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बैकर्स को देना होगा सरफ्रेसी एक्ट की कार्रवाई का ब्योरा
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बैंकर्स को देना होगा बंधक संपत्ति पर कार्रवाई का ब्योरा
गाजियाबाद। बैंक की धनराशि दबाए बैठे डिफाल्टरों पर सरफेसी एक्ट के तहत कार्रवाई की स्वीकृति लेने के बाद भी बैंकर्स की तरफ से आगे की कार्रवाई नहीं की जा रही है। बल्कि जिलाधिकारी की तरफ से बंधक संपत्ति को जब्त करने संबंधी पारित आदेश का हवाला देकर वसूली की जा रही है। कुछ इस तरह के मामले प्रकाश में आने के बाद डीएम ने पूरे मामले पर जांच बैठा दी है। एडीएम वित्त एवं राजस्व को निर्देश दिया है कि वो बीते दो वर्षों के दौरान बंधक संपत्ति जब्त करने संबंधी आदेशों की प्रोग्रेस रिपोर्ट लें कि बैंकों ने संपत्ति जब्त की या नहीं और कितनी संपत्तियों को नीलाम किया गया। एडीएम को दो सप्ताह में जांच रिपोर्ट देनी होगी।
प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे मामले संज्ञान में आए हैं कि जिलाधिकारी के स्तर से संपत्ति जब्त करने के आदेश पारित होने के बाद भी बैंकों ने न तो संपत्ति को सीज किया है और न ही कब्जा लेकर नीलाम किया है। ऐसे में एडीएम वित्त पूरे मामले की जांच करेंगे और हर सप्ताह कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत करेंगे। बीते दो वर्षों में डीएम के तरफ से 950 आदेश सरफेसी एक्ट के तहत पारित किए गए हैं, जिसमें संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया गया है। सभी आदेश पीएनबी, एसबीआई, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया व अन्य बैंकों की ऋण धनराशि वसूल न होने पर जारी किए गए। इसमें से कुछ बैंकों के मामले संदिग्ध पाए गए हैं। ध्यान रहे कि किसी भी व्यक्ति को ऋण देते वक्त बैंक संपत्ति के कागजात बंधक के तौर पर रख लेते हैं। इससे अगर कोई व्यक्ति ऋण जमा नहीं करता है तो बैंक को अधिकार होती है कि वो संपत्ति पर कब्जा ले सकें और इसे नीलाम कर अपनी ऋण धनराशि वसूल सके। सरफेसी एक्ट जिलाधिकारी को यह अधिकारी देती है कि बैंक के आवेदन पर बंधक संपत्ति पर बैंक को कब्जा लेने व सील करने का आदेश पारित करे।
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वर्जन
कुछ ऐसे मामले भी संज्ञान में आए हैं, जिनमें डीएम स्तर से सरफेसी एक्ट के तहत आदेश पारित होने के बाद बैंकों ने आगे कोई कार्रवाई नहीं की। बल्कि आदेश का रौब दिखाकर संबंधित पक्ष से वसूली करते रहे। अब 15 दिन में सभी मामलों की जांच रिपोर्ट मांगी है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अजय शंकर पांडेय, जिलाधिकारी
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गाजियाबाद। बैंक की धनराशि दबाए बैठे डिफाल्टरों पर सरफेसी एक्ट के तहत कार्रवाई की स्वीकृति लेने के बाद भी बैंकर्स की तरफ से आगे की कार्रवाई नहीं की जा रही है। बल्कि जिलाधिकारी की तरफ से बंधक संपत्ति को जब्त करने संबंधी पारित आदेश का हवाला देकर वसूली की जा रही है। कुछ इस तरह के मामले प्रकाश में आने के बाद डीएम ने पूरे मामले पर जांच बैठा दी है। एडीएम वित्त एवं राजस्व को निर्देश दिया है कि वो बीते दो वर्षों के दौरान बंधक संपत्ति जब्त करने संबंधी आदेशों की प्रोग्रेस रिपोर्ट लें कि बैंकों ने संपत्ति जब्त की या नहीं और कितनी संपत्तियों को नीलाम किया गया। एडीएम को दो सप्ताह में जांच रिपोर्ट देनी होगी।
प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे मामले संज्ञान में आए हैं कि जिलाधिकारी के स्तर से संपत्ति जब्त करने के आदेश पारित होने के बाद भी बैंकों ने न तो संपत्ति को सीज किया है और न ही कब्जा लेकर नीलाम किया है। ऐसे में एडीएम वित्त पूरे मामले की जांच करेंगे और हर सप्ताह कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत करेंगे। बीते दो वर्षों में डीएम के तरफ से 950 आदेश सरफेसी एक्ट के तहत पारित किए गए हैं, जिसमें संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया गया है। सभी आदेश पीएनबी, एसबीआई, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया व अन्य बैंकों की ऋण धनराशि वसूल न होने पर जारी किए गए। इसमें से कुछ बैंकों के मामले संदिग्ध पाए गए हैं। ध्यान रहे कि किसी भी व्यक्ति को ऋण देते वक्त बैंक संपत्ति के कागजात बंधक के तौर पर रख लेते हैं। इससे अगर कोई व्यक्ति ऋण जमा नहीं करता है तो बैंक को अधिकार होती है कि वो संपत्ति पर कब्जा ले सकें और इसे नीलाम कर अपनी ऋण धनराशि वसूल सके। सरफेसी एक्ट जिलाधिकारी को यह अधिकारी देती है कि बैंक के आवेदन पर बंधक संपत्ति पर बैंक को कब्जा लेने व सील करने का आदेश पारित करे।
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वर्जन
कुछ ऐसे मामले भी संज्ञान में आए हैं, जिनमें डीएम स्तर से सरफेसी एक्ट के तहत आदेश पारित होने के बाद बैंकों ने आगे कोई कार्रवाई नहीं की। बल्कि आदेश का रौब दिखाकर संबंधित पक्ष से वसूली करते रहे। अब 15 दिन में सभी मामलों की जांच रिपोर्ट मांगी है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अजय शंकर पांडेय, जिलाधिकारी
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