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करोड़ों का टैक्स देने वाले औद्योगिक क्षेत्र की बदहाल सूरत
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नौ करोड़ का टैक्स देने वाले औद्योगिक क्षेत्र की बदहाल सूरत - साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में अंदरूनी सड़कों पर नहीं दिया जा रहा ध्यान - तमाम शिकायतों के बावजूद अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान
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माई सिटी रिपोर्टर
साहिबाबाद। साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र से नौ करोड़ रुपये का प्रतिवर्ष टैक्स वसूलने के बाद भी सूरत नहीं बदली है। आलम यह है कि सौर ऊर्जा मार्ग को छोड़कर अंदरूनी गलियों से सड़कें पूरी तरह गायब हो चुकी हैं। अब वहां पर मलबा और या फिर वहां मिट्टी उखड़कर गड्ढे हो रहे हैं। बारिश के बाद इन सड़कों पर जलभराव हो जाता है। आए दिन गड्ढों में गिरने से चालकों के साथ हादसे होते रहते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की मीटिंग में कई बार सड़क बनवाने की मांग उठी। मगर अभी सड़कों की सुध लेने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी चरणजीत सिंह ने बताया कि साइट-4 में सबसे ज्यादा हालत खराब गोल्डन प्रोटिन कम्पाउंड-49 नंबर में है। जबकि साहिबाबाद मंडी से औद्योगिक क्षेत्र में आने वाली रोड की हालत भी बदहाल हो चुकी है। इनके अलावा कई और अन्य सड़कें हैं। जो टूटने की वजह से उद्यमियों और कर्मचारियों को काफी परेशानी का कारण बनी हुई हैं। इतना ही नहीं, उद्यमियों ने सड़कें बनवाने के लिए प्रशासनिक और जिला उपायुक्त की मीटिंग में मुद्दा भी उठाया। लेकिन हर बार निगम अधिकारियों द्वारा संज्ञान लेने की बात का आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। उद्यमियों का आरोप है कि नगर निगम से प्रतिवर्ष 10 करोड़ रुपये तक का टैक्स दिया जाता है। नियमानुसार नगर निगम को टैक्स का 40 प्रतिशत पैसा औद्योगिक क्षेत्र में खर्च करना चाहिए।
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परिचर्चा ः
मीटिंग में उठा, मगर नहीं बदले हालात -औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों की हालत को लेकर कई बार मैं खुद अधिकारियों की मीटिंग में यह मुद्दा उठा चुका हूं। काफी जद्दोजहद के बाद सिर्फ सौर ऊर्जा मार्ग को बनाकर बाकियों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि गोल्डन कम्पांंउड और अन्य एरिये की हालत काफी बेकार है। मुकेश गुप्ता, सचिव- साई
वाहनों की फिटनेस होती है खराब ः - औद्योगिक इकाइयों से माल ट्रांसपोर्ट करने वाले अधिकांश वाहनों की फिटनेस बिगड़ने में ज्यादा टाइम नहीं लगता है। उद्यमी को तो माल खराब होने की चिंता रहती है साथ ही ट्रांसपोर्टर भी कभी-कभार माल ले जाने के लिए मना कर देते हैं। इससे कारोबार में काफी नुकसान होता है। लेकिन अपना दर्द किससे बयां करें। कुलवंंत सिंह
बारिश में टूटी सड़कें बन जाती हैं छोटे नाले ः - औद्योगिक क्षेत्र का हाल तो इतना बुरा हो चुका है कि अब तो बरसात के मौसम में पानी बहने के लिए नालों की जरूरत नहीं होती है। इतना ही नहीं, नगर निगम को प्रतिवर्ष दो करोड़ रुपये से ज्यादा का टैक्स जाता है। जिसका 40 प्रतिशत भी औद्योगिक क्षेत्र में खर्च नहीं हो पाता है। यह उद्यमियों के लिए चिंता की बात है। दिनेश मित्तल
गड्ढों में गिरकर कर्मचारियों को लगती है चोट ः -एक नहीं, कई बार हो चुका है जब टूटी सड़कों पर कर्मचारी चलते हैं तो वह गड्ढों में पैर लड़खड़ाने से गिरकर चोटिल हो जाते हैं। बुजुर्ग कर्मी को रिक्शा और साइकिल से गिरकर चोटिल भी होते रहते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत उन्हें बरसात के मौसम में होती है। जब पानी सड़कों पर चलने के लिए बल्कि पानी बहने की तस्वीर नजर आती है। अजीत तोमर ---------------- वर्ष कर वसूली 2014-15 68460973 2015-16 73739919 2016-17 88883597 2017-18 91091113 2018-19 95844188 2019-20 69018474 ( वर्ष 2019-20 का टैक्स सिर्फ अक्तूबर माह तक का है) --------------------------- सुमित कुमार
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