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शासन बताए, बिना टीचर कौन पढ़ाए...
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 14 Feb 2017 10:16 PM IST
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शिक्षा
- फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद। प्रदेश में उच्च शिक्षा के गिरते स्तर पर शासन आंखें मूंदे बैठा है। डिग्री कॉलेजों में खाली पड़े शिक्षकों के पदों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। इसका सीधा असर शैक्षिक गुणवत्ता पर पड़ रहा है। डिग्री कॉलेजों में 2008 से अब तक शिक्षकों की कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है।
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केवल गाजियाबाद की बात करें तो सात एडेड डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों के 35 से 50 फीसदी पद खाली पड़े हुए हैं। महानगर के सबसे बड़े एमएमएच डिग्री कॉलेज में शिक्षकों के कुल 160 में से 42 पद रिक्त हैं। वहीं, गर्ल्स के वीएमएलजी पीजी कॉलेज में हालत और भी खराब है। यहां टीचर्स के 47 में से 23 पद खाली हैं।
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अर्से से नियुक्तियों पर ब्रेक लगे होने से वर्तमान में एक शिक्षक पर तीन क्लास का लोड है। सीसीएसयू से संबद्ध 50 एडेड कॉलेजों में शिक्षकों के करीब 3000 पद खाली पड़े हैं। शिक्षण कार्य के अलावा शिक्षकों के ऊपर दाखिला प्रक्रिया, परीक्षा सहित अन्य प्रशासनिक कार्यों का बोझ पहले से ही है।
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काम के बोझ के तले दबे बाकी शिक्षक जैसे-तैसे अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में शिक्षण कार्य प्रभावित होने से सबसे ज्यादा नुकसान स्टूडेंट्स को ही उठाना पड़ रहा है। शासन खाली पड़े पदों को भरने की कवायद शुरू करे, तभी शैक्षिक स्तर में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
शिक्षकों की जल्द नियुक्ति होने से होगा सुधार
कॉलेज में 2009 के बाद से अब तक कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है। शिक्षकों के 42 पद रिक्त होने से अध्ययन और अध्यापन दोनों कार्य प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षकों पर शैक्षणिक, एग्जाम व अन्य प्रशासनिक कार्यों का भी जिम्मा है। शिक्षकों की कमी का सबसे ज्यादा नुकसान स्टूडेंट्स को भी उठाना पड़ रहा है। शैक्षिक स्तर में सुधार के लिए खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाना चाहिए। - डा. भीष्म कपूर, प्राचार्य, एमएमएच डिग्री कॉलेज
शिक्षकों की कमी, शिक्षण कार्य होता है प्रभावित
2010 में कॉलेज में शिक्षक की आखिरी नियुक्ति हुई थी। अब 47 में से 23 पद खाली पड़े हैं। हिंदी, अंग्रेजी सहित विभिन्न विषयों में स्थिति खराब है। इतिहास विषय में कोई शिक्षिका नहीं है। शिक्षकों की कमी से क्लासेज प्रभावित होती हैं। शिक्षण कार्य ज्यादा प्रभावित नहीं हो इसके लिए प्रबंधन की ओर से ट्यूटर की व्यवस्था की गई है लेकिन टीचिंग के साथ एग्जाम, प्रशासनिक कार्यों की अधिकता से टीचर्स पर काफी बोझ है। ऐसे में रिक्त पदों को जल्द भरे जाने की कार्रवाई की जानी चाहिए। - डा. कुसुम त्यागी, प्राचार्या, वीएमएलजी पीजी कॉलेज
शिक्षकों पर वर्क लोड ज्यादा, कैसे दें सब पर ध्यान
1. शिक्षकों की कमी के चलते एक टीचर को अपने अलावा अन्य सब्जेक्ट को पढ़ाना पड़ता है। कंबाइंड क्लासेज में कई सेक्शन के स्टूडेंट्स होने से सब पर ध्यान देना संभव नहीं।
- विकास सिंह, एलएलबी स्टूडेंट
2. शिक्षकों की कमी और अन्य प्रशासनिक कार्यों के चलते कॉलेजों में एक्स्ट्रा-करिकुलम गतिविधियां कम होती जा रही हैं। शैक्षिक स्तर पर सुधार के लिए शिक्षकों की नियुक्ति जल्द होनी चाहिए। - टेकचंद्र पाल, एमए पॉलिटिकल साइंस