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पार्षद के बेटों ने चौराहे से उखाड़े डॉ. कुंवर बेचैन के नाम के बोर्ड
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पार्षद के बेटों ने चौराहे से उखाड़े डॉ. कुंवर बेचैन के नाम के बोर्ड
गाजियाबाद। देश-विदेशों तक ख्याति प्राप्त कर चुके कवि डॉ. कुंवर बेचैन के नाम पर नगर निगम ने कालका गढ़ी चौराहे और चौक से नेहरू नगर तक के मार्ग का नामकरण कराया तो स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया। लोगों के विरोध पर कांग्रेस के क्षेत्रीय पार्षद सत्यप्रकाश सत्तो के बेटे राहुल जाटव ने मौके पर पहुंच बोर्ड उखड़वा दिए। उन्होंने इन बोर्ड को अपने पास रखवा लिया। मामले को लेकर एक घंटे तक विवाद चलता रहा। इससे महापौर नाराज हो गई। उन्होंने पार्षद को फोन कर प्रकरण पर आपत्ति जताई। उनके समझाने पर उन्होंने मार्ग का नामकरण तो हो जाने दिया, लेकिन चौराहे पर बोर्ड नहीं लगने दिए।
कवि डॉ. कुंवर बेचैन ने साहित्य जगत में देश ही नहीं विदेशों में भी गाजियाबाद का नाम रोशन किया है। वह एमएमएच महाविद्यालय में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष भी रहे हैं। अप्रैल में कोरोना संक्रमण से उनका निधन हो गया था। साहित्यकारों के प्रस्ताव पर नगर निगम ने डॉ. बेचैन की स्मृति में कालका गढ़ी चौराहे का नाम और कालका गढ़ी चौक से होली चाइल्ड चौराहे तक मार्ग का नामकरण उनके नाम पर करने का फैसला किया है। बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे नगर निगम की टीम कालका गढ़ी चौराहे पर महाकवि डॉ. कुंवर बेचैन मार्ग और चौराहे के नाम से बनाए गए बोर्ड लगाने पहुंचे। इसकी सूचना स्थानीय लोगों और क्षेत्रीय पार्षद सत्यप्रकाश सत्तो के बेटों को लगी। उन्होंने मौके पर जाकर बोर्ड लगाने का काम रुकवा दिया। चौराहे पर लगाए जाने वाले बोर्ड निगम की टीम से लेकर अपने पास रख लिए। इसके बाद नगर निगम की टीम मार्ग के नामकरण के बोर्ड लगाने लगे तो कांग्रेस पार्षद के बेटों ने फिर मौके पर पहुंच बोर्ड हटवा दिए। लोगों के विरोध को देख निगम के कर्मचारी बैकफुट पर आ गए और बोर्ड हटाने पड़े। इसके बाद चीफ इंजीनियर मोइनुद्दीन खान मौके पर पहुंचे और विरोध कर रहे लोगों व पार्षद के बेटों को समझाया। महापौर आशा शर्मा ने भी पार्षद सत्यप्रकाश सत्तो से फोन पर बात की। इसके बाद उन्होंने मार्ग के नामकरण के बोर्ड तो लगने दिए, लेकिन चौराहे पर बोर्ड नहीं लगने दिए। अब मामले में बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय पार्षद अधिकारियों के साथ मीटिंग करेंगे।
धार्मिक भावनाओं की वजह से चौराहे का नाम बदलने का किया विरोध
पार्षद के बेटे राहुल जाटव का कहना है कि कालका गढ़ी चौराहे से मां कालका का नाम जुड़ा है। इस कारण चौराहे का नाम नहीं बदलने देंगे। स्थानीय लोगों के विरोध की सूचना पर वह मौके पर पहुंचे थे और बोर्ड लगाने का काम रुकवाया था। उनका कहना है कि या तो किसी अन्य चौराहे का नाम डॉ. कुंवर बेचैन के नाम पर रख लें या कालका गढ़ी के साथ उनका नाम भी जोड़कर चौराहे का नामकरण कर ले। लोगों को कालका गढ़ी का नाम हटाने पर एतराज है।
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बैठक कर निर्णय लेंगे
डॉ. कुंवर बेचैन किसी एक वर्ग, राजनीतिक दल के लिए नहीं सभी दलों के लिए सम्माननीय है। उनके नाम पर मार्ग और चौराहे का नामकरण कराया जा रहा था, लेकिन पार्षद और उनके बेटों ने रुकवा दिया। बाद में मार्ग पर बोर्ड लगा दिए गए। किसी को सरकारी काम में बाधा डालने का अधिकार नहीं है। अधिकारियों को तत्काल मौके पर भेजा गया था। चौराहे के नामकरण पर बृहस्पतिवार को बैठक कर निर्णय लिया जाएगा।
- आशा शर्मा, मेयर
कुछ लोग कर रह हैं विरोध
चौराहे के नामकरण को लेकर कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। कालका गढ़ी- नेहरू नगर मार्ग से हटाए गए बोर्ड दोबारा लगवा दिए गए हैं। चौराहे के नामकरण के बोर्ड लगाने का काम फिलहाल रोक दिया गया है। बृहस्पतिवार को इस पर वार्ता के बाद निर्णय लिया जाएगा।
मोइनुद्दीन खान, चीफ इंजीनियर, नगर निगम
अभी निगम में प्रस्ताव पास नहीं है
कालका गढ़ी चौराहे का यह नाम मेरी पैदाइश से भी पहले का है। इससे क्षेत्र की पहचान है। डॉ. कुंवर बेचैन के नाम पर किसी ऐसे दूसरे चौराहे का नामकरण हो सकता है, जिसका नामकरण अभी तक न हुआ हो। अभी चौराहे के नामकरण के संबंध में नगर निगम में प्रस्ताव भी पास नहीं हुआ है। कालका गढ़ी चौक का नाम परिवर्तित नहीं होने देंगे।
- सत्यप्रकाश सत्तो, क्षेत्रीय पार्षद व कांग्रेस पार्षद दल के नेता
विरोध निंदनीय है
डॉ. कुंवर एक बड़े साहित्यकार थे और उनका किसी राजनीति दल से ताल्लुक नहीं था। कवि संपूर्ण समाज का होता है। उन्होंने 55 साल तक शिक्षा और साहित्य की सेवा की है। उन्होंने गाजियाबाद का नाम देशविदेश में रोशन किया है। एक सुंदर व्यक्तित्व का विरोध निंदनीय है।
- बिजेंद्र परवाज, साहित्यकार
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गाजियाबाद। देश-विदेशों तक ख्याति प्राप्त कर चुके कवि डॉ. कुंवर बेचैन के नाम पर नगर निगम ने कालका गढ़ी चौराहे और चौक से नेहरू नगर तक के मार्ग का नामकरण कराया तो स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया। लोगों के विरोध पर कांग्रेस के क्षेत्रीय पार्षद सत्यप्रकाश सत्तो के बेटे राहुल जाटव ने मौके पर पहुंच बोर्ड उखड़वा दिए। उन्होंने इन बोर्ड को अपने पास रखवा लिया। मामले को लेकर एक घंटे तक विवाद चलता रहा। इससे महापौर नाराज हो गई। उन्होंने पार्षद को फोन कर प्रकरण पर आपत्ति जताई। उनके समझाने पर उन्होंने मार्ग का नामकरण तो हो जाने दिया, लेकिन चौराहे पर बोर्ड नहीं लगने दिए।
कवि डॉ. कुंवर बेचैन ने साहित्य जगत में देश ही नहीं विदेशों में भी गाजियाबाद का नाम रोशन किया है। वह एमएमएच महाविद्यालय में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष भी रहे हैं। अप्रैल में कोरोना संक्रमण से उनका निधन हो गया था। साहित्यकारों के प्रस्ताव पर नगर निगम ने डॉ. बेचैन की स्मृति में कालका गढ़ी चौराहे का नाम और कालका गढ़ी चौक से होली चाइल्ड चौराहे तक मार्ग का नामकरण उनके नाम पर करने का फैसला किया है। बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे नगर निगम की टीम कालका गढ़ी चौराहे पर महाकवि डॉ. कुंवर बेचैन मार्ग और चौराहे के नाम से बनाए गए बोर्ड लगाने पहुंचे। इसकी सूचना स्थानीय लोगों और क्षेत्रीय पार्षद सत्यप्रकाश सत्तो के बेटों को लगी। उन्होंने मौके पर जाकर बोर्ड लगाने का काम रुकवा दिया। चौराहे पर लगाए जाने वाले बोर्ड निगम की टीम से लेकर अपने पास रख लिए। इसके बाद नगर निगम की टीम मार्ग के नामकरण के बोर्ड लगाने लगे तो कांग्रेस पार्षद के बेटों ने फिर मौके पर पहुंच बोर्ड हटवा दिए। लोगों के विरोध को देख निगम के कर्मचारी बैकफुट पर आ गए और बोर्ड हटाने पड़े। इसके बाद चीफ इंजीनियर मोइनुद्दीन खान मौके पर पहुंचे और विरोध कर रहे लोगों व पार्षद के बेटों को समझाया। महापौर आशा शर्मा ने भी पार्षद सत्यप्रकाश सत्तो से फोन पर बात की। इसके बाद उन्होंने मार्ग के नामकरण के बोर्ड तो लगने दिए, लेकिन चौराहे पर बोर्ड नहीं लगने दिए। अब मामले में बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय पार्षद अधिकारियों के साथ मीटिंग करेंगे।
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धार्मिक भावनाओं की वजह से चौराहे का नाम बदलने का किया विरोध
पार्षद के बेटे राहुल जाटव का कहना है कि कालका गढ़ी चौराहे से मां कालका का नाम जुड़ा है। इस कारण चौराहे का नाम नहीं बदलने देंगे। स्थानीय लोगों के विरोध की सूचना पर वह मौके पर पहुंचे थे और बोर्ड लगाने का काम रुकवाया था। उनका कहना है कि या तो किसी अन्य चौराहे का नाम डॉ. कुंवर बेचैन के नाम पर रख लें या कालका गढ़ी के साथ उनका नाम भी जोड़कर चौराहे का नामकरण कर ले। लोगों को कालका गढ़ी का नाम हटाने पर एतराज है।
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बैठक कर निर्णय लेंगे
डॉ. कुंवर बेचैन किसी एक वर्ग, राजनीतिक दल के लिए नहीं सभी दलों के लिए सम्माननीय है। उनके नाम पर मार्ग और चौराहे का नामकरण कराया जा रहा था, लेकिन पार्षद और उनके बेटों ने रुकवा दिया। बाद में मार्ग पर बोर्ड लगा दिए गए। किसी को सरकारी काम में बाधा डालने का अधिकार नहीं है। अधिकारियों को तत्काल मौके पर भेजा गया था। चौराहे के नामकरण पर बृहस्पतिवार को बैठक कर निर्णय लिया जाएगा।
- आशा शर्मा, मेयर
कुछ लोग कर रह हैं विरोध
चौराहे के नामकरण को लेकर कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। कालका गढ़ी- नेहरू नगर मार्ग से हटाए गए बोर्ड दोबारा लगवा दिए गए हैं। चौराहे के नामकरण के बोर्ड लगाने का काम फिलहाल रोक दिया गया है। बृहस्पतिवार को इस पर वार्ता के बाद निर्णय लिया जाएगा।
मोइनुद्दीन खान, चीफ इंजीनियर, नगर निगम
अभी निगम में प्रस्ताव पास नहीं है
कालका गढ़ी चौराहे का यह नाम मेरी पैदाइश से भी पहले का है। इससे क्षेत्र की पहचान है। डॉ. कुंवर बेचैन के नाम पर किसी ऐसे दूसरे चौराहे का नामकरण हो सकता है, जिसका नामकरण अभी तक न हुआ हो। अभी चौराहे के नामकरण के संबंध में नगर निगम में प्रस्ताव भी पास नहीं हुआ है। कालका गढ़ी चौक का नाम परिवर्तित नहीं होने देंगे।
- सत्यप्रकाश सत्तो, क्षेत्रीय पार्षद व कांग्रेस पार्षद दल के नेता
विरोध निंदनीय है
डॉ. कुंवर एक बड़े साहित्यकार थे और उनका किसी राजनीति दल से ताल्लुक नहीं था। कवि संपूर्ण समाज का होता है। उन्होंने 55 साल तक शिक्षा और साहित्य की सेवा की है। उन्होंने गाजियाबाद का नाम देशविदेश में रोशन किया है। एक सुंदर व्यक्तित्व का विरोध निंदनीय है।
- बिजेंद्र परवाज, साहित्यकार