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25 एटीएम में से सिर्फ एक में कैश
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Sun, 04 Dec 2016 01:14 AM IST
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बैंक
- फोटो : अमर उजाला
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कैश की किल्लत से जूझ रहे लोग दिन क्या रात में भी एटीएम के चक्कर लगा रहे हैं। हालात यह हैं कि शहर के ज्यादातर एटीएम बूथ के शटर गिरे हुए हैं। अमर उजाला की टीम ने देर रात 10 बजे कविनगर, अंबेडकर रोड, नवयुग मार्केट और मालीवाड़ा में एटीएम की स्थिति को मौके पर जाकर देखा तो लगभग दो दर्जन एटीएम में से सिर्फ नवयुग मार्केट स्थित एसबीआई के एटीएम पर कैश निकलता मिला। शहर के इन चारों इलाकों की आबादी करीब 2 लाख की है। ऐसे में एक एटीएम पर कैश के लिए इतनी रात को भी लंबी लाइन लगी हुई थी।
बता दें कि नोटबंदी के 26वें दिन भी हालात सुधर नहीं रहे हैं। दिन में बैंकों से कैश नहीं मिलता, जिस पर रात में एटीएम के चक्कर लगाए जाते हैं। फिर भी कैश नहीं मिल पा रहा है। लोगों का आरोप है कि एक तरफ सरकार कह रही है कि एकाउंट से 24 हजार और एटीएम से 2500 रुपये तक निकाल सकते हैं जबकि स्थिति इसके विपरीत है। जद्दोजहद करने के बाद लोगों को एकाउंट से 2 से 5 हजार रुपये और एटीएम से तो कैश ही नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि कामकाजी लोग ऑफिस से घर पहुंचने के बाद सीधे एटीएम जाकर कैश के लिए लाइन में लग जा रहे हैं।
सीन 1 (रात 9.45 बजे)
अंबेडकर रोड पर एचडीएफसी, एक्सिस, पीएनबी, सिटी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम हैं। एचडीएफसी में शाम को कैश डाला गया पर वह एक घंटे के अंदर ही खत्म हो गया। बाकी किसी भी एटीएम से कैश नहीं निकल रहा था। सभी के शटर डाउन थे।
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सीन 2 (9.50)
नवयुग मार्केट स्थित एसबीआई की मेन ब्रांच, बीओबी, पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, यूनियन बैंक, युनाइटेड बैंक, सिंडिकेट बैंक, सेंट्रल बैंक, आंध्रा बैंक, इंडियन बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक के एटीएम के बाहर सन्नाटा पसरा था। किसी भी एटीएम में कैश नहीं था। सिर्फस्टेट बैंक ऑफ पटियाला के एटीएम के बाहर लोगों की लाइन लगी थी।
सीन 3 (10.05 बजे)
मालीवाड़ा में आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी, पीएनबी, लक्ष्मी विलास बैंक, नेहरू नगर स्थित पीएनबी और यूनियन बैंक के एटीएम भी बंद ही थे। लोग यहां पहुंचे पर शटर डाउन देख कर वापस लौट गए। कविनगर स्थित पीएनबी, एसबीआई के एटीएम की भी यही हालत थी।
- बोले लोग
- घर खर्च के लिए ही रात में भी घूमना पड़ रहा है। एटीएम पर बैंक कैश का पर्याप्त इंतजाम कर दे तो यह भीड़ नहीं लगेगी। - राजेश कुमार, घूकना
- मोबाइल पर एप देख कर आया था कि एचडीएफसी के एटीएम में कैश है, लेकिन यहां कैश है ही नहीं। - विशाल, डूड़ाहेडा
- ऑफिस से आने के बाद रात में एटीएम के चक्कर लगाने पड़ते हैं। लाइन पार क्षेत्र में दो-तीन एटीएम से ही कैश मिल रहा है, लेकिन उसके लिए भी लंबी लाइन है। - रेहान, विजय नगर
नोट बंदी से बैंकों में अटकी एफडीआर, विकास कार्यों में अड़ंगा
नोट बंदी की वजह से नगर निगम ठेकेदारों की एफडीआर भी अटक गई। ठेकेदार अब परफॉरमेंस गारंटी के रूप में जमा कराने के लिए एफडीआर नहीं बनवा पा रहे हैं। हालात यही रहे तो निर्माण कार्यों की फाइलें पूरी नहीं हो पाएंगी और नोट बंदी का अड़ंगा विकास कार्यों में भी लग जाएगा।
नगर निगम के निर्माण विभाग ने अक्तूबर में 584 विकास कार्यो के टेंडर जारी किए थे। इनमें से अधिकांश टेंडर एस्टिमेट से 20-25 फीसदी कम दरों पर आए हैं। निगम अधिकारियों ने एस्टिमेट से कम दरों पर टेंडर डालने वाले कांट्रेक्टरों से एफडीआर के रूप में परफॉरमेंस गारंटी मांगी है।
8 नवंबर से नोट बंदी की वजह के चलते पहले बैंकों में पुराने नोट बदलवाने के लिए और अब जमा कराने व खातों से पैसा निकालने के लिए कतारें लगी हुई है। बैंकों का ज्यादातर स्टाफ भी इसी काम में लगा हुआ है। ऐसे में बाकी काम भी अटके हुए हैं।
निगम कांट्रेक्टरों का कहना है कि एफडीआर बनवाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई दिन की मशक्कत के बाद भी एफडीआर नहीं बन पा रही हैं। उधर, नगर निगम के चीफ इंजीनियर आरके मित्तल का कहना है कि समय पर एफडीआर जमा नहीं की तो नियमानुसार टेंडर कैंसल कर दिया जाएगा।
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बता दें कि नोटबंदी के 26वें दिन भी हालात सुधर नहीं रहे हैं। दिन में बैंकों से कैश नहीं मिलता, जिस पर रात में एटीएम के चक्कर लगाए जाते हैं। फिर भी कैश नहीं मिल पा रहा है। लोगों का आरोप है कि एक तरफ सरकार कह रही है कि एकाउंट से 24 हजार और एटीएम से 2500 रुपये तक निकाल सकते हैं जबकि स्थिति इसके विपरीत है। जद्दोजहद करने के बाद लोगों को एकाउंट से 2 से 5 हजार रुपये और एटीएम से तो कैश ही नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि कामकाजी लोग ऑफिस से घर पहुंचने के बाद सीधे एटीएम जाकर कैश के लिए लाइन में लग जा रहे हैं।
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सीन 1 (रात 9.45 बजे)
अंबेडकर रोड पर एचडीएफसी, एक्सिस, पीएनबी, सिटी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम हैं। एचडीएफसी में शाम को कैश डाला गया पर वह एक घंटे के अंदर ही खत्म हो गया। बाकी किसी भी एटीएम से कैश नहीं निकल रहा था। सभी के शटर डाउन थे।
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सीन 2 (9.50)
नवयुग मार्केट स्थित एसबीआई की मेन ब्रांच, बीओबी, पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, यूनियन बैंक, युनाइटेड बैंक, सिंडिकेट बैंक, सेंट्रल बैंक, आंध्रा बैंक, इंडियन बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक के एटीएम के बाहर सन्नाटा पसरा था। किसी भी एटीएम में कैश नहीं था। सिर्फस्टेट बैंक ऑफ पटियाला के एटीएम के बाहर लोगों की लाइन लगी थी।
सीन 3 (10.05 बजे)
मालीवाड़ा में आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी, पीएनबी, लक्ष्मी विलास बैंक, नेहरू नगर स्थित पीएनबी और यूनियन बैंक के एटीएम भी बंद ही थे। लोग यहां पहुंचे पर शटर डाउन देख कर वापस लौट गए। कविनगर स्थित पीएनबी, एसबीआई के एटीएम की भी यही हालत थी।
- बोले लोग
- घर खर्च के लिए ही रात में भी घूमना पड़ रहा है। एटीएम पर बैंक कैश का पर्याप्त इंतजाम कर दे तो यह भीड़ नहीं लगेगी। - राजेश कुमार, घूकना
- मोबाइल पर एप देख कर आया था कि एचडीएफसी के एटीएम में कैश है, लेकिन यहां कैश है ही नहीं। - विशाल, डूड़ाहेडा
- ऑफिस से आने के बाद रात में एटीएम के चक्कर लगाने पड़ते हैं। लाइन पार क्षेत्र में दो-तीन एटीएम से ही कैश मिल रहा है, लेकिन उसके लिए भी लंबी लाइन है। - रेहान, विजय नगर
नोट बंदी से बैंकों में अटकी एफडीआर, विकास कार्यों में अड़ंगा
नोट बंदी की वजह से नगर निगम ठेकेदारों की एफडीआर भी अटक गई। ठेकेदार अब परफॉरमेंस गारंटी के रूप में जमा कराने के लिए एफडीआर नहीं बनवा पा रहे हैं। हालात यही रहे तो निर्माण कार्यों की फाइलें पूरी नहीं हो पाएंगी और नोट बंदी का अड़ंगा विकास कार्यों में भी लग जाएगा।
नगर निगम के निर्माण विभाग ने अक्तूबर में 584 विकास कार्यो के टेंडर जारी किए थे। इनमें से अधिकांश टेंडर एस्टिमेट से 20-25 फीसदी कम दरों पर आए हैं। निगम अधिकारियों ने एस्टिमेट से कम दरों पर टेंडर डालने वाले कांट्रेक्टरों से एफडीआर के रूप में परफॉरमेंस गारंटी मांगी है।
8 नवंबर से नोट बंदी की वजह के चलते पहले बैंकों में पुराने नोट बदलवाने के लिए और अब जमा कराने व खातों से पैसा निकालने के लिए कतारें लगी हुई है। बैंकों का ज्यादातर स्टाफ भी इसी काम में लगा हुआ है। ऐसे में बाकी काम भी अटके हुए हैं।
निगम कांट्रेक्टरों का कहना है कि एफडीआर बनवाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई दिन की मशक्कत के बाद भी एफडीआर नहीं बन पा रही हैं। उधर, नगर निगम के चीफ इंजीनियर आरके मित्तल का कहना है कि समय पर एफडीआर जमा नहीं की तो नियमानुसार टेंडर कैंसल कर दिया जाएगा।