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Ghaziabad News: सरकारी योजनाओं के लिए शुरू हुई हेल्पलाइन, पहुंच रहे पति-पत्नी के झगड़े
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-अजीबोगरीब शिकायतों से दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के अधिकारी हैरान
रश्मि ओझा
गाजियाबाद। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए शुरू की गई जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की हेल्पलाइन पर योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी मांगने के साथ घर के विवाद भी पहुंचने लगे हैं। कोई अपनी पत्नी के दिनभर सोने को दिव्यांगता से जोड़कर सवाल पूछ रहा है तो कोई पत्नी के दूसरे व्यक्ति के साथ चले जाने पर उसकी पेंशन बंद कराने की गुहार लगा रहा है। ऐसी शिकायतें मिलने से अधिकारी भी हैरान हैं। विभाग अब लोगों से अपील कर रहा है कि निजी और पारिवारिक विवादों के लिए हेल्पलाइन का इस्तेमाल न करें।
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केस एक : मेरी पत्नी दिनभर सोती है, कहीं कोई दिव्यांगता तो नहीं
हाल ही में लोनी क्षेत्र से एक व्यक्ति ने हेल्पलाइन पर फोन किया। उसने पूछा कि उसकी पत्नी दिनभर सोती रहती है और घर का कोई काम नहीं करती। पत्नी से उसे कोई दूसरी शिकायत नहीं है। वह काफी सुंदर है और वह उससे प्यार भी बहुत करता है, लेकिन उसके लगातार सोने की वजह से उसे आशंका है कि कहीं उसमें कोई दिव्यांगता तो नहीं है।
केस दो : पत्नी की पेंशन बंद करो, दूसरे के साथ चली गई है
दूसरा हैरान करने वाला मामला पड़ोसी जनपद शामली से आया। एक व्यक्ति ने हेल्पलाइन पर पत्नी का ब्योरा देते हुए उसकी पेंशन बंद करने की मांग की। उसका कहना था कि महिला किसी अन्य पुरुष के साथ चली गई है।
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अधिकारियों ने उसे बताया कि इस आधार पर किसी की पेंशन बंद नहीं की जा सकती। मामले की जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि दोनों के बीच विवाद हुआ था और गुस्से में पत्नी को सबक सिखाने के लिए उसने हेल्पलाइन पर पेंशन बंद कराने की शिकायत कर दी।
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एक दिन में 150 से 200 समस्याओं का समाधान
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से संचालित हेल्पलाइन पर प्रदेश व देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग मदद और योजनाओं की जानकारी लेने के लिए कॉल करते हैं। रोजाना 150 से 200 समस्याओं का समाधान किया जाता है। यहां राष्ट्रीय योजनाओं, रेलवे से जुड़ी सुविधाओं, दिव्यांगता प्रमाणपत्र, एनएचएआई के टोल टैक्स, आयकर में छूट, सरकारी नौकरी में आरक्षण, सरकारी कॉलेजों में आरक्षण समेत अन्य सुविधाओं की जानकारी ली जा सकती है।
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छह वर्ष पहले शुरू हुई थी सेवा
जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी अंशुल चौहान ने लोगों से अपील की कि हेल्पलाइन नंबर पर इस तरह की कॉल न करें। ऐसी कॉल से वास्तविक जरूरतमंदों की मदद में बाधा आती है। दिव्यांगजनों को कार्यालय आने-जाने की जरूरत न पड़े और वे घर बैठे योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकें, इसके लिए करीब छह वर्ष पहले हेल्पलाइन शुरू की गई थी।
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रश्मि ओझा
गाजियाबाद। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए शुरू की गई जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की हेल्पलाइन पर योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी मांगने के साथ घर के विवाद भी पहुंचने लगे हैं। कोई अपनी पत्नी के दिनभर सोने को दिव्यांगता से जोड़कर सवाल पूछ रहा है तो कोई पत्नी के दूसरे व्यक्ति के साथ चले जाने पर उसकी पेंशन बंद कराने की गुहार लगा रहा है। ऐसी शिकायतें मिलने से अधिकारी भी हैरान हैं। विभाग अब लोगों से अपील कर रहा है कि निजी और पारिवारिक विवादों के लिए हेल्पलाइन का इस्तेमाल न करें।
केस एक : मेरी पत्नी दिनभर सोती है, कहीं कोई दिव्यांगता तो नहीं
हाल ही में लोनी क्षेत्र से एक व्यक्ति ने हेल्पलाइन पर फोन किया। उसने पूछा कि उसकी पत्नी दिनभर सोती रहती है और घर का कोई काम नहीं करती। पत्नी से उसे कोई दूसरी शिकायत नहीं है। वह काफी सुंदर है और वह उससे प्यार भी बहुत करता है, लेकिन उसके लगातार सोने की वजह से उसे आशंका है कि कहीं उसमें कोई दिव्यांगता तो नहीं है।
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केस दो : पत्नी की पेंशन बंद करो, दूसरे के साथ चली गई है
दूसरा हैरान करने वाला मामला पड़ोसी जनपद शामली से आया। एक व्यक्ति ने हेल्पलाइन पर पत्नी का ब्योरा देते हुए उसकी पेंशन बंद करने की मांग की। उसका कहना था कि महिला किसी अन्य पुरुष के साथ चली गई है।
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अधिकारियों ने उसे बताया कि इस आधार पर किसी की पेंशन बंद नहीं की जा सकती। मामले की जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि दोनों के बीच विवाद हुआ था और गुस्से में पत्नी को सबक सिखाने के लिए उसने हेल्पलाइन पर पेंशन बंद कराने की शिकायत कर दी।
एक दिन में 150 से 200 समस्याओं का समाधान
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से संचालित हेल्पलाइन पर प्रदेश व देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग मदद और योजनाओं की जानकारी लेने के लिए कॉल करते हैं। रोजाना 150 से 200 समस्याओं का समाधान किया जाता है। यहां राष्ट्रीय योजनाओं, रेलवे से जुड़ी सुविधाओं, दिव्यांगता प्रमाणपत्र, एनएचएआई के टोल टैक्स, आयकर में छूट, सरकारी नौकरी में आरक्षण, सरकारी कॉलेजों में आरक्षण समेत अन्य सुविधाओं की जानकारी ली जा सकती है।
छह वर्ष पहले शुरू हुई थी सेवा
जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी अंशुल चौहान ने लोगों से अपील की कि हेल्पलाइन नंबर पर इस तरह की कॉल न करें। ऐसी कॉल से वास्तविक जरूरतमंदों की मदद में बाधा आती है। दिव्यांगजनों को कार्यालय आने-जाने की जरूरत न पड़े और वे घर बैठे योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकें, इसके लिए करीब छह वर्ष पहले हेल्पलाइन शुरू की गई थी।