फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   ghaziyabad

हम महिला हैं और पुलिस भी...हर वक्त दोहरी जिम्मेदारी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 07 Mar 2021 01:22 AM IST
विज्ञापन
ghaziyabad
हम महिला हैं और पुलिस भी....हर वक्त दोहरी जिम्मेदारी
विज्ञापन

गाजियाबाद। एक तरफ परिवार की परवरिश और दूसरी तरफ खाकी की जिम्मेदारी। दोनों ही काम अपने आप में चुनौती भरे हैं। एक जिम्मेदारी में जरा सी ढील हुई नहीं कि पर्सनल और प्रोफेशनल जिंदगी में दिक्कत आना तय है, लेकिन गाजियाबाद में तमाम ऐसी पुलिस अधिकारी और कर्मचारी हैं, जो दोनों ही जिम्मेदारियों को बखूबी अंजाम दे रही हैं। महिला के रूप में दो बच्चों की देखभाल और डिप्टी एसपी के तौर पर तीन-तीन अहम जिम्मेदारी निभाई जा रही हैं तो वहीं, दूसरी ओर अपने परिवार को दूसरे नंबर पर रखकर महिला दरोगा परिवारों को उजड़ने से बचा रही हैं।
पुलिस की नौकरी को बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। न सोने का वक्त और न खाने का टाइम टेबल। पता नहीं कब कहां ड्यूटी लगा दी जाए। मसला महिला विरुद्ध अपराध की रोकथाम का हो या कानून-व्यवस्था बरकरार रखने की चुनौती। जिले में तैनात कुछ महिला पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इसे शिद्दत से निभा रही हैं। सीएए-एनआरसी के दंगों की बात हो या लॉकडाउन के दौरान प्रवासियों को गंतव्यों तक पहुंचाने का कार्य या फिर तीन माह से भी अधिक समय से यूपी गेट पर चल रहे किसान आंदोलन में ड्यूटी। महिला पुलिसकर्मी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने कर्तव्य का पालन कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में हम ऐसी ही कुछ महिला पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों से आपको रूबरू कराने जा रहे हैं।
विज्ञापन

डीएसपी आलोक दुबे : अफसर पति, दो बच्चे और खुद पर तिहरी जिम्मेदारी
मूलरूप से सुल्तानपुर की रहने वाली आलोक दुबे 2007 बैच की पीपीएस अधिकारी हैं। पति भी दिल्ली पुलिस में अधिकारी हैं और परिवार में दो बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी भी है। इस सबके बीच आलोक दुबे खुद गाजियाबाद में तिहरी जिम्मेदारी निभा रही हैं। सीओ क्राइम के पद पर तैनात आलोक दुबे सीओ साहिबाबाद के साथ-साथ महिला विरुद्ध अपराध के मामलों की भी नोडल अधिकारी हैं। आलोक दुबे का कहना है कि ऐसा कम ही होता है जब पति और उन्हें एक साथ छुट्टी मिल सके, लेकिन आपस में तालमेल बैठाकर निजी जिंदगी और नौकरी की जिम्मेदारी बेहतर ढंग से निभाने की कोशिश रहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

एसआई प्रीति सिंह : सिपाही से शिक्षिका और अब पहली बार चौकी इंचार्ज
मूलरूप से शामली निवासी एसआई प्रीति सिंह के माता-पिता उन्हें शिक्षक बनाना चाहते थे, जिसके लिए उन्हें बीएड भी कराया गया, लेकिन प्रीति ने खाकी पहनने का सपना देख रखा था। 2015 में यह सपना पूरा भी हो गया और यूपी पुलिस में सिपाही के पद पर चयन हो गया। एक साल ट्रेनिंग के दौरान प्रीति सिंह का चयन सरकारी अध्यापक के पद पर हो गया। शिक्षक बनने के बाद पुलिस में उपनिरीक्षक में चयन हो गया। प्रीति सिंह का कहना है कि लोगों की सेवा और उनकी मदद के लिए पुलिस से अच्छा जरिया कुछ नहीं हो सकता। हाल में पहली बार राजनगर सेक्टर-3 चौकी इंचार्ज बनने वाली प्रीति सिंह का कहना है कि पहली बार चौकी का प्रभार उनके लिए चुनौती है। घरवालों से बात हुए भी कई-कई दिन हो जाते हैं, लेकिन परिवार केलोग भी उनकी स्थिति को देखते हुए पूरा सहयोग करते हैं।

एसआई बबीता रानी : खुद के परिवार को दूसरे नंबर पर रख औरों के परिवार बसा रहीं
करीब 13 साल पहले पति का देहांत होने के बाद अमरोहा निवासी बबीता रानी मृतक आश्रित कोटे से पुलिस में भर्ती हुईं। परिवार में एक बेटी और दो बेटों की जिम्मेदारी और दूसरी तरफ पुलिस की चुनौती भरी नौकरी। पति की जगह नौकरी मिली तो उसे शिद्दत से निभाने का फैसला किया। अगस्त 2020 से महिला प्रकोष्ठ की प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहीं बबीता रानी दुष्कर्म पीड़िताओं को सरकारी मदद दिलाने में अहम भूमिका निभाती हैं। इससे भी ज्यादा अहम जिम्मेदारी दंपती के बीच विवाद होने पर काउंसलर की है। अपने परिवार को दूसरे नंबर पर रखकर बबीता रानी 50000 से अधिक परिवारों को उजड़ने से बचा चुकी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed