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कैश बैक के नाम पर हर महीने हो रही 41 लोगों से ठगी
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कैश बैक के नाम पर हर महीने हो रही 41 लोगों से ठगी
गाजियाबाद। यदि आप कोई खरीदारी या फिर पेमेंट ई-वॉलेट के माध्यम से करते हैं और खरीदारी करने के बाद आप के पास कैश बैक का नोटिफिकेशन या मेसेज आता है तो सावधान हो जाएं। ऐसे मेसेज साइबर जालसाजों द्वारा भेजे जा रहे हैं। झांसे में आए तो आप के खाते से रकम उड़नी तय है। इस साल पुलिस के पास कैश बैक के नाम पर ठगी के 370 मामले आए हैं। हर महीने औसतन 41 लोगों से यह तरीका अपनाकर जालसाजी की जा रही है।
27 सितंबर तक जिले में साइबर ठगी के 4536 मामले सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा ठगी बैंक व क्रेडिट कार्ड के जरिये हुई है। अधिकांश लोग डिजिटल पेमेंट के लिए ई-वॉलेट का इस्तेमाल करते हैं। पेट्रोल पंप, मॉल, रेस्तरां या कहीं भी ई-वालेट से शॉपिंग करने पर कैश बैक और रिवार्ड मिलता है। साइबर ठग इसी का झांसा देकर लोगों के खातों से रकम निकाल ले रहे हैं।
नोटिफिकेशन भेजकर ठगी
साइबर अपराधी खुद को पेमेंट एप कंपनी का प्रतिनिधि बताकर कॉल करते हैं। वह पूर्व में की गईं ट्रांजैक्शन से संबंधित कैश बैक मिलने की बात कहकर नोटिफिकेशन भेजते हैं। कैश बैक लेने के लिए नोटिफिकेशन क्लिक करने को कहा जाता है। इसके बाद स्क्रेच कार्ड को स्क्रेच करने के लिए कहा जाता है। स्क्रेच कार्ड में दिखने वाले पे (भुगतान) के विकल्प दबाने के लिए कहा जाता है। ऐसा करते ही खाते से रकम कट जाती है।
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एप डाउनलोड कराकर फर्जीवाड़ा
कैश रिवार्ड मिलने या कैश बैक मिलने का झांसा देकर रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड कराई जाती है। मोबाइल का एक्सेस हाथ में लेने के लिए पासवर्ड पूछा जाता है। इसके बाद रजिस्टर्ड नंबर बदलने की रिक्वेस्ट भेजी जाती है। बैंक द्वारा भेजा गया पिन पूछकर खाताधारक के नंबर की जगह अपना नंबर दर्ज कराया जाता है। इसके बाद खाते से रकम साफ कर दी जाती है।
ऐसी कोई स्कीम नहीं
मेरठ जोन पुलिस के साइबर एक्सपर्ट कर्मवीर सिंह का कहना है कि फोन-पे, गूगल-पे या पेटीएम के द्वारा ऐसी कोई स्कीम नहीं चलाई जा रही है। किसी के कहने पर न तो कोई एप डाउनलोड करें और न ही किसी नोटिफिकेशन पर क्लिक करें। कैश बैक या रिवार्ड ऑटोमेटिक जमा होता है। इसके लिए किसी तरह कोई प्रक्रिया अपनानी नहीं पड़ती।
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गाजियाबाद। यदि आप कोई खरीदारी या फिर पेमेंट ई-वॉलेट के माध्यम से करते हैं और खरीदारी करने के बाद आप के पास कैश बैक का नोटिफिकेशन या मेसेज आता है तो सावधान हो जाएं। ऐसे मेसेज साइबर जालसाजों द्वारा भेजे जा रहे हैं। झांसे में आए तो आप के खाते से रकम उड़नी तय है। इस साल पुलिस के पास कैश बैक के नाम पर ठगी के 370 मामले आए हैं। हर महीने औसतन 41 लोगों से यह तरीका अपनाकर जालसाजी की जा रही है।
27 सितंबर तक जिले में साइबर ठगी के 4536 मामले सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा ठगी बैंक व क्रेडिट कार्ड के जरिये हुई है। अधिकांश लोग डिजिटल पेमेंट के लिए ई-वॉलेट का इस्तेमाल करते हैं। पेट्रोल पंप, मॉल, रेस्तरां या कहीं भी ई-वालेट से शॉपिंग करने पर कैश बैक और रिवार्ड मिलता है। साइबर ठग इसी का झांसा देकर लोगों के खातों से रकम निकाल ले रहे हैं।
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नोटिफिकेशन भेजकर ठगी
साइबर अपराधी खुद को पेमेंट एप कंपनी का प्रतिनिधि बताकर कॉल करते हैं। वह पूर्व में की गईं ट्रांजैक्शन से संबंधित कैश बैक मिलने की बात कहकर नोटिफिकेशन भेजते हैं। कैश बैक लेने के लिए नोटिफिकेशन क्लिक करने को कहा जाता है। इसके बाद स्क्रेच कार्ड को स्क्रेच करने के लिए कहा जाता है। स्क्रेच कार्ड में दिखने वाले पे (भुगतान) के विकल्प दबाने के लिए कहा जाता है। ऐसा करते ही खाते से रकम कट जाती है।
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एप डाउनलोड कराकर फर्जीवाड़ा
कैश रिवार्ड मिलने या कैश बैक मिलने का झांसा देकर रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड कराई जाती है। मोबाइल का एक्सेस हाथ में लेने के लिए पासवर्ड पूछा जाता है। इसके बाद रजिस्टर्ड नंबर बदलने की रिक्वेस्ट भेजी जाती है। बैंक द्वारा भेजा गया पिन पूछकर खाताधारक के नंबर की जगह अपना नंबर दर्ज कराया जाता है। इसके बाद खाते से रकम साफ कर दी जाती है।
ऐसी कोई स्कीम नहीं
मेरठ जोन पुलिस के साइबर एक्सपर्ट कर्मवीर सिंह का कहना है कि फोन-पे, गूगल-पे या पेटीएम के द्वारा ऐसी कोई स्कीम नहीं चलाई जा रही है। किसी के कहने पर न तो कोई एप डाउनलोड करें और न ही किसी नोटिफिकेशन पर क्लिक करें। कैश बैक या रिवार्ड ऑटोमेटिक जमा होता है। इसके लिए किसी तरह कोई प्रक्रिया अपनानी नहीं पड़ती।