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Ghaziabad News: निठारी के मोनिंदर की डी-5 कोठी रिलीज कराने की अर्जी पर सुनवाई टली
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गाजियाबाद। निठारी कांड के बाद करीब दो दशक से सील नोएडा के सेक्टर-31 स्थित डी-5 बंगले को रिलीज कराने की कोशिश पर शनिवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई टल गई। विशेष न्यायाधीश अवनीश कुमार पांडेय ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 26 सितंबर की तारीख तय की है। कोठी रिलीज कराने के लिए उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उनकी पत्नी देवेंद्र कौर ने संयुक्त रूप से अदालत में अर्जी दाखिल की है।
निठारी गांव स्थित डी-5 बंगला वर्ष 2006 में सामने आए निठारी कांड की जांच का प्रमुख केंद्र रहा था। दिसंबर 2006 में बंगले के पीछे स्थित नाले और परिसर से कई कंकाल, हड्डियां और बच्चों के कपड़े बरामद होने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। इसके बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और पुलिस ने साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए बंगले को सील कर दिया था। जांच के दौरान बंगले के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उनके घरेलू सहायक सुरिंदर कोली पर कई बच्चों और महिलाओं की हत्या के मामले सामने आए थे।
सीबीआई अदालत ने कोली को विभिन्न मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्तूबर 2023 में कई मामलों में साक्ष्यों के अभाव में पंढेर और कोली को बरी कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट से भी दोनों को राहत मिली। लगातार कानूनी प्रक्रिया के चलते डी-5 बंगला करीब दो दशक से बंद पड़ा है। लंबे समय तक रखरखाव नहीं होने से परिसर और दोनों मंजिलों पर घनी झाड़ियां उग आई हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह स्थान आज भी निठारी कांड की वजह से चर्चा में रहता है। बंगले को वर्ष 2006 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने सील किया था। हालांकि अब बंगले की हालत बेहद खराब है। मुख्य द्वार भी पिछले वर्ष किसी समय चोरी हो गया। दोनों मंजिलों पर घनी झाड़ियों के कारण लंबे समय तक इसका पता नहीं चल सका। भूतल का एक अंदरूनी दरवाजा भी कई वर्षों से गायब है। बंगले के अंदर की कई वस्तुएं भी नहीं हैं।
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निठारी गांव स्थित डी-5 बंगला वर्ष 2006 में सामने आए निठारी कांड की जांच का प्रमुख केंद्र रहा था। दिसंबर 2006 में बंगले के पीछे स्थित नाले और परिसर से कई कंकाल, हड्डियां और बच्चों के कपड़े बरामद होने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। इसके बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और पुलिस ने साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए बंगले को सील कर दिया था। जांच के दौरान बंगले के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उनके घरेलू सहायक सुरिंदर कोली पर कई बच्चों और महिलाओं की हत्या के मामले सामने आए थे।
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सीबीआई अदालत ने कोली को विभिन्न मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्तूबर 2023 में कई मामलों में साक्ष्यों के अभाव में पंढेर और कोली को बरी कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट से भी दोनों को राहत मिली। लगातार कानूनी प्रक्रिया के चलते डी-5 बंगला करीब दो दशक से बंद पड़ा है। लंबे समय तक रखरखाव नहीं होने से परिसर और दोनों मंजिलों पर घनी झाड़ियां उग आई हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह स्थान आज भी निठारी कांड की वजह से चर्चा में रहता है। बंगले को वर्ष 2006 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने सील किया था। हालांकि अब बंगले की हालत बेहद खराब है। मुख्य द्वार भी पिछले वर्ष किसी समय चोरी हो गया। दोनों मंजिलों पर घनी झाड़ियों के कारण लंबे समय तक इसका पता नहीं चल सका। भूतल का एक अंदरूनी दरवाजा भी कई वर्षों से गायब है। बंगले के अंदर की कई वस्तुएं भी नहीं हैं।
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