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एंटीबॉडी के दम पर कमजोर पड़ी थी तीसरी लहर
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एंटीबॉडी के दम पर कमजोर पड़ी तीसरी लहर
गाजियाबाद। कोरोना की तीसरी लहर जितनी तेजी से आई उतनी ही तेजी से लोगों के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने से धीमी पड़ गई। तीन फरवरी को शासन द्वारा जारी सीरो सर्वे रिपोर्ट में 90.20 प्रतिशत से अधिक लोगों में कोरोना से लड़ने के प्रति एंटीबॉडी विकसित पाई गई है। संक्रमण के नियंत्रण में आने की वजह 15 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों का टीकाकरण होना भी माना जा रहा है।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कोरोना के खिलाफ एंटीबाडी का पता लगाने के लिए सीरोलाजिकल (सीरो) सर्वे कराया गया था। सर्वे में सभी आयु वर्ग के लोगों को शामिल किया गया था। 21 से 25 दिसंबर के बीच जिले में अलग-अलग आयु वर्ग के 640-640 लोगों के सैंपल लिए गए थे। सभी 3200 नमूनों की जांच लखनऊ स्थित किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज में की गई। 90.2 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी मिलने से यह साफ हो गया है कि कोविडरोधी टीकाकरण पूरी तरह असर कारक है।
एसीएमओ डॉ. सुनील त्यागी का कहना है कि 20 दिसंबर के बाद संक्रमण बढ़ना शुरू हुआ था, इसके बाद जनवरी में संक्रमितों की संख्या 27 हजार पार कर गई थी। इस दौरान टीकाकरण का भी अनुपात तेजी से बढ़ा। 23 जनवरी के बाद संक्रमण में कमी आनी शुरू हो गई। इसका तीन कारण था एक तो सभी लोगों लोग टीका लगवा चुके थे, दूसरा जो भी संक्रमित हुए थे उनके आसपास लोगों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही थी। इसके अलावा संक्रमित के आसपास सर्वे और कांटैक्ट ट्रेसिंग के बाद मरीजों की पहचान जल्दी हो गई थी और लोगों में सजगता भी थी।
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सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने बताया कि तीसरी लहर में वायरस की प्रकृति ऐसी पाई गई थी कि इसका विकास डेल्टा की अपेक्षा 10 गुना अधिक था। जो लोग टीका लगवा चुके थे उनमें वायरस का प्रभाव कम पड़ा और जो लोग संक्रमित भी हुए वह तेजी से स्वस्थ हो गए।
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गाजियाबाद। कोरोना की तीसरी लहर जितनी तेजी से आई उतनी ही तेजी से लोगों के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने से धीमी पड़ गई। तीन फरवरी को शासन द्वारा जारी सीरो सर्वे रिपोर्ट में 90.20 प्रतिशत से अधिक लोगों में कोरोना से लड़ने के प्रति एंटीबॉडी विकसित पाई गई है। संक्रमण के नियंत्रण में आने की वजह 15 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों का टीकाकरण होना भी माना जा रहा है।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कोरोना के खिलाफ एंटीबाडी का पता लगाने के लिए सीरोलाजिकल (सीरो) सर्वे कराया गया था। सर्वे में सभी आयु वर्ग के लोगों को शामिल किया गया था। 21 से 25 दिसंबर के बीच जिले में अलग-अलग आयु वर्ग के 640-640 लोगों के सैंपल लिए गए थे। सभी 3200 नमूनों की जांच लखनऊ स्थित किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज में की गई। 90.2 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी मिलने से यह साफ हो गया है कि कोविडरोधी टीकाकरण पूरी तरह असर कारक है।
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एसीएमओ डॉ. सुनील त्यागी का कहना है कि 20 दिसंबर के बाद संक्रमण बढ़ना शुरू हुआ था, इसके बाद जनवरी में संक्रमितों की संख्या 27 हजार पार कर गई थी। इस दौरान टीकाकरण का भी अनुपात तेजी से बढ़ा। 23 जनवरी के बाद संक्रमण में कमी आनी शुरू हो गई। इसका तीन कारण था एक तो सभी लोगों लोग टीका लगवा चुके थे, दूसरा जो भी संक्रमित हुए थे उनके आसपास लोगों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही थी। इसके अलावा संक्रमित के आसपास सर्वे और कांटैक्ट ट्रेसिंग के बाद मरीजों की पहचान जल्दी हो गई थी और लोगों में सजगता भी थी।
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सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने बताया कि तीसरी लहर में वायरस की प्रकृति ऐसी पाई गई थी कि इसका विकास डेल्टा की अपेक्षा 10 गुना अधिक था। जो लोग टीका लगवा चुके थे उनमें वायरस का प्रभाव कम पड़ा और जो लोग संक्रमित भी हुए वह तेजी से स्वस्थ हो गए।