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बच्चा चोर गैंग की अफवाह से मम्मियां परेशान, कोडवर्ड बनाया
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बच्चा चोर गैंग की अफवाह से डरीं मम्मियों ने बनाया कोड वर्ड
गाजियाबाद। बच्चा चोर गैंग की सक्रियता भले न हो, लेकिन इस अफवाह ने मम्मियों की टेंशन बढ़ा दी है। बच्चों की सुरक्षा के लिए अब वह खास एहतियात बरत रहीं हैं। महिलाओं ने बच्चों के लिए कोड वर्ड बना दिए हैं। इन कोड वर्ड का इस्तेमाल तब किया जाएगा, जब माता-पिता के अलावा कोई अन्य व्यक्ति बच्चों को स्कूल या रास्ते से लेने पहुंचे। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चा चोरी गैंग की सक्रियता कोरी अफवाह है।
करीब एक सप्ताह से गाजियाबाद ही नहीं प्रदेश के कई हिस्सों में बच्चा चोरी गैंग के सक्रिय होने की अफवाह तेजी से फैली है। हालांकि ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन महिलाएं बच्चों की सुरक्षा को लेकर डरीं हुई हैं। महिलाओं ने स्कूल बस ड्राइवरों और कैब चालकों को भी एहतियात बरतने के लिए कहा है। अब महिलाएं स्कूल बस और कैब के पहुंचने से पहले ही उन्हें लेने के लिए घरों के बाहर खड़ी हो जाती हैं। यही नहीं ट्यूशन पढ़ने के लिए भी बच्चों को अकेला नहीं भेज रहीं हैं।
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घरों के बाहर खेलने पर भी लगाई पाबंदी
इस अफवाह के चलते मम्मियों ने छोटे बच्चों के घरों के बाहर खेलने पर भी पाबंदी लगा दी है। वह पार्कों में भी बच्चों को नहीं भेज रही हैं। इसकी वजह आजकल पार्कों में बच्चों की संख्या भी काफी कम हो चुकी हैं। हालांकि गेट बंद सोसायटियों में इसका असर कम हैं। यहां सुरक्षा गार्ड तैनात होने के चलते महिलाओं में सुरक्षा को लेकर चिंता कम है।
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कोड वर्ड
महिलाओं ने अलग-अलग तरह के कोड वर्ड बनाए हैं। कुछ महिलाओं ने पैट एनिमल के नाम पर तो कुछ लोगों ने कार्टून कैरेक्टर, फ्लॉवर के नाम पर कोड वर्ड बनाए हैं।
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परिचर्चा
बच्चा चोरी गैंग की अफवाह से बच्चों की चिंता बढ़ गई है। बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने खुद ही जाती हूं। एक कोड वर्ड तय किया है कि अगर कभी कोई अन्य व्यक्ति स्कूल में लेने पहुंचे तो पहले कोड वर्ड पूछ लें। - रेनू यादव, नेहरू नगर सेकेंड निवासी
बच्चों का अकेले ट्यूशन जाना भी बंद कर दिया है। स्कूल और ट्यूशन पर परिवार का कोई न कोई सदस्य साथ जाता है। बच्चों को लेकर चिंता बढ़ गई है। ट्यूशन टीचर को भी एक कोड वर्ड बता दिया है। कोड बताने पर ही बच्चों को उनके साथ भेजने को कहा है। - निशा, कविनगर निवासी
भले ही बच्चा चोरी गैंग की सिर्फ अफवाह हो, लेकिन इससे डर बन गया है। पुलिस को भी स्कूल और कॉलोनियों में पेट्रोलिंग और सुरक्षा बढ़ानी चाहिए। - रेनू कसाना, नेहरू नगर निवासी
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गाजियाबाद। बच्चा चोर गैंग की सक्रियता भले न हो, लेकिन इस अफवाह ने मम्मियों की टेंशन बढ़ा दी है। बच्चों की सुरक्षा के लिए अब वह खास एहतियात बरत रहीं हैं। महिलाओं ने बच्चों के लिए कोड वर्ड बना दिए हैं। इन कोड वर्ड का इस्तेमाल तब किया जाएगा, जब माता-पिता के अलावा कोई अन्य व्यक्ति बच्चों को स्कूल या रास्ते से लेने पहुंचे। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चा चोरी गैंग की सक्रियता कोरी अफवाह है।
करीब एक सप्ताह से गाजियाबाद ही नहीं प्रदेश के कई हिस्सों में बच्चा चोरी गैंग के सक्रिय होने की अफवाह तेजी से फैली है। हालांकि ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन महिलाएं बच्चों की सुरक्षा को लेकर डरीं हुई हैं। महिलाओं ने स्कूल बस ड्राइवरों और कैब चालकों को भी एहतियात बरतने के लिए कहा है। अब महिलाएं स्कूल बस और कैब के पहुंचने से पहले ही उन्हें लेने के लिए घरों के बाहर खड़ी हो जाती हैं। यही नहीं ट्यूशन पढ़ने के लिए भी बच्चों को अकेला नहीं भेज रहीं हैं।
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घरों के बाहर खेलने पर भी लगाई पाबंदी
इस अफवाह के चलते मम्मियों ने छोटे बच्चों के घरों के बाहर खेलने पर भी पाबंदी लगा दी है। वह पार्कों में भी बच्चों को नहीं भेज रही हैं। इसकी वजह आजकल पार्कों में बच्चों की संख्या भी काफी कम हो चुकी हैं। हालांकि गेट बंद सोसायटियों में इसका असर कम हैं। यहां सुरक्षा गार्ड तैनात होने के चलते महिलाओं में सुरक्षा को लेकर चिंता कम है।
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कोड वर्ड
महिलाओं ने अलग-अलग तरह के कोड वर्ड बनाए हैं। कुछ महिलाओं ने पैट एनिमल के नाम पर तो कुछ लोगों ने कार्टून कैरेक्टर, फ्लॉवर के नाम पर कोड वर्ड बनाए हैं।
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परिचर्चा
बच्चा चोरी गैंग की अफवाह से बच्चों की चिंता बढ़ गई है। बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने खुद ही जाती हूं। एक कोड वर्ड तय किया है कि अगर कभी कोई अन्य व्यक्ति स्कूल में लेने पहुंचे तो पहले कोड वर्ड पूछ लें। - रेनू यादव, नेहरू नगर सेकेंड निवासी
बच्चों का अकेले ट्यूशन जाना भी बंद कर दिया है। स्कूल और ट्यूशन पर परिवार का कोई न कोई सदस्य साथ जाता है। बच्चों को लेकर चिंता बढ़ गई है। ट्यूशन टीचर को भी एक कोड वर्ड बता दिया है। कोड बताने पर ही बच्चों को उनके साथ भेजने को कहा है। - निशा, कविनगर निवासी
भले ही बच्चा चोरी गैंग की सिर्फ अफवाह हो, लेकिन इससे डर बन गया है। पुलिस को भी स्कूल और कॉलोनियों में पेट्रोलिंग और सुरक्षा बढ़ानी चाहिए। - रेनू कसाना, नेहरू नगर निवासी