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हांफ रही मेट्रो को चाहिए फुल स्पीड
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Thu, 30 Jun 2016 01:09 AM IST
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metro
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार चाहती है कि दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा तक मेट्रो का ट्रायल मार्च तक हो जाए ताकि 2017 के चुनाव में इसे कैश करा सके लेकिन यह मुश्किल है। पिछले दो वर्षों में अभी तक इस प्रोजेक्ट का 40 प्रतिशत काम पूरा हो सका है।
निर्धारित लक्ष्य को देखते हुए अगले डेढ़ साल में 60 प्रतिशत काम पूरा करना है। वहीं 22 सौ करोड़ के इस प्रोजेक्ट में डीएमआरसी को अब तक 390 करोड़ ही मिले हैं। ऐसे में मार्च तक ट्रायल के लिए प्रोजेक्ट का काम फुल स्पीड से होना चाहिए।
डीएमआरसी सूत्रों के मुताबिक फिलहाल पिलर लगाने का काम चल रहा है। 400 पिलर में 280 पिलर लगाए जा चुके हैं। पिलर जनवरी-फरवरी तक लगेंगे। इस रूट की कुल दूरी 9.41 है जिसमें पौने तीन किलोमीटर में गार्डर रखे जा चुके हैं।
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सितंबर से ट्रैक बिछाने का काम शुरू किया जाएगा। एक साथ सात स्टेशनों पर फाउंडेशन का काम इन दिनों चल रहा है। डीएमआरसी सूत्रों ने कहा कि प्रदेश सरकार की तरफ से यह दबाव है कि मार्च तक किसी तरह मेट्रो का ट्रायल हो जाए लेकिन यह संभव होना मुश्किल है।
अभी जमीन न मिलने के चलते अर्थला मेट्रो स्टेशन का काम लटक गया है। इससे पहले भी मोहन नगर, शहीद नगर और राजनगर एक्सटेंशन के स्टेशन के लिए जमीन देर से मिली थी। वहीं कुल 390 करोड़ ही अब तक मिले हैं जिसमें आवास विकास परिषद से 50 करोड़ और यूपीएसआईडीसी से मिली तीन करोड़ की राशि शामिल है।
नगर निगम से कोई राशि नहीं मिली है। कुल बजट में से केंद्र से मिलने वाली बीस प्रतिशत राशि अभी तक नहीं मिल सकी है क्योंकि प्रोजेक्ट का रिवाइज बजट राज्य सरकार के कैबिनेट में पास नहीं हुआ है। बता दें कि जून 2014 में डीएमआरसी और जीडीए के बीच एमओयू साइन हुआ था, इसके बाद काम की शुरुआत हुई थी।
22 सौ करोड़ से ऊपर जाएगा बजट
डीएमआरसी सूत्रों ने कहा कि फिलहाल इस प्रोजेक्ट में खर्चे को देखते हुए बजट के 22 सौ करोड़ से ऊपर जाने की संभावना बन गई है। प्रोजेक्ट के डीपीआर को सेंक्शन के लिए जल्द ही केंद्र के पास भेजा जाएगा।
मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए फंड का अभाव नहीं होने देंगे। निर्धारित लक्ष्य दिसंबर 2017 तक मेट्रो दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा तक दौडे़गी। - विजय कुमार यादव, वीसी, जीडीए
दो प्रमुख सचिवों के ‘हाथ’ में अर्थला मेट्रो स्टेशन
अर्थला मेट्रो स्टेशन के लिए जमीन मिलने का फैसला अब शासन स्तर पर होगा। जहां इस मामले से जीडीए ने प्रमुख सचिव (आवास) को अवगत कराया है वहीं सेल्स टैक्स विभाग का कहना है कि जमीन देने के ऑर्डर का हक सिर्फ प्रमुख सचिव (वाणिज्य कर) को है।
बता दें कि अर्थला मेट्रो स्टेशन के लिए सेल्स टैक्स विभाग की जमीन डीएमआरसी को उपलब्ध कराने के मामले में जीडीए और सेल्स टैक्स विभाग के बीच करीब एक साल से पत्राचार चल रहा है।
इस पत्राचार से कोई हल नहीं निकला और अर्थला मेट्रो स्टेशन को कैंसल कर देने तक की बात आ गई है। इस बारे में सेल्स टैक्स विभाग के एडिशनल कमिश्नर आरबी चौधरी ने बुधवार को बताया कि वह अपने स्तर पर जमीन देने का निर्णय नहीं ले सकते हैं।
यह अधिकार सिर्फ प्रमुख सचिव (वाणिज्य कर) वीरेश कुमार को है और उन्हें इस प्रकरण से अवगत करा दिया गया है। वाणिज्य कर विभाग के सलाहकार रामकिशोर अग्रवाल ने भी इस मामले में सचिव से बात की है।
दूसरी तरफ जीडीए वीसी विजय यादव का कहना है कि सेल्स टैक्स विभाग जमीन देने में आनाकानी कर रहा है और इस बारे में प्रमुख सचिव, आवास को लिखा गया है। बहरहाल अब यह देखना दिलचस्प होगा कि लखनऊ से क्या फैसला आता है।
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निर्धारित लक्ष्य को देखते हुए अगले डेढ़ साल में 60 प्रतिशत काम पूरा करना है। वहीं 22 सौ करोड़ के इस प्रोजेक्ट में डीएमआरसी को अब तक 390 करोड़ ही मिले हैं। ऐसे में मार्च तक ट्रायल के लिए प्रोजेक्ट का काम फुल स्पीड से होना चाहिए।
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डीएमआरसी सूत्रों के मुताबिक फिलहाल पिलर लगाने का काम चल रहा है। 400 पिलर में 280 पिलर लगाए जा चुके हैं। पिलर जनवरी-फरवरी तक लगेंगे। इस रूट की कुल दूरी 9.41 है जिसमें पौने तीन किलोमीटर में गार्डर रखे जा चुके हैं।
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सितंबर से ट्रैक बिछाने का काम शुरू किया जाएगा। एक साथ सात स्टेशनों पर फाउंडेशन का काम इन दिनों चल रहा है। डीएमआरसी सूत्रों ने कहा कि प्रदेश सरकार की तरफ से यह दबाव है कि मार्च तक किसी तरह मेट्रो का ट्रायल हो जाए लेकिन यह संभव होना मुश्किल है।
अभी जमीन न मिलने के चलते अर्थला मेट्रो स्टेशन का काम लटक गया है। इससे पहले भी मोहन नगर, शहीद नगर और राजनगर एक्सटेंशन के स्टेशन के लिए जमीन देर से मिली थी। वहीं कुल 390 करोड़ ही अब तक मिले हैं जिसमें आवास विकास परिषद से 50 करोड़ और यूपीएसआईडीसी से मिली तीन करोड़ की राशि शामिल है।
नगर निगम से कोई राशि नहीं मिली है। कुल बजट में से केंद्र से मिलने वाली बीस प्रतिशत राशि अभी तक नहीं मिल सकी है क्योंकि प्रोजेक्ट का रिवाइज बजट राज्य सरकार के कैबिनेट में पास नहीं हुआ है। बता दें कि जून 2014 में डीएमआरसी और जीडीए के बीच एमओयू साइन हुआ था, इसके बाद काम की शुरुआत हुई थी।
22 सौ करोड़ से ऊपर जाएगा बजट
डीएमआरसी सूत्रों ने कहा कि फिलहाल इस प्रोजेक्ट में खर्चे को देखते हुए बजट के 22 सौ करोड़ से ऊपर जाने की संभावना बन गई है। प्रोजेक्ट के डीपीआर को सेंक्शन के लिए जल्द ही केंद्र के पास भेजा जाएगा।
मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए फंड का अभाव नहीं होने देंगे। निर्धारित लक्ष्य दिसंबर 2017 तक मेट्रो दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा तक दौडे़गी। - विजय कुमार यादव, वीसी, जीडीए
दो प्रमुख सचिवों के ‘हाथ’ में अर्थला मेट्रो स्टेशन
अर्थला मेट्रो स्टेशन के लिए जमीन मिलने का फैसला अब शासन स्तर पर होगा। जहां इस मामले से जीडीए ने प्रमुख सचिव (आवास) को अवगत कराया है वहीं सेल्स टैक्स विभाग का कहना है कि जमीन देने के ऑर्डर का हक सिर्फ प्रमुख सचिव (वाणिज्य कर) को है।
बता दें कि अर्थला मेट्रो स्टेशन के लिए सेल्स टैक्स विभाग की जमीन डीएमआरसी को उपलब्ध कराने के मामले में जीडीए और सेल्स टैक्स विभाग के बीच करीब एक साल से पत्राचार चल रहा है।
इस पत्राचार से कोई हल नहीं निकला और अर्थला मेट्रो स्टेशन को कैंसल कर देने तक की बात आ गई है। इस बारे में सेल्स टैक्स विभाग के एडिशनल कमिश्नर आरबी चौधरी ने बुधवार को बताया कि वह अपने स्तर पर जमीन देने का निर्णय नहीं ले सकते हैं।
यह अधिकार सिर्फ प्रमुख सचिव (वाणिज्य कर) वीरेश कुमार को है और उन्हें इस प्रकरण से अवगत करा दिया गया है। वाणिज्य कर विभाग के सलाहकार रामकिशोर अग्रवाल ने भी इस मामले में सचिव से बात की है।
दूसरी तरफ जीडीए वीसी विजय यादव का कहना है कि सेल्स टैक्स विभाग जमीन देने में आनाकानी कर रहा है और इस बारे में प्रमुख सचिव, आवास को लिखा गया है। बहरहाल अब यह देखना दिलचस्प होगा कि लखनऊ से क्या फैसला आता है।