{"_id":"5716827b4f1c1b32668b46d5","slug":"in-municipal-advertising-snafu","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगर निगम में अब विज्ञापन घ्ापला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर निगम में अब विज्ञापन घ्ापला
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Wed, 20 Apr 2016 01:30 AM IST
विज्ञापन
नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डस्टबिन, कंप्यूटर और वाहन खरीदने में ही नहीं नगर निगम अफसरों ने शहर में विज्ञापन ठेका देने में भी मनमानी की। महापौर की सीट खाली रहने के दौरान निगम अफसरों ने अपने चहेतों को विज्ञापन के ठेके दे दिए।
शहर में एक ही फर्म को 150 यूनिपोल लगाने का काम मामूली रकम जमा करा कर दे दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इसका प्रस्ताव न तो कार्यकारिणी समिति में पास कराया गया और न निगम बोर्ड में।
मेयर चुनाव से पहले ही अफसरों ने इस फर्म के लिए वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया। अब इस फर्म ने यूनिपोल लगाने के लिए शहर के डिवाइडरों को तोड़ना शुरू कर दिय है।
विज्ञापन
कार्यकारिणी समिति और निगम बोर्ड तकरीबन एक साल पहले यह निर्णय ले चुका, है कि बिना सदन व कार्यकारिणी की स्वीकृति के बीओटी कांट्रेक्ट नहीं दिया जाएगा।
सदन ने यह भी फैसला लिया था कि अनुबंध की शर्तों को पूरा न करने वाली फर्मों के कांट्रेक्ट निरस्त कर शहर की सड़कों से उनके विज्ञापन हटाए जाएंगे। निगम अफसरों ने महापौर की कुर्सी खाली होने का फायदा उठाया और गुपचुप बीओटी (बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर) पैटर्न पर ठेके छोड़ दिए।
निगम ने गैटमोर नाम की एक फर्म को 150 स्थानों पर विज्ञापन लगाने की अनुमति दी। इसकी एवज में फर्म को सिर्फ दिशा सूचक बोर्ड लगाने की जिम्मेदारी दी गई। जबकि यह दिशा सूचक बोर्ड शहर में पहले से लगे थे।
निगम अफसरों ने इस फर्म को पांच साल विज्ञापन लगाकर कमाई करने का ‘लाइसेंस’ दे दिया। अब इस फर्म ने शहर के डिवाइडरों को खोद कर यूनिपोल लगाने का काम शुरू कर दिया है। निगम को इससे सिर्फ 2200 रुपये प्रति वर्ग मीटर वार्षिक विज्ञापन शुल्क मिलेगा।
एक ही सड़क को दो बार दिया बीओटी पर
निगम अधिकारी कलक्ट्रेट रोड, मेरठ रोड, जीटी रोड समेत तमाम प्रमुख मार्गों को पहले ही बीओटी पर दे चुके हैं। डिवाइडरों और स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस की एवज में इन फर्म को भी विज्ञापन यूनिपोल लगाने की अनुमति दी जा चुकी है। अब निगम अफसरों ने नियमों को ताक पर रख फिर दूसरी फर्म को विज्ञापन लगाने का ठेका दे दिया।
मूर्ति से कमाई की बीओटी फर्म ने, खर्चा करा रहा निगम
नगर निगम ने मेयर की सीट खाली रहने के दौरान ही शहर में लगी महापुरुषों की 34 मूर्तियों को भी बीओटी पर दिया है। इन मूर्तियों के रखरखाव का जिम्मा फर्म को देकर इसकी एवज में विज्ञापनों से कमाई की अनुमति दी गई है।
अनुबंध के मुताबिक इसी फर्म को मूर्ति क्षतिग्रस्त होने पर उन्हें बदलना भी है, लेकिन हाल ही में अंबेडकर पार्क में लगी डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने पर नगर निगम ने 19 लाख रुपये खर्च कर दिए।
निर्माण विभाग ने मूर्ति के लिए प्लेटफार्म बनवाया है। इस निर्माण के लिए 19 लाख रुपये की फाइल तैयार की गई है। निगम सूत्रों का दावा है कि इसमें 11 लाख रुपये मूर्ति की कीमत का भी भुगतान किया गया है।
बीओटी फर्म को सीधे-सीधे 19 लाख का फायदा और नगर निगम को नुकसान पहुंचाया गया है। हालांकि निगम अफसरों का कहना है कि मूर्ति प्रशासन ने मंगाई है। इसमें निगम का पैसा खर्च नहीं किया गया।
मेयर के निधन के बाद निगम अफसरों ने मनमानी कर बीओटी ठेके दिए हैं। शहर में विज्ञापन लगाने की अनुमति दे दी गई है। अंबेडकर प्रतिमा को लगाने उसके प्लेटफार्म पर होने वाले खर्च को बीओटी फर्म को वहन करना था, लेकिन निगम अधिकारियों ने फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए 19 लाख रुपये खर्च कर दिए। घोटाले कर अफसर निगम को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सदन में प्रस्ताव लाकर मूर्ति पर होने वाले खर्च के भुगतान पर रोक लगाने की मांग की जाएगी। महापौर से मामले की जांच की मांग भी करेंगे। - मुकेश त्यागी, सीनियर पार्षद
महापौर बोले
मामला गंभीर है। मूर्ति के रखरखाव और क्षतिग्रस्त होने पर फर्म को खर्च वहन करने की जिम्मेदारी दी गई है तो निगम से फाइल क्यों बनाई गई। बीओटी पर प्राइवेट फर्म को 150 यूनिपोल लगाने का ठेका बिना कार्यकारिणी और सदन की अनुमति के कैसे दे दिया गया। दोनों मामलों की जांच कराई जाएगी। - अशु वर्मा, महापौर ।
विज्ञापन
शहर में एक ही फर्म को 150 यूनिपोल लगाने का काम मामूली रकम जमा करा कर दे दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इसका प्रस्ताव न तो कार्यकारिणी समिति में पास कराया गया और न निगम बोर्ड में।
विज्ञापन
मेयर चुनाव से पहले ही अफसरों ने इस फर्म के लिए वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया। अब इस फर्म ने यूनिपोल लगाने के लिए शहर के डिवाइडरों को तोड़ना शुरू कर दिय है।
विज्ञापन
कार्यकारिणी समिति और निगम बोर्ड तकरीबन एक साल पहले यह निर्णय ले चुका, है कि बिना सदन व कार्यकारिणी की स्वीकृति के बीओटी कांट्रेक्ट नहीं दिया जाएगा।
सदन ने यह भी फैसला लिया था कि अनुबंध की शर्तों को पूरा न करने वाली फर्मों के कांट्रेक्ट निरस्त कर शहर की सड़कों से उनके विज्ञापन हटाए जाएंगे। निगम अफसरों ने महापौर की कुर्सी खाली होने का फायदा उठाया और गुपचुप बीओटी (बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर) पैटर्न पर ठेके छोड़ दिए।
निगम ने गैटमोर नाम की एक फर्म को 150 स्थानों पर विज्ञापन लगाने की अनुमति दी। इसकी एवज में फर्म को सिर्फ दिशा सूचक बोर्ड लगाने की जिम्मेदारी दी गई। जबकि यह दिशा सूचक बोर्ड शहर में पहले से लगे थे।
निगम अफसरों ने इस फर्म को पांच साल विज्ञापन लगाकर कमाई करने का ‘लाइसेंस’ दे दिया। अब इस फर्म ने शहर के डिवाइडरों को खोद कर यूनिपोल लगाने का काम शुरू कर दिया है। निगम को इससे सिर्फ 2200 रुपये प्रति वर्ग मीटर वार्षिक विज्ञापन शुल्क मिलेगा।
एक ही सड़क को दो बार दिया बीओटी पर
निगम अधिकारी कलक्ट्रेट रोड, मेरठ रोड, जीटी रोड समेत तमाम प्रमुख मार्गों को पहले ही बीओटी पर दे चुके हैं। डिवाइडरों और स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस की एवज में इन फर्म को भी विज्ञापन यूनिपोल लगाने की अनुमति दी जा चुकी है। अब निगम अफसरों ने नियमों को ताक पर रख फिर दूसरी फर्म को विज्ञापन लगाने का ठेका दे दिया।
मूर्ति से कमाई की बीओटी फर्म ने, खर्चा करा रहा निगम
नगर निगम ने मेयर की सीट खाली रहने के दौरान ही शहर में लगी महापुरुषों की 34 मूर्तियों को भी बीओटी पर दिया है। इन मूर्तियों के रखरखाव का जिम्मा फर्म को देकर इसकी एवज में विज्ञापनों से कमाई की अनुमति दी गई है।
अनुबंध के मुताबिक इसी फर्म को मूर्ति क्षतिग्रस्त होने पर उन्हें बदलना भी है, लेकिन हाल ही में अंबेडकर पार्क में लगी डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने पर नगर निगम ने 19 लाख रुपये खर्च कर दिए।
निर्माण विभाग ने मूर्ति के लिए प्लेटफार्म बनवाया है। इस निर्माण के लिए 19 लाख रुपये की फाइल तैयार की गई है। निगम सूत्रों का दावा है कि इसमें 11 लाख रुपये मूर्ति की कीमत का भी भुगतान किया गया है।
बीओटी फर्म को सीधे-सीधे 19 लाख का फायदा और नगर निगम को नुकसान पहुंचाया गया है। हालांकि निगम अफसरों का कहना है कि मूर्ति प्रशासन ने मंगाई है। इसमें निगम का पैसा खर्च नहीं किया गया।
मेयर के निधन के बाद निगम अफसरों ने मनमानी कर बीओटी ठेके दिए हैं। शहर में विज्ञापन लगाने की अनुमति दे दी गई है। अंबेडकर प्रतिमा को लगाने उसके प्लेटफार्म पर होने वाले खर्च को बीओटी फर्म को वहन करना था, लेकिन निगम अधिकारियों ने फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए 19 लाख रुपये खर्च कर दिए। घोटाले कर अफसर निगम को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सदन में प्रस्ताव लाकर मूर्ति पर होने वाले खर्च के भुगतान पर रोक लगाने की मांग की जाएगी। महापौर से मामले की जांच की मांग भी करेंगे। - मुकेश त्यागी, सीनियर पार्षद
महापौर बोले
मामला गंभीर है। मूर्ति के रखरखाव और क्षतिग्रस्त होने पर फर्म को खर्च वहन करने की जिम्मेदारी दी गई है तो निगम से फाइल क्यों बनाई गई। बीओटी पर प्राइवेट फर्म को 150 यूनिपोल लगाने का ठेका बिना कार्यकारिणी और सदन की अनुमति के कैसे दे दिया गया। दोनों मामलों की जांच कराई जाएगी। - अशु वर्मा, महापौर ।