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दो बुजुर्ग किसान अनशन पर बैठे, धारण किया मौन व्रत
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दो बुजुर्ग किसान अनशन पर बैठे, धारण किया मौन व्रत
साहिबाबाद। यूपी गेट पर चल रहा किसान आंदोलन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, किसानों का रोष बढ़ता जा रहा है। फिरोजाबाद और अलीगढ़ से आए दो बुजुर्ग किसान कृषि कानून के खिलाफ मौनव्रत रखकर अनशन पर बैठ हैं। दोनों किसान पर्चियों के माध्यम से अपनी बातें रख रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक आंदोलन चलेगा और सरकार किसानों की मांगें नहीं मानेगी तब तक वह अपना अनशन जारी रखेंगे।
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के रहने वाले 72 वर्षीय किसान सुरेश चंद्र दो दिसंबर को किसान आंदोलन में शामिल होने आए थे। कुछ दिनों तक वह एक्सप्रेस वे पर बैठकर धरने में शामिल हुए। किसानों और सकरकार के बीच हुई वार्ता से दुखी होकर सुरेश चंद्र दो दिनों से एक्सप्रेस वे पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने मुंह पर पट्टी लगाकर मौनव्रत धारण कर लिया। उनके साथ ही अलीगढ़ से आए भूदेव प्रसाद शर्मा भी उनके साथ अनशन पर बैठ गए हैं। वह भी मौन व्रत पर है। दोनों अन्न नहीं ग्रहण कर रहे हैं। उनके साथियों ने बताया कि जब तक सरकार मांगों को नहीं मानती है तब तक दोनों अनशन पर रहेंगे। दोनों पर्ची के जरिये अपनी बातें लोगों तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कई पर्ची बना रखी है। जिसमें लिखा है कि मोदी जी किसानों का दुख दर्द समझो अपनी आत्मा कठोर मत करो। इसके साथ ही एक पर्ची पर लिखा है कि भारत का किसान आपके दरवाजे पर अपना हक मांग रहा है। अपने दरवाजे खोलकर देखो। किसानों का दुख दर्द समझो।
खुले आसमान के नीचे एक्सप्रेस वे पर ही गुजार रहे रात
दोनों किसान दिन रात दिल्ली एक्सप्रेसवे पर डटे हैं। खुले आसमान के नीचे एक्सप्रेस वे पर ही रात गुजारते हैं। सुरेश चंद ने मुंह पर जो पट्टी बांधी है उस पर लिखा है - गांधी जी के पदचिन्हों पर किसान भूख हड़ताल पर। उनकी मानें तो किसान गांधी जी के पद चिन्हों पर चलकर अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है। किसान अहिंसा का रास्ता नहीं अपना रहा है। किसान शांतिपूर्ण रूप से अपनी लड़ाई लड़ रहा है।
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साहिबाबाद। यूपी गेट पर चल रहा किसान आंदोलन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, किसानों का रोष बढ़ता जा रहा है। फिरोजाबाद और अलीगढ़ से आए दो बुजुर्ग किसान कृषि कानून के खिलाफ मौनव्रत रखकर अनशन पर बैठ हैं। दोनों किसान पर्चियों के माध्यम से अपनी बातें रख रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक आंदोलन चलेगा और सरकार किसानों की मांगें नहीं मानेगी तब तक वह अपना अनशन जारी रखेंगे।
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के रहने वाले 72 वर्षीय किसान सुरेश चंद्र दो दिसंबर को किसान आंदोलन में शामिल होने आए थे। कुछ दिनों तक वह एक्सप्रेस वे पर बैठकर धरने में शामिल हुए। किसानों और सकरकार के बीच हुई वार्ता से दुखी होकर सुरेश चंद्र दो दिनों से एक्सप्रेस वे पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने मुंह पर पट्टी लगाकर मौनव्रत धारण कर लिया। उनके साथ ही अलीगढ़ से आए भूदेव प्रसाद शर्मा भी उनके साथ अनशन पर बैठ गए हैं। वह भी मौन व्रत पर है। दोनों अन्न नहीं ग्रहण कर रहे हैं। उनके साथियों ने बताया कि जब तक सरकार मांगों को नहीं मानती है तब तक दोनों अनशन पर रहेंगे। दोनों पर्ची के जरिये अपनी बातें लोगों तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कई पर्ची बना रखी है। जिसमें लिखा है कि मोदी जी किसानों का दुख दर्द समझो अपनी आत्मा कठोर मत करो। इसके साथ ही एक पर्ची पर लिखा है कि भारत का किसान आपके दरवाजे पर अपना हक मांग रहा है। अपने दरवाजे खोलकर देखो। किसानों का दुख दर्द समझो।
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खुले आसमान के नीचे एक्सप्रेस वे पर ही गुजार रहे रात
दोनों किसान दिन रात दिल्ली एक्सप्रेसवे पर डटे हैं। खुले आसमान के नीचे एक्सप्रेस वे पर ही रात गुजारते हैं। सुरेश चंद ने मुंह पर जो पट्टी बांधी है उस पर लिखा है - गांधी जी के पदचिन्हों पर किसान भूख हड़ताल पर। उनकी मानें तो किसान गांधी जी के पद चिन्हों पर चलकर अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है। किसान अहिंसा का रास्ता नहीं अपना रहा है। किसान शांतिपूर्ण रूप से अपनी लड़ाई लड़ रहा है।
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