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विंडसर पार्क के सुरक्षा गार्डों ने गेट बंदकर रेजिडेंट्स को बनाया बंधक
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विंडसर पार्क के सुरक्षा गार्डों ने गेट बंदकर रेजिडेंट्स को बनाया बंधक
साहिबाबाद। नई और पुरानी आरडब्ल्यूए के विवाद के बीच वैभव खंड विंडसर पार्क सोसायटी के लोग व यहां तैनात मेंटेनेस स्टाफ परेशान है। चुनाव हो जाने के बाद भी नई आरडब्ल्यूए को सोसायटी हैंडओवर न होने और कोर्ट में मामला पेंडिंग होने से एक ओर जहां स्टाफ को पेमेंट नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी ओर रेजिडेंट्स को परेशान हैं। वेतन न मिलने पर शुक्रवार रात गुस्साए सुरक्षा गार्डों ने सोसायटी के सभी गेटों पर ताला लगाकर लोगों को कैद कर दिया। करीब डेढ़ से दो घंटे बाद पहुंची पुलिस ने तालों को खुलवाया और गार्डों को हिरासत में लेकर शांतिभंग की धारा में चालान कर दिया।
वेतन न मिलने और सिक्योरिटी स्टाफ पर रुपयों की हेराफेरी करने के आरोप के बाद जब सिक्योरिटी गार्ड ने शुकवार रात सोसायटी के तीनों गेट बंद कर दिए। गेट बंद होने के बाद लोग करीब डेढ़ से दो घंटे न तो सोसायटी के बाहर जा सके और न ही अंदर आ पाए। वर्तमान आरडब्ल्यूए ने जब पुलिस को फोन कर शिकायत की, तब जाकर सिक्योरिटी स्टाफ ने गेट के ताले खोले और लोगों को राहत मिली। सोसायटी में लंबे समय से विवाद चल रहा है। दरअसल कोर्ट में मामला होने से सोसायटी का खाता भी सीज किया जा चुका है। इससे लंबे समय से सोसायटी की सर्विस में लगे लोगों को वेतन नहीं मिल पा रहा। वेतन न मिलने से ही सुरक्षा गार्डों ने शुक्रवार रात गेट लॉक कर हंगामा किया। वर्तमान आरडब्ल्यूए अध्यक्ष सतीश गोविंद ने बताया कि हंगामे से पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने गलत तरीके से स्टाफ के कुछ लोगों को पेमेंट किया था। पावर सप्लाई के लिए एडवांस रिचार्ज के जो कैश कलेक्शन थे, पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने अपने घर पर मंगवा लिए 11 लोगों को पेमेंट किया। सतीश का आरोप है कि इन सबसे उन्हें अनजान रखा गया। सिक्योरिटी ऑफिसर के खिलाफ पुलिस में शिकायत की।
आरडब्ल्यूए के विवाद में हम लोग करीब दो साल से विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। जिला प्रशासन को मामले में हस्तक्षेप कर निर्णय निकालना चाहिए। कुछ रेजिडेंट्स शनिवार को एसडीएम से मिलने पहुंचे थे, लेकिन किसी से मुलाकात नहीं हुई। - शिखर सक्सेना
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कोर्ट में मामला चल रहा है। फैसला आने में अगर पांच से 10 साल लग गए तो तब तक इस तरह की अव्यवस्था बनी रहेगी तो इससे परेशानी ही होगी। जिला प्रशासन ने जब पूर्व में इलेक्शन करवा दिए तब उन्हें रेजिडेंट्स हित में फैसला लेना चाहिए था। - रीना पटनायक
सोसायटी में जानबूझकर पैनिक क्रिएट किया जा रहा है। एसडीएम ने अपने नेतृत्व में चुनाव कराया, जिसमें हमारी टीम विजयी रही। बावजूद इसके हम लोगों को मेंटेनेंस चार्ज नहीं मिल सका है। पुरानी आरडब्ल्यूए के लोग बेवजह मामला को उलझा रहे हैं। - सतीश गोविंद, वर्तमान आरडब्लयूए अध्यक्ष
आरडब्ल्यूए का चुनाव गलत नाम से कराया गया है। मामला अभी कोर्ट में है, जब तक कोई फैसला आ नहीं जाता नई आरडब्ल्यूए को चार्ज नहीं मिल सकता। मैंने तो सिक्योरिटी वालों को वाउचर काटकर पैसा दिया और पूरे नियम के साथ। बेवजह नई आरडब्ल्यूए ने चोरी का इल्जाम लगाकर गरीब को फंसाया है। - विशाल शर्मा, पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष
यह है विवाद
आरडब्ल्यूए चुनाव 2016 में हुआ। इसमें 10 लोगों की मैनेजमेंट कमेटी चुनी गई। रेजिडेंट्स का कहना है कि यह चुनाव एक साल के लिए हुआ था। अगले साल दोबारा चुनाव होना था, लेकिन दो वर्ष चुनाव न होने के बाद रेजिडेंट्स ने डिप्टी रजिस्ट्रार मेरठ में शिकायत की तो रजिस्ट्रार ने एसडीएम को चुनाव कराने को पत्र भेजा। इसके विरोध में पुरानी आरडब्ल्यूए कोर्ट चली गई और चुनाव न कराने की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने रिट खारिज कर दी। चुनाव कराने के आदेश दिए। 2018 में एसडीएम के नेतृत्व में चुनाव करए गए, लेकिन यह चुनाव विंडसर पार्क अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन के नाम से हुआ। जबकि मेरठ डिप्टी रजिस्ट्रार के यहां विंडसर पार्क रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के नाम से पंजीकृत है। पुरानी आरडब्ल्यूए इसके खिलाफ दुबारा सुप्रीम कोर्ट चली गई और अब तक सुप्रीम कोर्ट से इस विवाद में कोई फैसला नहीं आया है। इस बीच आरडब्ल्यूए मैनेजमेंट का अकाउंट सीज कर दिया गया। सोसायटी में मेंटेनेंस व सिक्योरिटी स्टाफ को वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा।
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साहिबाबाद। नई और पुरानी आरडब्ल्यूए के विवाद के बीच वैभव खंड विंडसर पार्क सोसायटी के लोग व यहां तैनात मेंटेनेस स्टाफ परेशान है। चुनाव हो जाने के बाद भी नई आरडब्ल्यूए को सोसायटी हैंडओवर न होने और कोर्ट में मामला पेंडिंग होने से एक ओर जहां स्टाफ को पेमेंट नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी ओर रेजिडेंट्स को परेशान हैं। वेतन न मिलने पर शुक्रवार रात गुस्साए सुरक्षा गार्डों ने सोसायटी के सभी गेटों पर ताला लगाकर लोगों को कैद कर दिया। करीब डेढ़ से दो घंटे बाद पहुंची पुलिस ने तालों को खुलवाया और गार्डों को हिरासत में लेकर शांतिभंग की धारा में चालान कर दिया।
वेतन न मिलने और सिक्योरिटी स्टाफ पर रुपयों की हेराफेरी करने के आरोप के बाद जब सिक्योरिटी गार्ड ने शुकवार रात सोसायटी के तीनों गेट बंद कर दिए। गेट बंद होने के बाद लोग करीब डेढ़ से दो घंटे न तो सोसायटी के बाहर जा सके और न ही अंदर आ पाए। वर्तमान आरडब्ल्यूए ने जब पुलिस को फोन कर शिकायत की, तब जाकर सिक्योरिटी स्टाफ ने गेट के ताले खोले और लोगों को राहत मिली। सोसायटी में लंबे समय से विवाद चल रहा है। दरअसल कोर्ट में मामला होने से सोसायटी का खाता भी सीज किया जा चुका है। इससे लंबे समय से सोसायटी की सर्विस में लगे लोगों को वेतन नहीं मिल पा रहा। वेतन न मिलने से ही सुरक्षा गार्डों ने शुक्रवार रात गेट लॉक कर हंगामा किया। वर्तमान आरडब्ल्यूए अध्यक्ष सतीश गोविंद ने बताया कि हंगामे से पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने गलत तरीके से स्टाफ के कुछ लोगों को पेमेंट किया था। पावर सप्लाई के लिए एडवांस रिचार्ज के जो कैश कलेक्शन थे, पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने अपने घर पर मंगवा लिए 11 लोगों को पेमेंट किया। सतीश का आरोप है कि इन सबसे उन्हें अनजान रखा गया। सिक्योरिटी ऑफिसर के खिलाफ पुलिस में शिकायत की।
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आरडब्ल्यूए के विवाद में हम लोग करीब दो साल से विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। जिला प्रशासन को मामले में हस्तक्षेप कर निर्णय निकालना चाहिए। कुछ रेजिडेंट्स शनिवार को एसडीएम से मिलने पहुंचे थे, लेकिन किसी से मुलाकात नहीं हुई। - शिखर सक्सेना
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कोर्ट में मामला चल रहा है। फैसला आने में अगर पांच से 10 साल लग गए तो तब तक इस तरह की अव्यवस्था बनी रहेगी तो इससे परेशानी ही होगी। जिला प्रशासन ने जब पूर्व में इलेक्शन करवा दिए तब उन्हें रेजिडेंट्स हित में फैसला लेना चाहिए था। - रीना पटनायक
सोसायटी में जानबूझकर पैनिक क्रिएट किया जा रहा है। एसडीएम ने अपने नेतृत्व में चुनाव कराया, जिसमें हमारी टीम विजयी रही। बावजूद इसके हम लोगों को मेंटेनेंस चार्ज नहीं मिल सका है। पुरानी आरडब्ल्यूए के लोग बेवजह मामला को उलझा रहे हैं। - सतीश गोविंद, वर्तमान आरडब्लयूए अध्यक्ष
आरडब्ल्यूए का चुनाव गलत नाम से कराया गया है। मामला अभी कोर्ट में है, जब तक कोई फैसला आ नहीं जाता नई आरडब्ल्यूए को चार्ज नहीं मिल सकता। मैंने तो सिक्योरिटी वालों को वाउचर काटकर पैसा दिया और पूरे नियम के साथ। बेवजह नई आरडब्ल्यूए ने चोरी का इल्जाम लगाकर गरीब को फंसाया है। - विशाल शर्मा, पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष
यह है विवाद
आरडब्ल्यूए चुनाव 2016 में हुआ। इसमें 10 लोगों की मैनेजमेंट कमेटी चुनी गई। रेजिडेंट्स का कहना है कि यह चुनाव एक साल के लिए हुआ था। अगले साल दोबारा चुनाव होना था, लेकिन दो वर्ष चुनाव न होने के बाद रेजिडेंट्स ने डिप्टी रजिस्ट्रार मेरठ में शिकायत की तो रजिस्ट्रार ने एसडीएम को चुनाव कराने को पत्र भेजा। इसके विरोध में पुरानी आरडब्ल्यूए कोर्ट चली गई और चुनाव न कराने की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने रिट खारिज कर दी। चुनाव कराने के आदेश दिए। 2018 में एसडीएम के नेतृत्व में चुनाव करए गए, लेकिन यह चुनाव विंडसर पार्क अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन के नाम से हुआ। जबकि मेरठ डिप्टी रजिस्ट्रार के यहां विंडसर पार्क रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के नाम से पंजीकृत है। पुरानी आरडब्ल्यूए इसके खिलाफ दुबारा सुप्रीम कोर्ट चली गई और अब तक सुप्रीम कोर्ट से इस विवाद में कोई फैसला नहीं आया है। इस बीच आरडब्ल्यूए मैनेजमेंट का अकाउंट सीज कर दिया गया। सोसायटी में मेंटेनेंस व सिक्योरिटी स्टाफ को वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा।