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Ghaziabad News: एचपीसीएल टर्मिनल से 5.83 करोड़ की पेट्रोलियम चोरी मामले में फिर टली सुनवाई, गवाह नहीं पहुंचा
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विशेष सीबीआई अदालत ने 17 सितंबर की तारीख लगाई
टैंकरों से तय मात्रा से अधिक तेल निकालने और कंप्यूटर रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। मथुरा स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के टर्मिनल से करीब 5.83 करोड़ रुपये के पेट्रोलियम पदार्थ की कथित चोरी के मामले में बुधवार को विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी। गवाह के अदालत में पेश न होने के कारण न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख तय की है। मामले में सीबीआई ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत पेट्रोलियम पदार्थ की अवैध निकासी और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।
सीबीआई की ओर से अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, जून 2022 से जनवरी 2024 के बीच मथुरा टर्मिनल से पेट्रोलियम पदार्थ की कथित चोरी से जुड़े 305 मामलों की जांच की गई। विवेचना के दौरान 13 मामलों में जादौन ट्रांसपोर्ट कंपनी के चार टैंकरों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई। इन मामलों में करीब 11 किलोलीटर पेट्रोलियम पदार्थ की कथित चोरी का उल्लेख किया गया है।
तय मात्रा से अधिक तेल भरवाने का आरोप
सीबीआई का आरोप है कि एचपीसीएल के कुछ कर्मचारियों और ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत से टैंकरों में निर्धारित मात्रा से अधिक पेट्रोलियम पदार्थ भरवाया गया। इसके बाद अतिरिक्त तेल को मथुरा टर्मिनल परिसर से बाहर ले जाने में कथित तौर पर मदद की गई। एजेंसी ने इसे सुनियोजित तरीके से की गई अवैध निकासी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला बताया है।
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कंप्यूटर रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का भी आरोप
जांच के दौरान सीबीआई ने कंप्यूटर प्रणाली और कंप्यूटरीकृत स्वचालित व्यवस्था में कथित छेड़छाड़ किए जाने की बात भी कही है। एजेंसी के मुताबिक, कंप्यूटर में प्रविष्टियों में बदलाव कर पेट्रोलियम पदार्थ की कथित चोरी को रिकॉर्ड में छिपाने का प्रयास किया गया।
जांच दस्तावेजों में एसआर ट्रेडिंग कंपनी से संबंधित मांग पत्रों में करीब 59 बार हाथ से बदलाव किए जाने का भी उल्लेख है। सीबीआई का दावा है कि इन बदलावों और अन्य अनियमितताओं के जरिये आरोपियों को लाभ पहुंचाया गया और सरकारी खजाने को आर्थिक क्षति हुई।
मामले में दो ट्रांसपोर्ट कंपनियों के अलावा राहुल, हेमंत, शिशुपाल और दिनेश प्रताप सिंह समेत कुल आठ आरोपी बनाए गए हैं। बुधवार को गवाह के पेश न होने से कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। अब 17 सितंबर को होने वाली सुनवाई में मामले की अगली कार्रवाई होगी।
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टैंकरों से तय मात्रा से अधिक तेल निकालने और कंप्यूटर रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। मथुरा स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के टर्मिनल से करीब 5.83 करोड़ रुपये के पेट्रोलियम पदार्थ की कथित चोरी के मामले में बुधवार को विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी। गवाह के अदालत में पेश न होने के कारण न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख तय की है। मामले में सीबीआई ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत पेट्रोलियम पदार्थ की अवैध निकासी और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।
सीबीआई की ओर से अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, जून 2022 से जनवरी 2024 के बीच मथुरा टर्मिनल से पेट्रोलियम पदार्थ की कथित चोरी से जुड़े 305 मामलों की जांच की गई। विवेचना के दौरान 13 मामलों में जादौन ट्रांसपोर्ट कंपनी के चार टैंकरों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई। इन मामलों में करीब 11 किलोलीटर पेट्रोलियम पदार्थ की कथित चोरी का उल्लेख किया गया है।
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तय मात्रा से अधिक तेल भरवाने का आरोप
सीबीआई का आरोप है कि एचपीसीएल के कुछ कर्मचारियों और ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत से टैंकरों में निर्धारित मात्रा से अधिक पेट्रोलियम पदार्थ भरवाया गया। इसके बाद अतिरिक्त तेल को मथुरा टर्मिनल परिसर से बाहर ले जाने में कथित तौर पर मदद की गई। एजेंसी ने इसे सुनियोजित तरीके से की गई अवैध निकासी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला बताया है।
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कंप्यूटर रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का भी आरोप
जांच के दौरान सीबीआई ने कंप्यूटर प्रणाली और कंप्यूटरीकृत स्वचालित व्यवस्था में कथित छेड़छाड़ किए जाने की बात भी कही है। एजेंसी के मुताबिक, कंप्यूटर में प्रविष्टियों में बदलाव कर पेट्रोलियम पदार्थ की कथित चोरी को रिकॉर्ड में छिपाने का प्रयास किया गया।
जांच दस्तावेजों में एसआर ट्रेडिंग कंपनी से संबंधित मांग पत्रों में करीब 59 बार हाथ से बदलाव किए जाने का भी उल्लेख है। सीबीआई का दावा है कि इन बदलावों और अन्य अनियमितताओं के जरिये आरोपियों को लाभ पहुंचाया गया और सरकारी खजाने को आर्थिक क्षति हुई।
मामले में दो ट्रांसपोर्ट कंपनियों के अलावा राहुल, हेमंत, शिशुपाल और दिनेश प्रताप सिंह समेत कुल आठ आरोपी बनाए गए हैं। बुधवार को गवाह के पेश न होने से कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। अब 17 सितंबर को होने वाली सुनवाई में मामले की अगली कार्रवाई होगी।