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Ghaziabad News: बड़े पर्दे पर जीवंत होगी हरीश की 13 वर्षों की मौन पीड़ा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2026 12:48 AM IST
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Harish's 13 years of silent suffering will come alive on the big screen.
गाजियाबाद। राजनगर स्थित राज एम्पायर सोसायटी निवासी हरीश राणा की 13 वर्षों की मौन पीड़ा को बड़े पर्दे तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। मुंबई के एक लेखक-निर्माता ने कोमा में जीवन और मृत्यु के बीच झूलते रहे हरीश के संघर्ष पर बायोपिक बनाने की इच्छा जताई है। इस विषय को फिल्म के रूप में प्रस्तुत करने के लिए उनके अधिवक्ता मनीष जैन से संपर्क किया है। हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिवक्ता ने निर्माता से कुछ समय इंतजार करने के लिए कहा है।
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अधिवक्ता ने बताया कि यह कहानी केवल एक बीमारी या कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि एक पिता के साहस, परिवार के धैर्य और न्यायपालिका की संवेदनशीलता की मिसाल है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हरीश को दिल्ली स्थित एम्स के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती कराया गया है, जहां वह असहनीय पीड़ा से धीरे-धीरे मुक्ति की ओर बढ़ रहे हैं।
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हरीश के पिता अशोक राणा की ओर से लिया गया अंगदान का निर्णय समाज के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है। 13 वर्षों तक बेटे को इस स्थिति में देखना परिवार के लिए बेहद कठिन रहा, लेकिन उन्होंने मानवता को सर्वोपरि रखा।
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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अधिवक्ता मनीष जैन के अनुसार, 11 मार्च 2026 का दिन इस मामले में अहम साबित हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दी। इस फैसले ने न सिर्फ एक पिता की इच्छा का सम्मान किया, बल्कि जीवन की गरिमा को भी नई दृष्टि दी।

पटकथा पर काम शुरू

मनीष जैन के अनुसार, प्रस्तावित बायोपिक में हरीश की पूरी यात्रा को संवेदनशील तरीके से दिखाया जाएगा। एक पिता की वर्षों की तपस्या, वकील की निस्वार्थ लड़ाई और न्यायपालिका की करुणा को प्रमुखता दी जाएगी। फिल्म समाज के सामने यह सवाल भी रखेगी कि क्या जीवन केवल सांसों का नाम है या सम्मानजनक विदाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।


कई शहरों की दिखेगी झलक

हरीश का संबंध हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के एक गांव से रहा है, जहां से उनकी जीवन यात्रा शुरू हुई। बेहतर भविष्य की तलाश में परिवार दिल्ली आया, लेकिन एक हादसे ने सब बदल दिया। बायोपिक में हिमाचल, दिल्ली, चंडीगढ़ और गाजियाबाद की इस पूरी यात्रा को भी दर्शाया जाएगा। अधिवक्ता मनीष जैन का कहना है कि हरीश की कहानी अब देशभर में संवेदना और विचार का विषय बन चुकी है। यह बायोपिक कानून, करुणा और मानवता के संगम को सामने लाएगी।
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