फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   Many leaders won, many lost in the race from Lucknow to Delhi

Ghaziabad News: लखनऊ से दिल्ली की दौड़ में कई नेता जीते, कई हारे

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 01 Apr 2024 01:00 AM IST
विज्ञापन
Many leaders won, many lost in the race from Lucknow to Delhi
राजीव शर्मा
विज्ञापन

गाजियाबाद। विधायक बनकर लखनऊ की राजनीति में पहुंचे नेताओं ने संसद में पहुंचने के लिए जोर लगाया, लेकिन गाजियाबाद लोकसभा चुनाव में जीतकर सिर्फ तीन संसद में पहुंच पाए। कई विधायक ऐसे रहे, जिन्होंने बाद में संसद पहुंचने के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन हसरत पूरी न हो पाई। लोकसभा चुनाव में दूसरे नंबर से लेकर पांचवें नंबर पर रहे। विरोधी दलों की राजनीतिक लहर कहे या जनता का उनसे मोहभंग कहा जाए, लेकिन बार-बार मैदान में उतरने पर भी वह संसद तक जाने वाले रास्ते के द्वार नहीं खोल पाए।
विधायक रहने के बाद संसद तक पहुंचने वालों में सबसे पहला नाम अनवार अहमद का रहा। अनवार अहमद वर्ष 1977 में मुरादनगर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने। इसके तीन साल बाद हुए लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने जनता दल सेक्यूलर के टिकट पर उम्मीदवारी की और जीत हासिल कर संसद में पहुंच गए। हालांकि इस जीत के बाद राजनीति में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने विधानसभा और लोकसभा के कई चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं पाए। विधायक रहते हुए संसद में पहुंचने वालों में दूसरा नाम कांग्रेस के दिवंगत नेता सुरेंद्र प्रकाश गोयल का रहा। नगर पालिका के चेयरमैन रह चुके सुरेंद्र प्रकाश गोयल ने वर्ष 2002 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर लखनऊ की राजनीति में आमद दर्ज कराई। उस वक्त उनके सितारे बुलंदी पर थे।
विज्ञापन

वर्ष 2004 में लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें गाजियाबाद-हापुड़ लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया और उन्होंने भाजपा के टिकट चार लगातार चार बार सांसद रहे रमेश चंद तोमर को हराकर जीत हासिल की। हालांकि 2004 के बाद वह कभी चुनाव नहीं जीत पाए। इसके बाद उन्होंने लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनाव में किस्मत आजमाई, लेकिन जनता ने उन्हें जीत नहीं दिलाई। गाजियाबाद के मतदाताओं ने यूपी में मंत्री और फिर मुख्यमंत्री रह चुके राजनाथ सिंह को भी संसद में पहुंचाया। वह 1977 में वह मिर्जापुर और बाद में दो बार हैदरगढ़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। इसके बाद भाजपा से राज्यसभा के सांसद बने। वर्ष 2009 में गाजियाबाद आकर उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा तो बड़ी जीत मिली। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने गाजियाबाद छोड़कर लखनऊ से चुनाव लड़ा और केंद्र सरकार में गृहमंत्री बने थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

---------
वह विधायक, जिनका संसद में पहुंचने का सपना रहा अधूरा
गाजियाबाद में कई ऐसे विधायक रहे, जिन्हें जनता ने विधानसभा में तो पहुंचा दिया, लेकिन लोकसभा तक पहुंचने से रोक दिया। इनमें बसपा से साहिबाबाद विधायक रहे अमरपाल शर्मा, बसपा से ही गाजियाबाद के विधायक रहे सुरेश बंसल, पूर्व कैबिनेट मंत्री राजपाल त्यागी, रामवीर उपाध्याय के भाई एमएलसी रहे मुकुल उपाध्याय और कांग्रेस विधायक रहे केके शर्मा का नाम भी शामिल है। अमरपाल शर्मा ने वर्ष 2009 में चुनाव लड़ा लेकिन तीसरे नंबर पर रहे। सुरेश बंसल ने 2019 में सपा के सिंबल पर टिकट लड़ा और 4.43 लाख वोट भी पाए, लेकिन भाजपा की लहर में वह जीत नहीं पाए। 1998 में राजपाल त्यागी सपा से चुनाव लड़कर दूसरे नंबर पर रहे थे। 1996 में लोकसभा चुनाव लड़े केके शर्मा पांचवें नंबर पर रहे थे। वहीं दो बार विधायक रह चुके सुरेंद्र कुमार मुन्नी को लोकसभा का चुनाव लड़ने का मौका मिलते-मिलते रह गया। साल 2019 में सपा ने उन्हें गाजियाबाद सीट से प्रत्याशी बना दिया था, लेकिन बाद में टिकट बदलकर सुरेश बंसल को दे दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed