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Ghaziabad News: नकली दवा बेचने वालों पर कार्रवाई में भी बरत रहे ढिलाई

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 27 Sep 2023 01:14 AM IST
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Laxity is also being taken in taking action against those selling fake medicines.
गाजियाबाद। हिंडन विहार के दो मेडिकल स्टोर पर नकली दवा बेचे जाने की पक्की खबर मिलने के बाद भी उन पर कार्रवाई में ढिलाई बरती जा रही है। उत्तराखंड के कोटद्वार से लाकर गाजियाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आपूर्ति करने वाले गिरोह के सदस्यों ने पुलिस को दोनों मेडिकल स्टोर के नाम-पते बता दिए थे। इसे तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन मेडिकल स्टोर संचालकों से पूछताछ तक नहीं की गई है।
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मेडिकल स्टोर संचालक जो नकली दवाएं बेच रहे थे, उनके नमूने लेकर जांच के लिए नहीं भेजे गए हैं। पुलिस को इनके बारे में जानकारी 24 सितंबर की सुबह रेलवे स्टेशन के पास से आठ लाख की नकली दवा के साथ पकड़े गए श्रीपाल निवासी हिंगवाड़ा, बीबीनगर, बुलंदशहर, मुकेश निवासी गिरजा मोड़, आरा, बिहार, शाहबेज निवासी द्वारिकापुरी, दिल्ली और पुनीत मित्तल निवासी पटेलनगर,गाजियाबाद से पूछताछ में मिली थी।
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चारों ने बताया था कि गाजियाबाद में वे सिर्फ हिंडन विहार के दो मेडिकल स्टोर पर नकली दवाएं देते हैं। रविवार को ही जब औषधि विभाग की टीम मेडिकल स्टोर पर पहुंची तो वहां ताला लटका मिला। टीम ने मेडिकल स्टोर संचालकों का पता नहीं लगाया। मेडिकल स्टोर खुलवाकर नकली दवाओं की तलाश नहीं की गई। सवाल यह है कि अगर दुकानदार नकली दवाओं को मेडिकल स्टोर से हटा देंगे तो उनके खिलाफ क्या साक्ष्य रहेगा।
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कर रहे हैं जानकारी



औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा का कहना है कि दोनों मेडिकल स्टोर बंद हैं। उनके संचालकों के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।



जल्द होगी गिरफ्तारी



दोनों मेडिकल स्टोर संचालकों के बारे में सूचनाएं एकत्र की जा रही हैं। उनकी जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। गिरोह के बाकी सदस्यों की भी तलाश चल रही है।



हाथ नहीं आए बड़े खिलाड़ी


कोटद्वार से लाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं की आपूर्ति करने वाले गिरोह को शंकर और सरफराज चलाते हैं। गिरफ्तार सदस्यों से पुलिस को इसकी जानकारी मिली। दोनों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इससे पहले भी ऐसा कई बार हुआ है जब कमीशन के लालच में नकली दवाओं की आपूर्ति करने वाले एजेंट पकड़े गए हैं, लेकिन बड़े खिलाड़ी हाथ नहीं आए हैं।




एक साल में पकड़ीं 10 करोड़ की नकली दवाएं



नकली दवाएं कितने बड़े पैमाने पर बेची जा रही हैं, इसका पता इससे चलता है कि पिछले एक साल में दस करोड़ की तो जब्त ही की जा चुकी हैं। लोनी में सबसे ज्यादा मिली हैं। दूसरे स्थान पर डासना क्षेत्र है। दस में से आठ करोड़ की दवाएं लोनी के ट्राॅनिका सिटी से पकड़ी गई थीं। यहां फैक्टरी चल रही थी। इसमें कैंसर के उपचार में काम आने वाली दवाओं की नकली दवाएं बनाई जा रही थीं। इसके अलावा मई में मोदीनगर में 1.20 करोड़ की नकली दवाएं मिलीं थीं। डासना में कई बार नकली दवाएं पकड़ी जा चुकी हैं।
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