फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   Hand pumps with a release, the Corporation has not examined the water

हैंडपंप लगाकर छोड़े, निगम ने नहीं कराई पानी की जांच

Wed, 13 Jul 2016 11:48 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद Updated Wed, 13 Jul 2016 11:48 PM IST
विज्ञापन
Hand pumps with a release, the Corporation has not examined the water
सूख्‍ाे हैंडपंप - फोटो : अमर उजाला
हिंडन नदी के प्रदूषण का असर उससे सटे 13 गांवों के भूजल पर पड़ा तो जाहिर सी बात है कि गाजियाबाद सिटी एरिया में भी इसका प्रभाव पड़ा होगा। शहर में फैक्ट्रियों और सात बड़े नालों का पानी भी हिंडन में मिल जाता है।
विज्ञापन


ऐसे में इससे सटी कालोनी वसुंधरा, इंदिरापुरम, वैशाली, हिंडन विहार, राजनगर एक्सटेंशन, नंदग्राम में भी इसके प्रदूषण का असर हो सकता है। बावजूद इसके शहरी क्षेत्र में नगर निगम समेत किसी भी एजेंसी ने हैंडपंप के पानी की सैंपलिंग नहीं कराई।
विज्ञापन


दशकों से यहां पानी की जांच नहीं होने से अधिकारियों को भी नहीं पता कि भूजल में प्रदूषण बढ़ा है या नहीं। शहर के लोग भी नगर निगम के विश्वास पर हैंडपंप का पानी पी रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

शासनादेश के मुताबिक हैंडपंप या नलकूप लगाने से पहले संबंधित जगह पर पानी की गुणवत्ता की जांच होती है।

हैंडपंप की साल में एक बार पानी की जांच जरूर होनी चाहिए। जल निगम अपने ग्रामीण क्षेत्र में समय-समय पर पानी की जांच कराता है। ताकि ग्राउंड वाटर पोल्यूशन पर निगरानी की जा सके, लेकिन नगर निगम क्षेत्र में लगे साढ़े 7 हजार हैंडपंप के पानी की कभी जांच नहीं की गई।

पानी में कौन से तत्व बढ़ गए हैं, इसकी रिपोर्ट भी निगम के पास नहीं है। शहर के 18 लाख लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है।

ट्यूबवेलों से ज्यादा हैंडपंप का पानी खराब
ट्यूबवेलों के लिए तकरीबन 350 फीट पर डीप बोरिंग किए जाते हैं जबकि हैंडपंप 150 से 160 फीट की गहराई पर लगाए जा रहे हैं। उद्योगों से हो रहे प्रदूषण की वजह से 150 फीट तक ग्राउंड वाटर जहरीला हो चुका है। ऐसे में फिलहाल ट्यूबवेलों का पानी सुरक्षित है, लेकिन हैंडपंप से निकल रहा पानी पीने लायक नहीं रहा।


शहर में कुल हैंडपंप                                             7560
खराब हैंडपंप                                                     550
हर साल लगने वाले हैंडपंप की औसत संख्या     400
हर साल रिबोर होने वाले हैंडपंप                         300 से 400



रूटीन में हैंडपंप लगाने के वक्त या बाद में उनके पानी की जांच नहीं कराई जाती। शिकायत मिलने पर पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाती है। - आरके यादव, अधिशासी अभियंता, जलकल विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed