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Ghaziabad News: कामकाजी महिलाओं के लिए 18 करोड़ से बनेगा छात्रावास
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गाजियाबाद। कामकाजी महिलाओं के लिए 18 करोड़ से छात्रावास बनेगा। नगर निगम ने कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस को मरियमनगर में 3000 वर्ग मीटर दे दी है। यह छात्रावास सेफ सिटी के तहत बनाया जाएगा।
राज्य स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत राजनगर एक्सटेंशन में 200 बेड का छात्रावास बनाने का प्रस्ताव पास किया गया था। इसके लिए जमीन भी चिन्हित की गई। पिछले हफ्ते प्रमुख सचिव की बैठक में बेड की संख्या बढ़ाकर 260 कर दी गई है। अब नए सिरे से जमीन की तलाश की जा रही है। बैठक में कहा गया कि दिल्ली-एनसीआर में तेजी से शहरीकरण हो रहा है। इससे यहां बाहर से रोजगार के सिलसिले में काफी संख्या में युवतियां रोजगार व पढ़ाई के लिए पहुंच रही हैं। इनको रहने में दिक्कत न हो इसलिए सुरक्षित वातावरण प्रदान के करने के लिए वर्किंग वूमेन हास्टल बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। सीएंडडीएस के अधिशासी अभियंता सादिक का कहना है कि प्रारंभिक आकलन के बाद डीपीआर तैयार की जाएगी। चार मंजिल के छात्रावास के निर्माण में करीब 18 करोड़ की लागत आने की उम्मीद है।
ये होंगी सुविधाएं
दो बेड का एक कमरा
हर तल पर सीसीटीवी
आधुनिक किचेन
हर तल पर दो-दो वाटर कूलर
फर्नीचर, पंखा, लाइब्रेरी
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नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि मेरठ तिराहे के निकट मरियम नगर में जमीन चिन्हित कर ली गई है। कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस निर्माण के लिए एस्टिमेट तैयार कर रही है। उम्मीद है कि दिवाली के बाद काम शुरू हो जाएगा।
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27 साल पहले बना हॉस्टल बन गया कूड़ाघर
वर्किंग वूमेन के लिए करीब 25 साल पहले नेहरू नगर में नरेंद्र मोहन पॉली क्लीनिक के पास जीडीए की ओर से हॉस्टल बनाया गया था। कुछ सालों तक यह हास्टल चला भी लेकिन पिछले कई सालों से यह डंपिंग ग्रांउड बन रहा है। लोग यहां कूड़ा फेंक रहे हैं। महापौर सुनीता दयाल का कहना है कि नया बनाने की बजाय इस छात्रावास को ही जीडीए ठीक कराए तो पैसे भी बचेंगे। नेहरूनगर में स्थित यह हास्टल रेलवे और बस स्टेशन से नजदीक है। शहर के बीचोंबीच है। काफी जगह है।
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राज्य स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत राजनगर एक्सटेंशन में 200 बेड का छात्रावास बनाने का प्रस्ताव पास किया गया था। इसके लिए जमीन भी चिन्हित की गई। पिछले हफ्ते प्रमुख सचिव की बैठक में बेड की संख्या बढ़ाकर 260 कर दी गई है। अब नए सिरे से जमीन की तलाश की जा रही है। बैठक में कहा गया कि दिल्ली-एनसीआर में तेजी से शहरीकरण हो रहा है। इससे यहां बाहर से रोजगार के सिलसिले में काफी संख्या में युवतियां रोजगार व पढ़ाई के लिए पहुंच रही हैं। इनको रहने में दिक्कत न हो इसलिए सुरक्षित वातावरण प्रदान के करने के लिए वर्किंग वूमेन हास्टल बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। सीएंडडीएस के अधिशासी अभियंता सादिक का कहना है कि प्रारंभिक आकलन के बाद डीपीआर तैयार की जाएगी। चार मंजिल के छात्रावास के निर्माण में करीब 18 करोड़ की लागत आने की उम्मीद है।
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ये होंगी सुविधाएं
दो बेड का एक कमरा
हर तल पर सीसीटीवी
आधुनिक किचेन
हर तल पर दो-दो वाटर कूलर
फर्नीचर, पंखा, लाइब्रेरी
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि मेरठ तिराहे के निकट मरियम नगर में जमीन चिन्हित कर ली गई है। कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस निर्माण के लिए एस्टिमेट तैयार कर रही है। उम्मीद है कि दिवाली के बाद काम शुरू हो जाएगा।
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27 साल पहले बना हॉस्टल बन गया कूड़ाघर
वर्किंग वूमेन के लिए करीब 25 साल पहले नेहरू नगर में नरेंद्र मोहन पॉली क्लीनिक के पास जीडीए की ओर से हॉस्टल बनाया गया था। कुछ सालों तक यह हास्टल चला भी लेकिन पिछले कई सालों से यह डंपिंग ग्रांउड बन रहा है। लोग यहां कूड़ा फेंक रहे हैं। महापौर सुनीता दयाल का कहना है कि नया बनाने की बजाय इस छात्रावास को ही जीडीए ठीक कराए तो पैसे भी बचेंगे। नेहरूनगर में स्थित यह हास्टल रेलवे और बस स्टेशन से नजदीक है। शहर के बीचोंबीच है। काफी जगह है।