फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   ghaziyabad

पांच साल में 21 डॉक्टर छोड़ गए नौकरी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 13 Dec 2021 12:24 AM IST
विज्ञापन
ghaziyabad
पांच साल में 21 डॉक्टर छोड़ गए नौकरी
विज्ञापन

गाजियाबाद। जिले के सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों से पांच साल में 21 डॉक्टर नौकरी छोड़ गए हैं। यह हाल सूबे के स्वास्थ्य राज्य मंत्री के जिले का है। नौकरी छोड़ने की मुख्य वजहों में पोस्टमार्टम ड्यूटी, वीआईपी ड्यूटी, मेडिको लीगल मामलों में कोर्ट में गवाही देने, वैक्सीनेशन में देर रात काम करने और आए दिन अस्पतालों में डॉक्टरों से होने वाला दुर्व्यवहार शामिल है। डॉक्टर सरकारी से प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। दिल, सांस, किडनी के एक भी डॉक्टर नहीं हैं। 65 डॉक्टर और 125 स्टाफ नर्स के पद खाली हैं।
डॉक्टरों की कमी से मरीजों को कर दिया जाता है रेफर
अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी से इलाज के लिए आने वाले गंभीर मरीजों को हायर सेंटर के नाम पर दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। सबसे अधिक परेशानी सीएचसी पर होती है, क्योंकि वहां पर व्यवस्था तीस बेड पर मरीजों को भर्ती करने की होती है, लेकिन डॉक्टरों के दूर रहने से भी मरीजों को रेफर दिया जाता है।
विज्ञापन

तीन बड़े अस्पताल, 121 स्वास्थ्य केंद्र और 116 उप स्वास्थ्य केंद्र
जिले में एमएमजी, संयुक्त और महिला अस्पताल हैं। किसी में भी पर्याप्त स्टाफ नहीं है। चार सीएचसी और एक ब्लॉक स्तरीय पीएचसी के अलावा 50 नगरीय स्वास्थ्य केंद्र और 66 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा 116 उपस्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्राइवेट अस्पताल और क्लीनिक की संख्या बढ़ी
लगातार बढ़ रही जनसंख्या के आगे स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाएं बौनी साबित हो रही हैं। वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट अस्पताल और क्लीनिक की संख्या में हर साल वृद्धि हो रही है। पिछले पांच साल में जिले में 75 अस्पताल और 103 क्लीनिकों की संख्या बढ़ी है। मौजूदा समय में जिले में 350 क्लीनिक और 270 अस्पताल संचालित हैं।
10 हुए सेवानिवृत्त
पांच साल में 21 डॉक्टर बिना बताए नौकरी छोड़कर प्राइवेट अस्पताल ज्वाइन कर चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग की फाइल में लापता दर्ज है। उनके निलंबन या बर्खास्तगी पर अभी तक शासन ने कोई निर्णय नहीं लिया है। इनके अलावा दस डॉक्टर सेवा निवृत्त हो चुके हैं लेकिन इनकी जगह पर कोई दूसरी नियुक्ति नहीं हुई।
डॉक्टरों को प्रैक्टिस करने की सुविधा दें
1974 तक सरकारी डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस करने की सुविधा थी, लेकिन उसके बाद से शासन स्तर से सख्ती शुरू हो गई। डॉक्टर ओपीडी से फ्री होने के बाद मरीजों का इलाज करना चाहते हैं, लेकिन सख्ती के कारण नहीं कर पाते हैं। डिग्री हासिल करने के बाद एक बार लोगों में पहचान बनाने के लिए आते हैं, लेकिन साल -दो साल में नौकरी छोड़कर निजी प्रैक्टिस शुरू कर देते हैं या प्राइवेट अस्पताल में दो गुना वेतन पर ज्वाइन कर लेते हैं।
डॉ. वाईसी गुप्ता, पूर्व सीएमएस एमएमजी अस्पताल
डॉक्टरों को ट्रांसफर का डर दिखाने के बजाए सुरक्षा की व्यवस्था करें
डॉक्टरों को मनचाही पोस्टिंग दें तो वह मन से काम करेंगे। उन्हें ट्रांसफर का डर दिखाने के बजाए अस्पताल में सुविधाएं दें। इमरजेंसी में हर तीसरा तीमारदार सिर्फ धमकाता ही नहीं बल्कि मारपीट भी करता है। ऐसे में कई डॉक्टर डर से नौकरी छोड़ जाते हैं। मेरे कार्यकाल में भी कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी थीं, किसी तरह से मामले को कंट्रोल किया जाता था। दूसरे दिन जांच में डॉक्टर की की गलती निकाली जाती है।
डॉ. अतर सिंह यादव, पूर्व सीएमएस संयुक्त अस्पताल
बाबूगिरी नहीं इलाज के लिए किया था ज्वाइन
तीन महीने पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर नौकरी ज्वाइन किया था। इन दिनों में मैंने एक भी मरीज नहीं देखा, लेकिन बाबूगिरी रविवार के दिन भी करनी पड़ती थी, क्योंकि टीकाकरण में पूरा डेटा का मिलान और सुबह शाम सिर्फ मीटिंग। यह काम डॉक्टरों का नहीं होता, बल्कि लिपिकों का होता है।

डॉ. चंचल
जिले में जो डॉक्टरों के पद रिक्त हैं, उनके स्थान पर संविदा के डॉक्टरों की नियुक्ति हुई है। कुछ विशेषज्ञाें के पद रिक्त हैं उनकी नियुक्ति के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
डॉ. भवतोष शंखधार, सीएमओ
------
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed