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282 एकल यूनिटों में मानकों का उल्लंघन कर हुआ निर्माण
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282 एकल यूनिटों में मानकों का उल्लंघन कर हुआ निर्माण
गाजियाबाद। जीडीए क्षेत्र में एकल यूनिटों पर मानकों का उल्लंघन कर हुए अवैध निर्माण में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। जीडीए की ओर से गठित गोपनीय समिति की जांच में 282 एकल यूनिटों पर मानकों से कई गुना फ्लैटों के निर्माण का मामला सामने आया है। जांच में एक एकल यूनिट पर 15 से 28 यूनिट फ्लैटों का निर्माण हुआ है। जीडीए की जांच का दायरा बढ़ने से बिल्डर और अधिकारियों की मिलीभगत से हुए इस खेल का सच सामने आएगा। मामले में 2014 से अब तक प्रवर्तन अनुभाग में तैनात रहे अधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है।
जीडीए उपाध्यक्ष ने एकल यूनिटों पर हुए अवैध निर्माण मामले ने प्रवर्तन अनुभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इंदिरापुरम सहित नौ कालोनियों में एकल यूनिटों में निर्माण में सारे नियमों को ताक पर रख दिया गया। एकल यूनिटों पर तय क्षमता से अधिक फ्लैटों का नक्शे के विपरीत निर्माण के सर्वाधिक मामले जोन-छह के इंदिरापुरम क्षेत्र में आए। इंदिरापुरम क्षेत्र में एकल यूनिट पर तय क्षमता से छह से सात गुना तक निर्माण किया गया है। चार यूनिटों की जगह 16 से 28 फ्लैटों का निर्माण हुआ। तय क्षमता से अधिक फ्लैटों का निर्माण से इंदिरापुरम की सीवर और ड्रेनेज व्यवस्था बैठ गई।
वहीं, इंदिरापुरम में पीने केपानी और पार्किंग ने लोगों की मुश्किल दोगुना कर दी। तादात से अधिक फ्लैट बनने और लोगों के शिफ्ट होने से पार्किँग बड़ी समस्या बन गई है। सीमित पार्किंग होने से अधिकांश लोगों के वाहन सड़कों पर ही पार्क हुए देखे जा सकते हैं। इंदिरापुरम में सीवर-ड्रेनेज समस्या के चलते उसे नगर निगम लेने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर जोन-सात के राजेंद्रनगर में एकल यूनिटों पर तादात से अधिक फ्लैटों के निर्माण के मामले में पूरे प्रवर्तन अनुभाग के अधिकारियों को हटाते हुए तीन सुपरवाइजरों को निलंबित कर दिया गया था। यहां भी एक एकल यूनिट पर 15 से 20 फ्लैटों का निर्माण होता पाया गया। अब जांच का दायरा अन्य जोन तक पहुंचने पर बड़ी लापरवाही सामने आएगी।
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जीडीए के रडार पर हैं यह क्षेत्र
एकल यूनिटों में तय क्षमता से अधिक बने भवनों के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट जीडीए के निशाने पर हैं। ऐसे भवनों की रजिस्ट्री पर अंकुश लगाने के लिए भी जीडीए उपाध्यक्ष की ओर से एआईजी स्टॉम्प से बातचीत कर प्रयास किए गए। निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के साथ पुराने प्रोजेक्टों में नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों पर एफआईआर करने की भी तैयारी है। जीडीए के रडार पर इंदिरापुरम व राजेंद्रनगर के साथ शालीमार गार्ड में फर्स्ट, सेकेंड व थर्ड, कौशांबी, प्रताप विहार, इंप्रदप्रस्थ और स्वर्णजयंतीपुरम कालोनी की निर्माणाधीन एकल यूनिटें हैं।
खरीददार रहे सचेत, सिंगल यूनिटों के ये हैं मानक
बिल्डरों के चंगुल से खरीदारों को फंसने से बचाने को जीडीए हर संभव प्रयास कर रहा है। लोगों को सावधान करने के लिए घर खरीदने से पहले किन-किन बिंदुओं का ध्यान रखें, इसकी सूचना संबंधी बोर्ड योजनाओं में चस्पा किए जाएंगे। प्राधिकरण के बायलॉज के अनुसार 150 से 300 वर्ग मीटर भूखंड पर तीन, 301 से 400 वर्ग मीटर भूखंड पर चार और 401 से 500 वर्ग मीटर भूखंड पर पांच यूनिटों का निर्माण किया जा सकता है। दूसरी ओर नोटिस बोर्ड में भूखंड का मानचित्र जीडीए से स्वीकृत होने, मानचित्र में स्वीकृत व स्थल पर निर्मित आवासीय इकाई का क्षेत्रफल समान होने, रेरा के तहत आठ या इससे अधिक यूनिट होने पर पंजीकरण होने, मानचित्र के दर्शित पार्किंग स्थल की उपलब्धता और स्वीकृत मानचित्र के अनुसार तलों की संख्या समान होने के बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।
कोट
एकल यूनिटों पर नियम विरुद्ध हुए निर्माण की जांच जारी है। इंदिरापुरम, राजेंद्रनगर सहित अन्य क्षेत्रों में बिल्डिंग बायलॉज के बड़े पैमाने पर हुए उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। मामलों में दोषी अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन को की जाएगी।
- कंचन वर्मा, उपाध्यक्ष, जीडीए
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गाजियाबाद। जीडीए क्षेत्र में एकल यूनिटों पर मानकों का उल्लंघन कर हुए अवैध निर्माण में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। जीडीए की ओर से गठित गोपनीय समिति की जांच में 282 एकल यूनिटों पर मानकों से कई गुना फ्लैटों के निर्माण का मामला सामने आया है। जांच में एक एकल यूनिट पर 15 से 28 यूनिट फ्लैटों का निर्माण हुआ है। जीडीए की जांच का दायरा बढ़ने से बिल्डर और अधिकारियों की मिलीभगत से हुए इस खेल का सच सामने आएगा। मामले में 2014 से अब तक प्रवर्तन अनुभाग में तैनात रहे अधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है।
जीडीए उपाध्यक्ष ने एकल यूनिटों पर हुए अवैध निर्माण मामले ने प्रवर्तन अनुभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इंदिरापुरम सहित नौ कालोनियों में एकल यूनिटों में निर्माण में सारे नियमों को ताक पर रख दिया गया। एकल यूनिटों पर तय क्षमता से अधिक फ्लैटों का नक्शे के विपरीत निर्माण के सर्वाधिक मामले जोन-छह के इंदिरापुरम क्षेत्र में आए। इंदिरापुरम क्षेत्र में एकल यूनिट पर तय क्षमता से छह से सात गुना तक निर्माण किया गया है। चार यूनिटों की जगह 16 से 28 फ्लैटों का निर्माण हुआ। तय क्षमता से अधिक फ्लैटों का निर्माण से इंदिरापुरम की सीवर और ड्रेनेज व्यवस्था बैठ गई।
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वहीं, इंदिरापुरम में पीने केपानी और पार्किंग ने लोगों की मुश्किल दोगुना कर दी। तादात से अधिक फ्लैट बनने और लोगों के शिफ्ट होने से पार्किँग बड़ी समस्या बन गई है। सीमित पार्किंग होने से अधिकांश लोगों के वाहन सड़कों पर ही पार्क हुए देखे जा सकते हैं। इंदिरापुरम में सीवर-ड्रेनेज समस्या के चलते उसे नगर निगम लेने को तैयार नहीं है। दूसरी ओर जोन-सात के राजेंद्रनगर में एकल यूनिटों पर तादात से अधिक फ्लैटों के निर्माण के मामले में पूरे प्रवर्तन अनुभाग के अधिकारियों को हटाते हुए तीन सुपरवाइजरों को निलंबित कर दिया गया था। यहां भी एक एकल यूनिट पर 15 से 20 फ्लैटों का निर्माण होता पाया गया। अब जांच का दायरा अन्य जोन तक पहुंचने पर बड़ी लापरवाही सामने आएगी।
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जीडीए के रडार पर हैं यह क्षेत्र
एकल यूनिटों में तय क्षमता से अधिक बने भवनों के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट जीडीए के निशाने पर हैं। ऐसे भवनों की रजिस्ट्री पर अंकुश लगाने के लिए भी जीडीए उपाध्यक्ष की ओर से एआईजी स्टॉम्प से बातचीत कर प्रयास किए गए। निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के साथ पुराने प्रोजेक्टों में नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों पर एफआईआर करने की भी तैयारी है। जीडीए के रडार पर इंदिरापुरम व राजेंद्रनगर के साथ शालीमार गार्ड में फर्स्ट, सेकेंड व थर्ड, कौशांबी, प्रताप विहार, इंप्रदप्रस्थ और स्वर्णजयंतीपुरम कालोनी की निर्माणाधीन एकल यूनिटें हैं।
खरीददार रहे सचेत, सिंगल यूनिटों के ये हैं मानक
बिल्डरों के चंगुल से खरीदारों को फंसने से बचाने को जीडीए हर संभव प्रयास कर रहा है। लोगों को सावधान करने के लिए घर खरीदने से पहले किन-किन बिंदुओं का ध्यान रखें, इसकी सूचना संबंधी बोर्ड योजनाओं में चस्पा किए जाएंगे। प्राधिकरण के बायलॉज के अनुसार 150 से 300 वर्ग मीटर भूखंड पर तीन, 301 से 400 वर्ग मीटर भूखंड पर चार और 401 से 500 वर्ग मीटर भूखंड पर पांच यूनिटों का निर्माण किया जा सकता है। दूसरी ओर नोटिस बोर्ड में भूखंड का मानचित्र जीडीए से स्वीकृत होने, मानचित्र में स्वीकृत व स्थल पर निर्मित आवासीय इकाई का क्षेत्रफल समान होने, रेरा के तहत आठ या इससे अधिक यूनिट होने पर पंजीकरण होने, मानचित्र के दर्शित पार्किंग स्थल की उपलब्धता और स्वीकृत मानचित्र के अनुसार तलों की संख्या समान होने के बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।
कोट
एकल यूनिटों पर नियम विरुद्ध हुए निर्माण की जांच जारी है। इंदिरापुरम, राजेंद्रनगर सहित अन्य क्षेत्रों में बिल्डिंग बायलॉज के बड़े पैमाने पर हुए उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। मामलों में दोषी अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन को की जाएगी।
- कंचन वर्मा, उपाध्यक्ष, जीडीए