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करंट बना काल... तीन मिनट में ले ली पांच की जान
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करंट बना काल ... तीन मिनट में ले ली पांच की जान
गाजियाबाद। राकेश नगर मार्ग में बारिश से दुकान में उतरे करंट से पांच जिंदगियां तीन मिनट के भीतर ही काल के गाल में समा गईं। सबसे पहले दो बच्चियों सिमरन और सुरभि मौत के आगोश में आईं। ये दोनों सामान खरीदने के लिए आई थीं। टिन शेड के पाइप में बारिश से करंट उतरा हुआ था। सिमरन ने पाइप को छुआ ही था कि चीख भी नहीं निकली और सांसों की डोर टूट गई। सुरभि ने उसकी गोद में दम तोड़ दिया।
इसी बीच इन्हें बचाने के लिए पड़ोसी युवक लक्ष्मी नारायण अंजाम की परवाह किए बगैर बिजली की फुर्ती से दौड़ा, लेकिन बच्चियों को छूते ही उतनी ही तेजी से उसे करंट के झटका लगा और प्राण पखेरू उड़ गए। उसकी तरह ही सुरभि की मां जानकी जान पर खेल गई पर न बच्चियों बच सकीं और न उसकी जान।
मौत का डरावना मंजर देख पास खड़ी खुशी डर के मारे दौड़ी तो अपनी जान बचाने के लिए थी, लेकिन हड़बड़ाहट में होश ओ हवाश धोखा दे गए, दिशा भटकने से उसके कदम खुद ब खुद वहीं पहुंच गए जहां पाइप के जरिए करंट उतरने से पानी में मौत बाहें फैलाई खड़ी थी। पांच जिंदगियां खत्म हो जाने पर बिजली की लाइन बंद कराई गई। तब जाकर पांचों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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गाजियाबाद। राकेश नगर मार्ग में बारिश से दुकान में उतरे करंट से पांच जिंदगियां तीन मिनट के भीतर ही काल के गाल में समा गईं। सबसे पहले दो बच्चियों सिमरन और सुरभि मौत के आगोश में आईं। ये दोनों सामान खरीदने के लिए आई थीं। टिन शेड के पाइप में बारिश से करंट उतरा हुआ था। सिमरन ने पाइप को छुआ ही था कि चीख भी नहीं निकली और सांसों की डोर टूट गई। सुरभि ने उसकी गोद में दम तोड़ दिया।
इसी बीच इन्हें बचाने के लिए पड़ोसी युवक लक्ष्मी नारायण अंजाम की परवाह किए बगैर बिजली की फुर्ती से दौड़ा, लेकिन बच्चियों को छूते ही उतनी ही तेजी से उसे करंट के झटका लगा और प्राण पखेरू उड़ गए। उसकी तरह ही सुरभि की मां जानकी जान पर खेल गई पर न बच्चियों बच सकीं और न उसकी जान।
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मौत का डरावना मंजर देख पास खड़ी खुशी डर के मारे दौड़ी तो अपनी जान बचाने के लिए थी, लेकिन हड़बड़ाहट में होश ओ हवाश धोखा दे गए, दिशा भटकने से उसके कदम खुद ब खुद वहीं पहुंच गए जहां पाइप के जरिए करंट उतरने से पानी में मौत बाहें फैलाई खड़ी थी। पांच जिंदगियां खत्म हो जाने पर बिजली की लाइन बंद कराई गई। तब जाकर पांचों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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