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काम उत्पादन क्षमता के साथ शुरू हुए उद्योग
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संशोधित... पुनः प्रेषित... कम उत्पादन के साथ औद्योगिक इकाईयों में शुरुआत - पांच दिनों में छह हजार से ज्यादा उद्योग हुए शुरू, आज जारी होगी शेष अनुमति उद्यमियों का कहना, अन्य क्षेत्रों में ढिलाई जरूरी माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। लॉकडाउन के दौरान पिछले छह दिनों में जिले के छह हजार से उद्योग शुरू हो गए हैं। जिला उद्योग केंद्र का दावा है कि इन इकाईयों में तीन लाख 14 हजार 858 श्रमिक कार्य कर रहे हैं लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है, अभी बाजार में मांग और नियमों के चलते महज 10 फीसद ही उत्पादन औद्योगिक क्षेत्र कर पा रहे हैं। उद्यमी लगातार उद्योगों से जुड़े बाजार और नियमों में सरलता की मांग कर रहे हैं। जिले में 27 हजार औद्योगिक इकाइयों को रफ्तार के साथ शुरू कराया जा रहा है। फिलहाल जो उद्योग संचालित हैं, वहां कच्चे माल की किल्लत है। श्रमिक दिल्ली, नोएडा सहित अन्य शहरों में फंसे हुए हैं। आसपास के जिलों से उद्यमी पास ना बनने के चलते अपनी इकाई को शुरू नहीं कर पा रहे हैं। खासकर माल की आवाजाही ना होने से काफी दिक्कतें हैं। जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त बीरेंद्र कुमार ने बताया कि अन्य सभी समस्यायों से जिला प्रशासन और शासन को अवगत कराया गया है। शासन के निर्देश हैं कि मालवाहकों को रोका न जाए, और उनसे पास भी न मांगा जाए। अगर वाहन खाली भी है तो उसे रोका नहीं जाएगा। अगर मालवाहकों में सवारी बैठाई जा रही है तब उन पर कार्यवाही की जाए। उन्होंने बताया कि श्रमिक, कर्मचारी और आसपास के जिलों से आने वाले उद्यमियों के लिए पास की व्यवस्था की जा रही है। --- यही रहे हालात तो लगेगा वक्त: तमाम परेशानियों को झेल रहे उद्योग पहले ही काफी नुकसान में हैं। 40 दिन की बंदी के बाद शुरू हुए उद्योग तरलता के लिए बाजारों को भी शुरू करने की मांग करने लगे हैं। जब तक देश भर के बाजार नहीं खुलेंगे तब तक जिले के यांत्रिकी उत्पादों को रफ्तार नहीं मिलेगी। --- सबसे अधिक यांत्रिकी उत्पादन: जिले में ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, मशीनरी पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स सहित तमाम यांत्रिकी उत्पाद तैयार होते हैं। देश ही नहीं विदेश में भी गाजियाबाद के उत्पादों को भेजा जाता है। लोहा मंडी खुलने और ट्रांसपोर्ट के सुचारू होने के बाद उद्योगों को पंख लगेंगे। --- क्या कहते हैं उद्यमी: जिस तरह से उद्योग जिले में शुरू कराए गए, वो तारीफे काबिल है। इस तरह उद्योग से जुड़ी कड़ियों को भी शुरू कराया जाए। शासन प्रशासन एक्शन प्लान तैयार करे। नवीन अग्रवाल, उद्यमी --- उद्योग शुरू हो गए ये बड़ी उपलब्धि है लेकिन उत्पादन किसके लिए क्या जाए, ये बड़ा सवाल है। ऐसे ही लॉकडाउन जारी रहा तो उद्योगों को साल से डेढ साल का समय पटरी पर आने में लगेगा। अशोक गुलाटी, उद्यमी --- ऐसे हालातों में इंडस्ट्री शुरू हुईं हैं, जब ना तो बाजार में मांग है और ना ही पहले जैसी स्वतंत्रता। ऐसे हालातों के साथ 2 साल में भी उद्योग आगे नहीं बढ़ पाएंगे। अश्वनी तनेजा, उद्यमी --- 40 से 45 दिन की बंदी के बाद उद्योग एक से दो साल पीछे चले गए हैं। उद्योगों को चलाने के लिए योजना बनाया जाना भी जरूरी है, जिससे बिगड़ी अर्थव्यवस्था को भी समय के साथ सही किया जा सके। सुशील अरोड़ा, उद्यमी ---
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