने के लिए तैयारी कर रही है। पुलिस साल 1993 में दर्ज हुए भीमसिंह के अपहरण के मुकदमे को दोबारा खोलने की बात कही है। हालांकि पुलिस के सामने बड़ी चुनौती यह होगी कि 30 साल पहले हुई जांच और तफ्तीश के दस्तावेजों का मिलना। इसके लिए साहिबाबाद पुलिस का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। वहीं अगर दस्तावेज मिलते हैं तो साहिबाबाद पुलिस ही मामले की जांच को आगे बढ़ाएगी।