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तीन महीने बाद खुले स्कूल, मास्क लगाकर पहुंचे 35 फीसदी बच्चे
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स्कूल में छात्राओं का स्वागत करते शिक्षक।
- फोटो : PILAKHWA
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तीन महीने बाद खुलेेेेेे स्कूल, मास्क लगाकर पहुंचे 35 फीसदी बच्चे
हापुड़। कोरोना की दूसरी लहर की वजह से बंद हुए स्कूल तीन महीने बाद 9 वीं से 12 वीं तक की कक्षाओं के लिए सोमवार से खुल गए। बच्चों के स्वागत में स्कूल रंगोली और ग़ुब्बारों से सजाए गए थे। मास्क पहनकर आए बच्चों को थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही स्कूल में प्रवेश मिला। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ दो पालियों में कक्षाएं चलीं। शासन द्वारा नामित अधिकारियों ने निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को परखा।
कोरोना की दूसरी लहर अप्रैल में शुरू हुई थी। तभी समस्त स्कूल, कॉलेजों को बंद कर दिया गया था। अब संक्रमण कम होने के बाद सोमवार से 9वीं से 12 वीं तक की कक्षाओं के लिए स्कूल खुले हैं। सुबह 8 से 12 बजे तक बजे से पहली पाली की कक्षाएं शुरू हुईं। काफी दिनों बाद स्कूल आने पर छात्र-छात्राओं की खुशी का ठिकाना नहीं था। हालांकि मास्क और कक्षा के दो पालियों में बांटे जाने जैसी बंदिशों पर उनके बीच चर्चा रही। डायट प्राचार्य दिनेश सिंह ने बुलंदशहर रोड स्थित श्रीजैन कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज का निरीक्षण कर, व्यवस्थाओं को परखा। अभिभावकों ने छात्रों को स्कूल भेजने की अनुमति दी है। फिर भी सोमवार को पहले दिन छात्रों की संख्या काफी कम ही रही। पहली पाली में महज 35 प्रतिशत छात्र की उपस्थित हो सके, जबकि दूसरी पाली में इनकी संख्या इससे भी कम रही।
स्कूलों में खुली कोरोना हेल्प डेस्क
स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा की दृष्टि से कोरोना हेल्प डेस्क की भी व्यवस्था कराई गई। इसमें छात्र-छात्राओं को संक्रमण से बचाव की जानकारी दी गई। जिन छात्रों के पास मास्क नहीं थे, उन्हें मास्क दिए गए।
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कक्षा के अंदर रही दो गज की दूरी
स्कूलों में कक्षाओं के अंदर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर ही सिटिंग प्लान तैयार किया गया था। एक बैंच पर सिर्फ एक ही छात्र बैठाया गया। दो विद्यार्थियों के बीच दो गज की दूरी रखी गई।
पहले दिन समझाया पाठ्यक्रम
स्कूलों में पहले दिन छात्रों को पाठ्यक्रम के बारे में जानकारी दी गई। कक्षाओं में लगे बोर्ड पर कोर्स के चैप्टर छात्रों को समझाए गए। साथ ही बेसिक जानकारी भी छात्रों को दी गई।
स्कूल में पढ़ाई कर हो रही खुशी
ऑनलाइन पढ़ाई में सब कुछ ठीक से समझ नहीं आ पाता है। अब शिक्षकों से पाठ्यक्रम से जुड़ी समस्याओं को आसानी से पूछा जा सकता है।--महजबी, छात्रा।
अब नहीं कोई डर
स्कूल खुलने पर काफी खुशी है। स्कूल के अंदर कोरोना संक्रमण से बचाव के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। पहले डर लग रहा था जो अब वह दूर हो गया है।--सुम्मुल, छात्रा।
शिक्षकों ने हल कराए कठिन प्रश्न
बीते कई महीने से स्कूल बंद थे, ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई ठीक से नहीं हो पा रही थी। शिक्षकों से क्लास में कठिन प्रश्नों का हल पूछा। कक्षाएं चलने से ही अच्छी पढ़ाई होती है।--मनीषा चौधरी, छात्रा।
स्कूल खुले तो मिली राहत
ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान अक्सर खराब नेटवर्किंग की समस्या आड़े आ जाती थी। अब तीन महीने बाद स्कूल खुलने से काफी राहत मिली है।--प्रियंका, छात्रा।
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अभिभावक बोले:
माहौल देख बच्चों को भेजेंगे स्कूल
कोरोना का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। ऐसे में अपने बच्चों को स्कूल माहौल देखकर ही भेजेंगे। यदि सब कुछ ठीक रहा तो बच्चों को स्कूल भेजेंगे, अन्यथा घर पर ही पढ़ाई कराएंगे। -सुशील शर्मा, अभिभावक।
बच्चों के लिए भी आए टीका तो बने बात
कोरोना का खतरा अभी बरकरार है, 18 साल से कम उम्र वालों के लिए अभी टीकाकरण शुरू भी नहीं हो सका है। ऐसे में अभी बच्चों को स्कूल भेजने में डर बना हुआ है।--नरेंद्र त्यागी, अभिभावक।
कोरोना गाइडलाइन का पालन जरूरी
स्कूलों में कोरोना गाइडलाइन का पालन होना अति आवश्यक है। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सोमवार को स्कूलों में व्यवस्थाएं अच्छी रहीं, छात्र-छात्राएं कक्षाओं में पहुंचकर पढ़ाई करें।--निशा अस्थाना, डीआईओएस।
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हापुड़। कोरोना की दूसरी लहर की वजह से बंद हुए स्कूल तीन महीने बाद 9 वीं से 12 वीं तक की कक्षाओं के लिए सोमवार से खुल गए। बच्चों के स्वागत में स्कूल रंगोली और ग़ुब्बारों से सजाए गए थे। मास्क पहनकर आए बच्चों को थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही स्कूल में प्रवेश मिला। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ दो पालियों में कक्षाएं चलीं। शासन द्वारा नामित अधिकारियों ने निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को परखा।
कोरोना की दूसरी लहर अप्रैल में शुरू हुई थी। तभी समस्त स्कूल, कॉलेजों को बंद कर दिया गया था। अब संक्रमण कम होने के बाद सोमवार से 9वीं से 12 वीं तक की कक्षाओं के लिए स्कूल खुले हैं। सुबह 8 से 12 बजे तक बजे से पहली पाली की कक्षाएं शुरू हुईं। काफी दिनों बाद स्कूल आने पर छात्र-छात्राओं की खुशी का ठिकाना नहीं था। हालांकि मास्क और कक्षा के दो पालियों में बांटे जाने जैसी बंदिशों पर उनके बीच चर्चा रही। डायट प्राचार्य दिनेश सिंह ने बुलंदशहर रोड स्थित श्रीजैन कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज का निरीक्षण कर, व्यवस्थाओं को परखा। अभिभावकों ने छात्रों को स्कूल भेजने की अनुमति दी है। फिर भी सोमवार को पहले दिन छात्रों की संख्या काफी कम ही रही। पहली पाली में महज 35 प्रतिशत छात्र की उपस्थित हो सके, जबकि दूसरी पाली में इनकी संख्या इससे भी कम रही।
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स्कूलों में खुली कोरोना हेल्प डेस्क
स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा की दृष्टि से कोरोना हेल्प डेस्क की भी व्यवस्था कराई गई। इसमें छात्र-छात्राओं को संक्रमण से बचाव की जानकारी दी गई। जिन छात्रों के पास मास्क नहीं थे, उन्हें मास्क दिए गए।
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कक्षा के अंदर रही दो गज की दूरी
स्कूलों में कक्षाओं के अंदर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर ही सिटिंग प्लान तैयार किया गया था। एक बैंच पर सिर्फ एक ही छात्र बैठाया गया। दो विद्यार्थियों के बीच दो गज की दूरी रखी गई।
पहले दिन समझाया पाठ्यक्रम
स्कूलों में पहले दिन छात्रों को पाठ्यक्रम के बारे में जानकारी दी गई। कक्षाओं में लगे बोर्ड पर कोर्स के चैप्टर छात्रों को समझाए गए। साथ ही बेसिक जानकारी भी छात्रों को दी गई।
स्कूल में पढ़ाई कर हो रही खुशी
ऑनलाइन पढ़ाई में सब कुछ ठीक से समझ नहीं आ पाता है। अब शिक्षकों से पाठ्यक्रम से जुड़ी समस्याओं को आसानी से पूछा जा सकता है।--महजबी, छात्रा।
अब नहीं कोई डर
स्कूल खुलने पर काफी खुशी है। स्कूल के अंदर कोरोना संक्रमण से बचाव के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। पहले डर लग रहा था जो अब वह दूर हो गया है।--सुम्मुल, छात्रा।
शिक्षकों ने हल कराए कठिन प्रश्न
बीते कई महीने से स्कूल बंद थे, ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई ठीक से नहीं हो पा रही थी। शिक्षकों से क्लास में कठिन प्रश्नों का हल पूछा। कक्षाएं चलने से ही अच्छी पढ़ाई होती है।--मनीषा चौधरी, छात्रा।
स्कूल खुले तो मिली राहत
ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान अक्सर खराब नेटवर्किंग की समस्या आड़े आ जाती थी। अब तीन महीने बाद स्कूल खुलने से काफी राहत मिली है।--प्रियंका, छात्रा।
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अभिभावक बोले:
माहौल देख बच्चों को भेजेंगे स्कूल
कोरोना का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। ऐसे में अपने बच्चों को स्कूल माहौल देखकर ही भेजेंगे। यदि सब कुछ ठीक रहा तो बच्चों को स्कूल भेजेंगे, अन्यथा घर पर ही पढ़ाई कराएंगे। -सुशील शर्मा, अभिभावक।
बच्चों के लिए भी आए टीका तो बने बात
कोरोना का खतरा अभी बरकरार है, 18 साल से कम उम्र वालों के लिए अभी टीकाकरण शुरू भी नहीं हो सका है। ऐसे में अभी बच्चों को स्कूल भेजने में डर बना हुआ है।--नरेंद्र त्यागी, अभिभावक।
कोरोना गाइडलाइन का पालन जरूरी
स्कूलों में कोरोना गाइडलाइन का पालन होना अति आवश्यक है। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सोमवार को स्कूलों में व्यवस्थाएं अच्छी रहीं, छात्र-छात्राएं कक्षाओं में पहुंचकर पढ़ाई करें।--निशा अस्थाना, डीआईओएस।