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हवा की सेहत ज्यादा खराब सुबह की सैर पर न जाएं
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हवा की सेहत ज्यादा खराब...सुबह की सैर पर न जाएं
साहिबाबाद। दिवाली पर बढ़े प्रदूषण से हवा की सेहत अभी भी ज्यादा बिगड़ी हुई है। 48 घंटे बाद भी वायुमंडल में पटाखों व पराली के धुएं का असर कम नहीं हुआ है। डॉक्टरों की सलाह है कि ऐसे में सुबह की सैर पर न जाएं। हवा में मौजूद धूल व धुएं के महीन कण नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह प्रदूषण अस्थमा, हृदय रोगी और गर्भवती महिलाओं के लिए जानलेवा हो सकता है। शनिवार को प्रदूषण स्तर में चार प्वाइंट की गिरावट आई, फिर 466 एक्यूआई के साथ गाजियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है। पीसीबी अधिकारियों का कहना है कि रविवार को हवा की गति तेज होकर 10 से 12 किमी प्रतिघंटे पहुंच जाएगी, इसके बाद प्रदूषण के स्तर में कमी आनी शुरू होगी।
प्रदूषण की मुख्य वजह पराली, पटाखे
पिछले साल दिवाली पर एक्यूआई 440 था। इस बार 26 अंक ज्यादा होने से स्थिति और खराब हुई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के अधिकारी उत्सव शर्मा का कहना है कि हवा में जहर बढ़ने का मुख्य कारण पंजाब की ओर जलाई जा रही पराली और पटाखों को माना जा रहा है। पिछले पांच दिनों में सबसे खतरनाक हालात दिवाली के अगले दिन बने। इस दिन एक्यूआई 470 मापा गया था। एक नवंबर को प्रदूषण की हालत रेड जोन में 363 पर दर्ज हुई थी। छोटी दिवाली पर पटाखे जलाने का असर यह हुआ कि एक्यूआई लेवल रेड जोन से बढ़कर सीधे सेवियर जोन में 419 पर रिकॉर्ड हुआ।
रहने लायक नहीं लोनी
पीसीबी के आंकड़े के अनुसार, दिवाली के बाद लोनी, इंदिरापुरम, वसुंधरा और संजय नगर में रहने लायक स्थिति नहीं है। इन सभी इलाकों में प्रदूषण खतरनाक स्थिति में दर्ज हुआ है। सबसे बदतर हालत लोनी की है। यहां एक्यूआई 471 रिकॉर्ड हुआ। जबकि इंदिरापुरम में 462, संजय नगर में 458 और वसुंधरा में 456 एक्यूआई दर्ज हुआ है।
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प्रदूषण से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा
डॉ. शरद जोशी ने बताया कि हवा में मौजूद बारिक कण ओजोन, सल्फर डायऑक्साइड, नाइट्रिक डायऑक्साइड, कार्बन मोनो डायऑक्साइड सांस की नली में सूजन, एलर्जी, और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही आंखों में ललामी और जलन होती है। लोगों को बार-बार छींक, सिरदर्द, सांस फूलना, खांसी छाती में भारीपन जैसे लक्षण सामने आते हैं। अधिक प्रदूषण दिल का दौरा और ब्रेेन स्ट्रोक का कारण भी बन सकता है।
पिछले पांच दिनों में एक्यूआई
05 नवंबर 470
04 नवंबर 419
03 नवंबर 353
02 नवंबर 334
01 नवंबर 363
दिनभर में ऐसे बदलता रही वायु गुणवत्ता
इलाके 6 बजे 8बजे 10बजे 12बजे 02बजे 04बजे 06बजे 08बजे
इंदिरापुरम 484 483 480 478 472 466 458 455
लोनी 496 496 496 496 481 475 468 467
संजय नगर 480 480 480 478 472 463 453 451
वसुंधरा 481 482 481 477 469 461 452 450
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साहिबाबाद। दिवाली पर बढ़े प्रदूषण से हवा की सेहत अभी भी ज्यादा बिगड़ी हुई है। 48 घंटे बाद भी वायुमंडल में पटाखों व पराली के धुएं का असर कम नहीं हुआ है। डॉक्टरों की सलाह है कि ऐसे में सुबह की सैर पर न जाएं। हवा में मौजूद धूल व धुएं के महीन कण नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह प्रदूषण अस्थमा, हृदय रोगी और गर्भवती महिलाओं के लिए जानलेवा हो सकता है। शनिवार को प्रदूषण स्तर में चार प्वाइंट की गिरावट आई, फिर 466 एक्यूआई के साथ गाजियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है। पीसीबी अधिकारियों का कहना है कि रविवार को हवा की गति तेज होकर 10 से 12 किमी प्रतिघंटे पहुंच जाएगी, इसके बाद प्रदूषण के स्तर में कमी आनी शुरू होगी।
प्रदूषण की मुख्य वजह पराली, पटाखे
पिछले साल दिवाली पर एक्यूआई 440 था। इस बार 26 अंक ज्यादा होने से स्थिति और खराब हुई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के अधिकारी उत्सव शर्मा का कहना है कि हवा में जहर बढ़ने का मुख्य कारण पंजाब की ओर जलाई जा रही पराली और पटाखों को माना जा रहा है। पिछले पांच दिनों में सबसे खतरनाक हालात दिवाली के अगले दिन बने। इस दिन एक्यूआई 470 मापा गया था। एक नवंबर को प्रदूषण की हालत रेड जोन में 363 पर दर्ज हुई थी। छोटी दिवाली पर पटाखे जलाने का असर यह हुआ कि एक्यूआई लेवल रेड जोन से बढ़कर सीधे सेवियर जोन में 419 पर रिकॉर्ड हुआ।
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रहने लायक नहीं लोनी
पीसीबी के आंकड़े के अनुसार, दिवाली के बाद लोनी, इंदिरापुरम, वसुंधरा और संजय नगर में रहने लायक स्थिति नहीं है। इन सभी इलाकों में प्रदूषण खतरनाक स्थिति में दर्ज हुआ है। सबसे बदतर हालत लोनी की है। यहां एक्यूआई 471 रिकॉर्ड हुआ। जबकि इंदिरापुरम में 462, संजय नगर में 458 और वसुंधरा में 456 एक्यूआई दर्ज हुआ है।
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प्रदूषण से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा
डॉ. शरद जोशी ने बताया कि हवा में मौजूद बारिक कण ओजोन, सल्फर डायऑक्साइड, नाइट्रिक डायऑक्साइड, कार्बन मोनो डायऑक्साइड सांस की नली में सूजन, एलर्जी, और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही आंखों में ललामी और जलन होती है। लोगों को बार-बार छींक, सिरदर्द, सांस फूलना, खांसी छाती में भारीपन जैसे लक्षण सामने आते हैं। अधिक प्रदूषण दिल का दौरा और ब्रेेन स्ट्रोक का कारण भी बन सकता है।
पिछले पांच दिनों में एक्यूआई
05 नवंबर 470
04 नवंबर 419
03 नवंबर 353
02 नवंबर 334
01 नवंबर 363
दिनभर में ऐसे बदलता रही वायु गुणवत्ता
इलाके 6 बजे 8बजे 10बजे 12बजे 02बजे 04बजे 06बजे 08बजे
इंदिरापुरम 484 483 480 478 472 466 458 455
लोनी 496 496 496 496 481 475 468 467
संजय नगर 480 480 480 478 472 463 453 451
वसुंधरा 481 482 481 477 469 461 452 450