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Ghaziabad News: पराबैंगनी विकिरण बढ़ने से तपन में वृद्धि

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jun 2023 01:09 AM IST
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increase in temperature due to increase in ultraviolet radiation
साहिबाबाद। इस बार बेमौसम बारिश होने से गाजियाबाद में अप्रैल, मई माह सामान्य से ज्यादा ठंडा रहा, लेकिन जून माह में औसतन तापमान 34-40 डिग्री सेल्सियस होने के बावजूद भी गर्मी (तपन) ज्यादा महसूस हो रही है। इसका कारण पराबैंगनी किरणों का विकिरण (यूवी रेडियेशन) स्तर 11 तक पहुंचना है। इसका प्रभाव शरीर के साथ-साथ प्रकृति के लिए भी घातक साबित हो रहा है। यह दावा इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज में चल रहे विज्ञानघर रियलिटी शो के दो शोधार्थी ने शोध के बाद किया है। इस शो में बीस बाल वैज्ञानिक शामिल हुए, जो देश के कोने कोने से आए हैं।
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चित्तौड़गढ़ के रहने वाले शोधार्थी मोहम्मद ताहिर ने बताया कि कॉलेज परिसर में लक्स मीटर (प्रकाश की तीव्रता मापक), यूवी इंडेक्स मीटर, जीपीएस आदि उपकरणों की मदद से रिडिंग (माप) ली गई। धूप में रखकर सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक हर घंटे रीडिंग दर्ज करने पर पाया गया कि सुबह आठ से नौ बजे के बीच यूवी इंडेक्स पर पराबैंगनी विकिरण स्तर 2-3 के आसपास रहा जबकि दस से 11 बजे स्तर छह के पार और 12 से एक बजे के बीच विकिरण स्तर 11 के आसपास दर्ज किया गया। फिर हर घंटे स्तर घटते क्रम में रहा और छह बजे स्तर दो दर्ज किया गया। शोधार्थी कुंदन ने बताया कि जून माह में विकिरण की तीव्रता अपने खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है, जबकि गाजियाबाद में दोपहर के समय पराबैंगनी विकिरण का स्तर 11 से भी ज्यादा है। यह चरम स्तर वनस्पति व मनुष्य के लिए खतरनाक है।
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ताहिर ने बताया कि ओजोन परत का लगातार हो रहा नुकसान है। प्रदूषण और कम हरियाली के कारण विकिरण से बचाने वाली ओजोन परत पतली होती जा रही है। इससे पराबैंगनी विकिरण का स्तर बढ़ रहा है। इससे बचने के लिए चल रही प्रवृत्तियों व जीवन शैली में बदलाव, हरित आवरण को बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसमें स्थानीय प्रजाति के पौधों का चयन सबसे ज्यादा लाभदायक होगा। पराबैंगनी किरणें शरीर का तापमान बढ़ाती हैं। इससे डिहाइड्रेशन, उल्टी दस्त, शरीर में अकड़न, आंखों में जलन, मोतियाबिंद, स्किन कैंसर, खुजली व त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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क्या होता है यूवी इंडेक्स
शोधार्थी ने बताया कि इस सूचकांक से पृथ्वी के किसी भी हिस्से पर पड़ने वाली पराबैंगनी किरणों (यूवी इंडेक्स) का मापन किया जाता है। सूचकांक पर 0 से 2 के स्तर को सुरक्षित, 3-5 के स्तर को घातक नहीं माना जाता है, लेकिन 6-7 को उच्च स्तर और 8-10 या इससे ऊपर अति उच्च स्तर होता है। घातकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्तर 8 से अधिक होने पर किरणें 15 मिनट में त्वचा को झुलसा सकती है। ओजोन के प्रभावित होने से छाती में दर्द, खांसी, गले में जलन व सूजन भी आती है। यह अस्थमा रोगियों के लिए भी खतरनाक है।

- विज्ञानघर में बाल वैज्ञानिकों ने प्रस्तुत किए मॉडल
विज्ञान घर रियलिटी शो के पांचवें दिन सोमवार को बाल वैज्ञानिकों ने मॉडल प्रस्तुत किए। विज्ञान गुरु दीपक शर्मा ने बताया कि सोमवार को सदस्यों ने सुबह उठकर विज्ञान घर की साफ-सफाई की व सभी ने स्नान कर नाश्ता किया। विज्ञानघर में अपने मॉडल को पूरा किया। पांचवें दिन विज्ञानघर पहुंचे उत्तर प्रदेश विज्ञान भारती प्रमुख डॉ. सोमदेव भारद्वाज ने घर के सदस्यों को ज्ञान की उत्पत्ति व अर्थ के बारे में बताया। दोपहर बाद आयोजित प्रदर्शनी में हर्ष ने ऊर्जा की बचत, अश्विनी ने वनस्पति व जंतु कोशिका, पलक ने विद्युत अपशिष्ट व प्लास्टिक, कुंदन ने अग्निसूचक यंत्र व लेजर से बचाव, खुशी ने ध्वनि नियंत्रक, कार्तिकेय ने एलपीजी गैस सूचक, गौरव, हर्षित व हेमंत ने विद्युत ट्रॉली, मोहम्मद ताहिर ने पशुओं का प्रयोग कर कम दाम पर खेती व मनुष्यों की गतिविधियों का ओजोन परत पर प्रभाव आदि विषय पर मॉडल प्रस्तुत किए। वहीं मंगलवार को उत्तराखंड जाने वाली यात्रा के बारे में सभा कर जानकारी दी।
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