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संक्रमित महिला की लापरवाही से मां-बाप व बेटे को कोरोना
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संक्रमित महिला की लापरवाही से मां-बाप व बेटे को कोरोना
गाजियाबाद। बंगलूरू से गाजियाबाद लौटी महिला की लापरवाही से परिवार के तीन सदस्य कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए। इसमें महिला का सात वर्षीय बेटा भी है। महिला को अब कोई लक्षण नहीं है, जबकि उसके बेटे व माता-पिता में हल्के लक्षण हैं। सभी होम आइसोलेशन में हैं। स्वास्थ्य विभाग ने चारों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग जांच के लिए भेजे हैं। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि महिला और उसके मां-बाप का टीकाकरण हो चुका था, इस कारण से किसी में गंभीर लक्षण नहीं पाए गए हैं।
सितंबर में कोरोना संक्रमण के अब तक 13 मरीज मिल चुके हैं। इनमें एक मरीज केरल, दो त्रिपुरा और एक मरीज बंगलूरू से आया था। आठ लोग इनके संपर्क में आने से संक्रमित हुए। इसके अलावा एक मरीज की कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं थी। वह शहर में एक निजी अस्पताल के संचालक है।
कंपनी की तरफ से बंगलूरू गई थी महिला
डीएसओ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि इंदिरापुरम की सोसायटी में 43 वर्षीय महिला अपने माता-पिता और 7 साल के बेटे के साथ रहती है। दिल्ली की निजी कंपनी में कार्यरत है। कंपनी ने महिला को पांच सितंबर को बंगलूरू (कर्नाटक) भेजा था। वह सात सितंबर को लौटकर आई। महिला को 11 सितंबर को लक्षण उभरे थे, जिसके बाद सीटी स्कैन कराया। रिपोर्ट में फेफड़े में संक्रमण पाया। इसके बाद संक्रमण का इलाज करा लिया। आराम मिलने के एक सप्ताह बाद प्राइवेट लैब में कोरोना की जांच कराई। रिपोर्ट पॉजिटिव आई, इसके बाद महिला के अपने बेटे और मां-बाप की जांच कराई तो सभी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
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संक्रमित होने पर भी जाती रही ऑफिस
महिला में बहुत हल्के लक्षण थे, जिसके चलते वह प्रतिदिन कार्यालय जाती थी। इससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी तनाव में हैं कि वह कितने लोगों के संपर्क में आई होगी। एहतियात बरतते हुए विभाग ने दिल्ली स्वास्थ्य विभाग को सूचना भेज दी है, जिससे महिला के कार्यालय में काम करने वाले लोगों की जांच हो सके। साथ ही विभाग महिला के माता-पिता और बच्चे के संपर्क में आने वाले लोगों को तलाश रहा है। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि बिना लक्षण वाले मरीजों से दूसरों में कोरोना संक्रमण नहीं फैलता है।
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गाजियाबाद। बंगलूरू से गाजियाबाद लौटी महिला की लापरवाही से परिवार के तीन सदस्य कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए। इसमें महिला का सात वर्षीय बेटा भी है। महिला को अब कोई लक्षण नहीं है, जबकि उसके बेटे व माता-पिता में हल्के लक्षण हैं। सभी होम आइसोलेशन में हैं। स्वास्थ्य विभाग ने चारों के सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग जांच के लिए भेजे हैं। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि महिला और उसके मां-बाप का टीकाकरण हो चुका था, इस कारण से किसी में गंभीर लक्षण नहीं पाए गए हैं।
सितंबर में कोरोना संक्रमण के अब तक 13 मरीज मिल चुके हैं। इनमें एक मरीज केरल, दो त्रिपुरा और एक मरीज बंगलूरू से आया था। आठ लोग इनके संपर्क में आने से संक्रमित हुए। इसके अलावा एक मरीज की कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं थी। वह शहर में एक निजी अस्पताल के संचालक है।
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कंपनी की तरफ से बंगलूरू गई थी महिला
डीएसओ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि इंदिरापुरम की सोसायटी में 43 वर्षीय महिला अपने माता-पिता और 7 साल के बेटे के साथ रहती है। दिल्ली की निजी कंपनी में कार्यरत है। कंपनी ने महिला को पांच सितंबर को बंगलूरू (कर्नाटक) भेजा था। वह सात सितंबर को लौटकर आई। महिला को 11 सितंबर को लक्षण उभरे थे, जिसके बाद सीटी स्कैन कराया। रिपोर्ट में फेफड़े में संक्रमण पाया। इसके बाद संक्रमण का इलाज करा लिया। आराम मिलने के एक सप्ताह बाद प्राइवेट लैब में कोरोना की जांच कराई। रिपोर्ट पॉजिटिव आई, इसके बाद महिला के अपने बेटे और मां-बाप की जांच कराई तो सभी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
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संक्रमित होने पर भी जाती रही ऑफिस
महिला में बहुत हल्के लक्षण थे, जिसके चलते वह प्रतिदिन कार्यालय जाती थी। इससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी तनाव में हैं कि वह कितने लोगों के संपर्क में आई होगी। एहतियात बरतते हुए विभाग ने दिल्ली स्वास्थ्य विभाग को सूचना भेज दी है, जिससे महिला के कार्यालय में काम करने वाले लोगों की जांच हो सके। साथ ही विभाग महिला के माता-पिता और बच्चे के संपर्क में आने वाले लोगों को तलाश रहा है। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि बिना लक्षण वाले मरीजों से दूसरों में कोरोना संक्रमण नहीं फैलता है।