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गुपचुप घटाया जा रहा हाउस टैक्स
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पुरानी फाइलों पर सुनवाई कर गुपचुप घटाया जा रहा हाउस टैक्स
गाजियाबाद। नगर निगम में भवनों पर टैक्स निर्धारण करने के बाद फिर से गुपचुप फाइलों पर सुनवाई करके टैक्स घटाया जा रहा है। यह खेल नगर निगम मुख्यालय में बैठने वाले टैक्स के एक अधिकारी के जरिए किया जा रहा है। भाजपा नेता व निगम के पूर्व पार्षद मुकेश त्यागी ने टैक्स विभाग के एक अधिकारी पर आरोप लगाते हुए दस्तावेज के साथ नगर आयुक्त को शिकायत भेजी है।
मुकेश त्यागी का कहना है कि नगर निगम की ओर से किसी भी भवन पर कर निर्धारण करके आपत्ति मांगी जाती है। भवन मालिक की आपत्ति का निस्तारण करने के बाद टैक्स बिल जारी कर दिया जाता है। नगर निगम अधिनियम-1959 की धारा- 472 के तहत जिन भवनों पर टैक्स का निर्धारण हो चुका है उनकी सुनवाई का अधिकार न्यायालय को होता है। उनका आरोप है कि नगर निगम में टैक्स विभाग के एक बड़े अधिकारी नगर निगम अधिनियम के विरुद्ध जाकर जोन में फाइलों पर दोबारा सुनवाई कर रहे हैं। इनमें संपत्ति का क्षेत्रफल कम दर्शाकर हाउस टैक्स भी कम किया जा रहा है। इसकी एवज में अधिकारी आर्थिक लाभ कमा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे अधिकारी नगर निगम को हानि पहुंचा रहे हैं। उन्होंने शिकायत के साथ कुछ दस्तावेज भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर सुनवाई न हुई तो वह नगर विकास मंत्री और मुख्यमंत्री को दस्तावेजों की कॉपी भेजेंगे।
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दुकानों से गलत तरीके से लिए जा रहा पानी-सीवर टैक्स
भाजपा के पूर्व पार्षद मुकेश त्यागी ने दुकानों पर सीवर व वाटर टैक्स लगाए जाने का भी विरोध किया है। उन्होंने नगरायुक्त को शिकायत भेजकर इसमें संशोधन किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में बनी दुकानों से भी नगर निगम व्यावसायिक दरों से भवन कर के साथ सीवर व वाटर टैक्स वसूल रहा है। उनका कहना है कि जब एक बार निगम ने पूरे भवन पर सीवर-वाटर टैक्स लगा दिया तो दुकानों पर दोबारा व्यावसायिक दरों से सीवर-वाटर टैक्स लगाकर खेल क्यों किया जा रहा है।
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गाजियाबाद। नगर निगम में भवनों पर टैक्स निर्धारण करने के बाद फिर से गुपचुप फाइलों पर सुनवाई करके टैक्स घटाया जा रहा है। यह खेल नगर निगम मुख्यालय में बैठने वाले टैक्स के एक अधिकारी के जरिए किया जा रहा है। भाजपा नेता व निगम के पूर्व पार्षद मुकेश त्यागी ने टैक्स विभाग के एक अधिकारी पर आरोप लगाते हुए दस्तावेज के साथ नगर आयुक्त को शिकायत भेजी है।
मुकेश त्यागी का कहना है कि नगर निगम की ओर से किसी भी भवन पर कर निर्धारण करके आपत्ति मांगी जाती है। भवन मालिक की आपत्ति का निस्तारण करने के बाद टैक्स बिल जारी कर दिया जाता है। नगर निगम अधिनियम-1959 की धारा- 472 के तहत जिन भवनों पर टैक्स का निर्धारण हो चुका है उनकी सुनवाई का अधिकार न्यायालय को होता है। उनका आरोप है कि नगर निगम में टैक्स विभाग के एक बड़े अधिकारी नगर निगम अधिनियम के विरुद्ध जाकर जोन में फाइलों पर दोबारा सुनवाई कर रहे हैं। इनमें संपत्ति का क्षेत्रफल कम दर्शाकर हाउस टैक्स भी कम किया जा रहा है। इसकी एवज में अधिकारी आर्थिक लाभ कमा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे अधिकारी नगर निगम को हानि पहुंचा रहे हैं। उन्होंने शिकायत के साथ कुछ दस्तावेज भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर सुनवाई न हुई तो वह नगर विकास मंत्री और मुख्यमंत्री को दस्तावेजों की कॉपी भेजेंगे।
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दुकानों से गलत तरीके से लिए जा रहा पानी-सीवर टैक्स
भाजपा के पूर्व पार्षद मुकेश त्यागी ने दुकानों पर सीवर व वाटर टैक्स लगाए जाने का भी विरोध किया है। उन्होंने नगरायुक्त को शिकायत भेजकर इसमें संशोधन किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में बनी दुकानों से भी नगर निगम व्यावसायिक दरों से भवन कर के साथ सीवर व वाटर टैक्स वसूल रहा है। उनका कहना है कि जब एक बार निगम ने पूरे भवन पर सीवर-वाटर टैक्स लगा दिया तो दुकानों पर दोबारा व्यावसायिक दरों से सीवर-वाटर टैक्स लगाकर खेल क्यों किया जा रहा है।
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