{"_id":"61f597e10465d5774a521882","slug":"ghaziyabad-ghaziabad-news-gbd23338080","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिनका नहीं था कोई पता, उसकी भर दी फर्जी जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिनका नहीं था कोई पता, उसकी भर दी फर्जी जानकारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिनका नहीं था कोई पता, उसकी भर दी फर्जी जानकारी
गाजियाबाद। आंबेडकर रोड यमनोत्री बिल्डिंग से फर्जी आधार कार्ड बनाने वाला पकड़ा गया गिरोह बिना पते के भी आधार कार्ड बना रहा था। जिनका पता नहीं होता था उनके आवेदन फार्म में फर्जी पता डालते थे। प्रमाण के लिए वे पार्षद और प्रधानाचार्य की फर्जी मुहर का इस्तेमाल करते थे। यूआईडीएआई के सॉफ्टवेयर को गाजियाबाद में असम से एनी डेस्क (रिमोट एप) के जरिये चलाया जा रहा था। इसकी जानकारी गिरोह के सदस्यों से पूछताछ और उनके पास से बरामद डाटा से मिली है।
गिरोह के सदस्य असम की यूआईडीएआई की सुपरवाइजर और ऑपरेटर की आईडी को रिमोट एप व सॉफ्टवेयर के जरिये गाजियाबाद में इस्तेमाल करते थे और इसे लॉगिन करने के लिए उसके रबर के बने अंगूठा निशान और रेटिना के हाई डेफिनेशन फोटो का इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी एक आईडी को रिमोट एप के जरिए एक से ज्यादा जगह संचालित कर रहे थे। आरोपी रोजाना सैकड़ों आधार कार्ड बना रहे थे। गिरोह ने केंद्र पर फर्जी फर्म बनाकर फ्रंटेक सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड का बोर्ड लगा रखा था, जिससे किसी को फर्जी आधार केंद्र के बारे में जानकारी न लग सके। जो व्यक्ति आधार कार्ड बनवाने के बाद अन्य दस्तावेज बनवाने को कहता था, उनके पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र आदि भी बना देते थे। इसे देखते हुए आशंका है कि गिरोह के सदस्यों के तार ऐसे व्यक्ति से जुड़े हैं जो चुनाव के लिए वोटर कार्ड बना रहा है। एसपी सिटी निपुण अग्रवाल का कहना है कि इस संबंध में यूआईडीएआई को सूचना दी गई है। एटीएस व अन्य एजेंसियों को भी जांच के लिए संपर्क किया जाएगा।
150 से 200 रुपये प्रति आधार कार्ड का कमीशन देते थे
पुलिस पूछताछ में आरोपी अंकित गुप्ता ने बताया कि आधार कार्ड बनाने के लिए स्टाफ को कमीशन के आधार पर रखता था। 150 से 200 रुपये एक आधार कार्ड बनाने का कमीशन देता था।
विज्ञापन
गिरोह की मास्टर माइंड मूलरूप से बिजनौर की रहने वाली
पुलिस के मुताबिक गिरोह की मास्टर माइंड जया चौहान मूलरूप से बिजनौर की रहने वाली है। जो हाल में गाजियाबाद में रह रही है। पुलिस ने जया चौहान के घर से भी फिंगर प्रिंट की रबड़, लैपटॉप समेत अन्य सामान बरामद किया है। गिरोह के सदस्यों ने बताया कि जया का सीधा संपर्क असम की कंपनी से था। जिसने इस गिरोह की शुरूआत की। वहीं पुलिस फरार जया चौहान, सैफी, जितेंद्र अग्रवाल समेत दो अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
फर्जी आधार निरस्त होंगे, यूआईडीएआई को दिया डाटा
एसपी सिटी ने बताया कि गिरोह के सदस्यों ने जिन लोगों के फर्जी आधार कार्ड बनाए हैं। उन्हें चिन्हित करने के लिए यूआईडीएआई को सूचना दी गई है। जो डाटा खंगालकर उनके आधार कार्ड निरस्त करने की कार्रवाई करेगी।
विज्ञापन
गाजियाबाद। आंबेडकर रोड यमनोत्री बिल्डिंग से फर्जी आधार कार्ड बनाने वाला पकड़ा गया गिरोह बिना पते के भी आधार कार्ड बना रहा था। जिनका पता नहीं होता था उनके आवेदन फार्म में फर्जी पता डालते थे। प्रमाण के लिए वे पार्षद और प्रधानाचार्य की फर्जी मुहर का इस्तेमाल करते थे। यूआईडीएआई के सॉफ्टवेयर को गाजियाबाद में असम से एनी डेस्क (रिमोट एप) के जरिये चलाया जा रहा था। इसकी जानकारी गिरोह के सदस्यों से पूछताछ और उनके पास से बरामद डाटा से मिली है।
गिरोह के सदस्य असम की यूआईडीएआई की सुपरवाइजर और ऑपरेटर की आईडी को रिमोट एप व सॉफ्टवेयर के जरिये गाजियाबाद में इस्तेमाल करते थे और इसे लॉगिन करने के लिए उसके रबर के बने अंगूठा निशान और रेटिना के हाई डेफिनेशन फोटो का इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी एक आईडी को रिमोट एप के जरिए एक से ज्यादा जगह संचालित कर रहे थे। आरोपी रोजाना सैकड़ों आधार कार्ड बना रहे थे। गिरोह ने केंद्र पर फर्जी फर्म बनाकर फ्रंटेक सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड का बोर्ड लगा रखा था, जिससे किसी को फर्जी आधार केंद्र के बारे में जानकारी न लग सके। जो व्यक्ति आधार कार्ड बनवाने के बाद अन्य दस्तावेज बनवाने को कहता था, उनके पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र आदि भी बना देते थे। इसे देखते हुए आशंका है कि गिरोह के सदस्यों के तार ऐसे व्यक्ति से जुड़े हैं जो चुनाव के लिए वोटर कार्ड बना रहा है। एसपी सिटी निपुण अग्रवाल का कहना है कि इस संबंध में यूआईडीएआई को सूचना दी गई है। एटीएस व अन्य एजेंसियों को भी जांच के लिए संपर्क किया जाएगा।
विज्ञापन
150 से 200 रुपये प्रति आधार कार्ड का कमीशन देते थे
पुलिस पूछताछ में आरोपी अंकित गुप्ता ने बताया कि आधार कार्ड बनाने के लिए स्टाफ को कमीशन के आधार पर रखता था। 150 से 200 रुपये एक आधार कार्ड बनाने का कमीशन देता था।
विज्ञापन
गिरोह की मास्टर माइंड मूलरूप से बिजनौर की रहने वाली
पुलिस के मुताबिक गिरोह की मास्टर माइंड जया चौहान मूलरूप से बिजनौर की रहने वाली है। जो हाल में गाजियाबाद में रह रही है। पुलिस ने जया चौहान के घर से भी फिंगर प्रिंट की रबड़, लैपटॉप समेत अन्य सामान बरामद किया है। गिरोह के सदस्यों ने बताया कि जया का सीधा संपर्क असम की कंपनी से था। जिसने इस गिरोह की शुरूआत की। वहीं पुलिस फरार जया चौहान, सैफी, जितेंद्र अग्रवाल समेत दो अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
फर्जी आधार निरस्त होंगे, यूआईडीएआई को दिया डाटा
एसपी सिटी ने बताया कि गिरोह के सदस्यों ने जिन लोगों के फर्जी आधार कार्ड बनाए हैं। उन्हें चिन्हित करने के लिए यूआईडीएआई को सूचना दी गई है। जो डाटा खंगालकर उनके आधार कार्ड निरस्त करने की कार्रवाई करेगी।