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अस्पताल की लागत 10 से बढ़कर हुई 13 करोड़, बना फिर भी नहीं
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अस्पताल की लागत 10 से बढ़कर हुई 13 करोड़, बना फिर भी नहीं
गाजियाबाद। लोनी में बन रहे 50 बेड के संयुक्त अस्पताल पर महंगाई, प्रदूषण और कोरोना की मार पड़ी है। यह अस्पताल 9.83 करोड़ रुपये में बनकर तैयार होना था। लेकिन उक्त कारणों से बजट बढ़कर 13.17 करोड़ हो गया है। नवंबर 2021 में अस्पताल तैयार होना था, यह अवधि अब मई 2022 हो गई है। बजट बढ़ने के बावजूद अस्पताल अभी तैयार नहीं हुआ है।
लोनी में 17 लाख की आबादी के लिए 50 बेड के संयुक्त अस्पताल बनाने का काम दिसंबर 2018 में शुरू हुआ था। इसका निर्माण कार्य नवंबर 21 में पूरा होना था। अस्पताल भवन का निर्माण कार्य उप्र. राज्य सहकारी निर्माण संघ द्वारा किया जा रहा है। उस समय शासन ने 9.83 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। काम शुरू होने के बाद मार्च 2020 तक चला था, इसके बाद पांच महीने तक काम बंद रहा। शासन ने लोनी के अस्पताल को प्राथमिकता के तौर पर तय किया था, दिसंबर तक निर्माण कार्य पूरा कर दिया जाएगा, इसके बावजूद काम पूरा नहीं हो पाया। स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता आदित्य धीमान ने बताया कि जिस समय बजट स्वीकृत हुआ था, उसमें मिट्टी का भराव और सोलर लाइट सहित कई अन्य सुविधाओं का जिक्र नहीं था। बाद में काम बढ़ने पर बजट बढ़ गया है।
तीन बार रुका निर्माण कार्य
विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद मिट्टी का भराव होना था, लेकिन तालाब में जलभराव होने से दो महीने कार्य रुक गया था। इसके बाद कोरोना संक्रमण फैलने के बाद लॉकडाउन लगने से मजदूर चले गए थे, तब तीन महीने निर्माण रुक गया। इसके अलावा दिसंबर और जनवरी महीने में प्रदूषण बढ़ने पर निर्माण पर रोक लगा दी गई थी। इस कारण से निर्माण कार्य पूरा होने में देरी हुई है।
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मरीजों को जाना पड़ता है दिल्ली, बरसात में विशेष परेशानी
अभी तक क्षेत्र में 30 बेड का एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। उस भवन का भी स्तर नीचे होने से बरसात में जलभराव हो जाता है और कई दिन तक इलाज प्रभावित हो जाता है। जो मरीज प्राइवेट में इलाज नहीं करा पाते हैं, वह मजबूरी में दिल्ली जाते हैं, क्योंकि लोनी से गाजियाबाद शहर दूर होने से मरीज के तीमारदार दिल्ली जाना मुनासिब समझते हैं।
मई तक अस्पताल हैंडओवर करने के हैं निर्देश
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि निर्माण इकाई ने जो प्रस्तावित बजट दिया है, उसेे सत्यापन के बाद शासन को भेज दिया गया है। अब शासन स्तर से तय होगा कि कितना बजट स्वीकृत किया। सीएमओ ने बताया कि अभी निर्माण एजेंसी के पास लगभग 50 लाख पुराना बजट उपलब्ध है, उससे कार्य चल रहा है। मई तक अस्पताल भवन का निर्माण कार्य पूरा कर हैंडओवर करने के निर्देश दिए गए हैं।
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गाजियाबाद। लोनी में बन रहे 50 बेड के संयुक्त अस्पताल पर महंगाई, प्रदूषण और कोरोना की मार पड़ी है। यह अस्पताल 9.83 करोड़ रुपये में बनकर तैयार होना था। लेकिन उक्त कारणों से बजट बढ़कर 13.17 करोड़ हो गया है। नवंबर 2021 में अस्पताल तैयार होना था, यह अवधि अब मई 2022 हो गई है। बजट बढ़ने के बावजूद अस्पताल अभी तैयार नहीं हुआ है।
लोनी में 17 लाख की आबादी के लिए 50 बेड के संयुक्त अस्पताल बनाने का काम दिसंबर 2018 में शुरू हुआ था। इसका निर्माण कार्य नवंबर 21 में पूरा होना था। अस्पताल भवन का निर्माण कार्य उप्र. राज्य सहकारी निर्माण संघ द्वारा किया जा रहा है। उस समय शासन ने 9.83 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। काम शुरू होने के बाद मार्च 2020 तक चला था, इसके बाद पांच महीने तक काम बंद रहा। शासन ने लोनी के अस्पताल को प्राथमिकता के तौर पर तय किया था, दिसंबर तक निर्माण कार्य पूरा कर दिया जाएगा, इसके बावजूद काम पूरा नहीं हो पाया। स्वास्थ्य विभाग के अवर अभियंता आदित्य धीमान ने बताया कि जिस समय बजट स्वीकृत हुआ था, उसमें मिट्टी का भराव और सोलर लाइट सहित कई अन्य सुविधाओं का जिक्र नहीं था। बाद में काम बढ़ने पर बजट बढ़ गया है।
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तीन बार रुका निर्माण कार्य
विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद मिट्टी का भराव होना था, लेकिन तालाब में जलभराव होने से दो महीने कार्य रुक गया था। इसके बाद कोरोना संक्रमण फैलने के बाद लॉकडाउन लगने से मजदूर चले गए थे, तब तीन महीने निर्माण रुक गया। इसके अलावा दिसंबर और जनवरी महीने में प्रदूषण बढ़ने पर निर्माण पर रोक लगा दी गई थी। इस कारण से निर्माण कार्य पूरा होने में देरी हुई है।
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मरीजों को जाना पड़ता है दिल्ली, बरसात में विशेष परेशानी
अभी तक क्षेत्र में 30 बेड का एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। उस भवन का भी स्तर नीचे होने से बरसात में जलभराव हो जाता है और कई दिन तक इलाज प्रभावित हो जाता है। जो मरीज प्राइवेट में इलाज नहीं करा पाते हैं, वह मजबूरी में दिल्ली जाते हैं, क्योंकि लोनी से गाजियाबाद शहर दूर होने से मरीज के तीमारदार दिल्ली जाना मुनासिब समझते हैं।
मई तक अस्पताल हैंडओवर करने के हैं निर्देश
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि निर्माण इकाई ने जो प्रस्तावित बजट दिया है, उसेे सत्यापन के बाद शासन को भेज दिया गया है। अब शासन स्तर से तय होगा कि कितना बजट स्वीकृत किया। सीएमओ ने बताया कि अभी निर्माण एजेंसी के पास लगभग 50 लाख पुराना बजट उपलब्ध है, उससे कार्य चल रहा है। मई तक अस्पताल भवन का निर्माण कार्य पूरा कर हैंडओवर करने के निर्देश दिए गए हैं।