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अब दूध-घी बेचकर कमाई करेंगी महिलाएं
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अब दूध-घी बेचकर कमाई करेंगी महिलाएं
गाजियाबाद। जिले की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अब दूध और घी बेचकर कमाई करेंगी। इसके लिए पीसीडीएफ यानी प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन से करार हुआ है। जिसके तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पराग के सभी दुग्ध उत्पादों को बेचने का काम करेंगी।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और प्रशासन द्वारा विशेष प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। इसके तहत ही योजना के तहत प्रत्येक ब्लाक से एक समूह का चयन किया जाएगा। फिर चयनित समूह को पराग कंपनी की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। सभी विकास खंड अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि इच्छुक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की लिस्ट बनाई जाए। ग्राम पंचायत में उत्कृष्ट काम करने वाली स्वयं सहायता समूह का चयन कर उसकी लिस्ट भेजी जाए। इसके तहत दूध, घी, छाछ सहित जो भी पराग के उत्पाद हैं वह महिलाएं बेची। हर उत्पाद पर एक राशि तय की गई है जो विक्रेता का प्रॉफिट होगा।
जिले में हैं 1500 समूह
जिले में इस समय 1500 के लगभग स्वयं सहायता समूह हैं। इनमें से अधिकतर महिलाएं कपड़े सिलाई का काम, मसालों का काम, नकली आभूषण बनाने के कार्य से लेकर विभिन्न त्योहारों के दौरान कान्हा की पोशाक, राखी आदि बनाती हैं। कुछ महिलाएं मशरूम की खेती करती हैं और मिट्टी के बर्तन बनाने और बिक्री कराने का कार्य करती हैं।
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कोट ---
महिला स्वयं सहायता समूहों को और अधिक आर्थिक संपन्न बनाने के लिए यह योजना लागू की गई है। इसके तहत पराग कंपनी से करार किया गया है। पराग के जो भी उत्पाद होंगे वह स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बेचेंगी। - अस्मिता लाल, सीडीओ
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गाजियाबाद। जिले की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अब दूध और घी बेचकर कमाई करेंगी। इसके लिए पीसीडीएफ यानी प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन से करार हुआ है। जिसके तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पराग के सभी दुग्ध उत्पादों को बेचने का काम करेंगी।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और प्रशासन द्वारा विशेष प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। इसके तहत ही योजना के तहत प्रत्येक ब्लाक से एक समूह का चयन किया जाएगा। फिर चयनित समूह को पराग कंपनी की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। सभी विकास खंड अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि इच्छुक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की लिस्ट बनाई जाए। ग्राम पंचायत में उत्कृष्ट काम करने वाली स्वयं सहायता समूह का चयन कर उसकी लिस्ट भेजी जाए। इसके तहत दूध, घी, छाछ सहित जो भी पराग के उत्पाद हैं वह महिलाएं बेची। हर उत्पाद पर एक राशि तय की गई है जो विक्रेता का प्रॉफिट होगा।
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जिले में हैं 1500 समूह
जिले में इस समय 1500 के लगभग स्वयं सहायता समूह हैं। इनमें से अधिकतर महिलाएं कपड़े सिलाई का काम, मसालों का काम, नकली आभूषण बनाने के कार्य से लेकर विभिन्न त्योहारों के दौरान कान्हा की पोशाक, राखी आदि बनाती हैं। कुछ महिलाएं मशरूम की खेती करती हैं और मिट्टी के बर्तन बनाने और बिक्री कराने का कार्य करती हैं।
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कोट ---
महिला स्वयं सहायता समूहों को और अधिक आर्थिक संपन्न बनाने के लिए यह योजना लागू की गई है। इसके तहत पराग कंपनी से करार किया गया है। पराग के जो भी उत्पाद होंगे वह स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बेचेंगी। - अस्मिता लाल, सीडीओ