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Ghaziabad News: शिक्षा विभाग में पकड़ा गया करोड़ों का एचआरए घोटाला

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 25 Oct 2025 12:33 AM IST
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HRA scam worth crores detected in Education Department
गाजियाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में 10 सालों से चल रहा करोड़ों का मकान किराया भत्ता (हाउस रेंट अलांउस यानि एचआरए) घोटाला पकड़ा गया है। इसकी जांच प्रशासन स्तर से कराई जा रही है। जांच अधिकारी ने इस संबंध में वह पत्र मांगा है, जिसके आधार पर नगर क्षेत्र के आठ किमी से अधिक दायरों वालों को भी शहरी क्षेत्र के आधार पर भत्ता राशि दी गई।
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नियमानुसार सभी अधिकारी, कर्मचारियों और शिक्षकों को ग्रेड के अनुसार मकान किराया भत्ता दिया जाता है। जिसमें शिक्षकों का ग्रेड 4200, 4600 और 4800 है। इसके अनुसार सबकी भत्ता राशि शहर और ग्रामीण क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग है। जैसे 4200 वाले शिक्षक को शहर में 4040 रुपये मकान का किराया, 4600 वाले को 5520 रुपये और 4800 वाले को 5620 रुपये दिए जाते हैं। ऐसे ही जैसे ही ग्रेड बढ़ता जाता है, किराया भत्ता बढ़ता जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में यह भत्ता आधा दिया जाता है। शहर क्षेत्र के सभी शिक्षकों को शहरी भत्ता दिया जाता है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्र की बाहरी सीमा के आठ किमी के दायरे में आने वाले स्कूल के शिक्षकों को भी इसी दर से यह राशि दी जाती है। इसमें घपला किया गया है। इसी दायरे का फायदा उठाकर बहुत से 15 से 20 किमी दूर स्कूलों के शिक्षक शिक्षा कर्मचारियों की मिलीभगत से सालों से फर्जी बिल और नकली मुहर लगाकर इसमें घालमेल कर रहे हैं।
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इस बात का खुलासा उस समय हुआ, जब शिक्षक संघ ने घोटाले की जांच के लिए शिक्षा विभाग को पत्र लिखा, जो लीक हो गया। इस समय जिले में सबसे अधिक 4600 ग्रेड वाले शिक्षक हैं। जिनको ग्रामीण क्षेत्र में 2760 रुपये किराया भत्ता दिया जाना चाहिए, लेकिन वह 5520 रुपये लेकर दोगुना किराया भत्ता वसूल रहे हैं। इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव का कहना है कि परियोजना निदेशक मामले की जांच कर हैं, जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनसे रिकवरी की जाएगी।
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किसको दिया जाता है भत्ता



जिस भी अधिकारी, कर्मचारी या शिक्षक को सरकारी मकान नहीं मिलता है, उसे मकान किराया भत्ता दिया जाता है। जो ग्रेड और शहरी-ग्रामीण क्षेत्र की सीमा के अनुसार अलग-अलग निर्धारित है।

मोदीनगर, मुरादनगर के शिक्षक भी ले रहे शहरी भत्ता
इस समय जिले में कुल 2062 शिक्षक हैं। इनमें से शहर में 236 शिक्षक तैनात हैं। ग्रामीण क्षेत्र में कुल 1826 शिक्षक हैं। करीब पांच शिक्षकों को आठ किमी दायरे के हिसाब से शहरी भत्ता मिलना चाहिए, लेकिन करीब एक हजार से अधिक शिक्षक इसका फायदा उठा रहे हैं। इसमें लोनी से लेकर मोदीनगर से मुरादगनर तक के शिक्षक शामिल हैं। जांच में कई कर्मचारियों के भी दुगुना भत्ता लिए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि 2015 से यह भत्ते का खेल चल रहा है।

प्रदीप कुमार पांडेय, परियोजना निदेशक, जांच अधिकारी ने मामले में बताया मामले की जांच की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी की अनुमति के बिना शहर क्षेत्र के बाहर वालों को भत्ता नहीं दिया जा सकता है। किसके पत्र के आधार पर ग्रामीण क्षेत्र वालों को भी शहर का किराया भत्ता दिया जा रहा है, वह पत्र बेसिक शिक्षा विभाग से मांगा गया है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए रिकवरी की जाएगी।

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