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खोड़ा, भोवापुर, शहीदनगर, पसौंडा, कैला भट्ठा में कम हो रहा संक्रमण
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खोड़ा, भोवापुर, शहीदनगर, पसौंडा, कैला भट्ठा में कम रहा संक्रमण
गाजियाबाद। कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण का प्रभाव पॉश इलाकों के मुकाबले पिछड़े क्षेत्रों में कम रहा। शहीद नगर, पसौंडा, भोवापुर, कैला भट्ठा, खोड़ा में संक्रमण सबसे कम रहा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार पिछड़े क्षेत्रों में लोगों ने एहतियात अधिक बरती, जबक पॉश इलाकों में रहने वाले लोगों के मूवमेंट और लापरवाही की वजह से संक्रमण फैलने में मदद मिली।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि पिछली साल जिन क्षेत्रों में शुरुआती दौर में ही लोग संक्रमण की चपेट में आ गए थे, उन क्षेत्रों में जाने-अंजाने अन्य लोग भी संक्रमित हुए थे। इस कारण से दूसरी लहर में लोग कम संक्रमित हुए क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ चुकी थी। पॉश कॉलोनियों में दूसरी लहर में संक्रमण बढ़ना शुरू हुआ तो वहां पर दो परेशानी आई थी, पहला सर्विलांस टीम का क्षेत्र के लोगों ने सहयोग नहीं किया, दूसरा संक्रमण की चपेट में आने पर लोगों ने सबकी जांच नहीं कराई। यही कारण था कि कई-कई घर ऐसे थे कि पूरा संक्रमण की चपेट में आ गया तब जांच कराने के लिए लोग बाहर निकले। जबक घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों ने जांच टीम का सहयोग किया और संक्रमण फैलने के डर से जांच भी खूब कराई।
यहां बढ़ा था संक्रमण
शहर के चार क्षेत्रों में मार्च में तेजी से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े थे। राजनगर, साहिबाबाद और शास्त्रीनगर क्षेत्र में कोरोना के अधिक मामले सामने आए थे, जबकि इंदिरापुरम, वसुंधरा और वैशाली पीछे हो गया था। इसके बाद अप्रैल महीने में इन क्षेत्रों में कोरोना की रोकथाम के लिए कोविड कंट्रोल रूम के माध्यम से योजना तैयार की गई तो संक्रमितों की संख्या कम हो गई थी। है। इन क्षेत्रों में सर्वे और टेस्टिंग को भी बढ़ा दिया गया था।
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सबसे अधिक मौत राजनगर क्षेत्र में हुई
स्वास्थ्य विभाग के सर्वे के अनुसार राजनगर क्षेत्र में मौत का आंकड़ा 2.4 फीसदी हो गया था। इसका सबसे कारण यह है कि पॉश इलाकों में अधिकांश सेवानिवृत बुजुर्ग रहते हैं, क्योंकि उनके बच्चे या तो विदेश में नौकरी कर रहे होते हैं और बड़े व्यवसाय के लिए बाहर रहते हैं। ऐसे में बुजुर्ग ही घर में बचते हैं। वहीं घनी आबादी या पिछड़े क्षेत्रों में बाहर से आकर नौकरी पेशा वाले होते हैं तो उनके मां-बाप गांव में ही रहते हैं, जबकि पत्नी और बच्चे साथ रहते हैं। शारीरिक श्रम करने वालों की प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक होती है, इसलिए अगर संक्रमित भी होते हैं तो वह जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं।
निगरानी समितियों की निगरानी से संक्रमण रोकने में मिली मदद
पिछले साल कोरोना के जब बड़ी संख्या में मामले सामने आ रहे थे, तब जिले में 400 निगरानी समितियों का गठन किया गया था। शहरी क्षेत्र में मोहल्ला समिति और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम समितियों का गठन किया गया था। इन समितियों का कार्य अपने-अपने क्षेत्रों से संक्रमितों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को देना था। अधिकारियों का कहना है कि इन समितियों की मदद से दोबारा संक्रमण पर काबू पाया गया था।
डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
शहीद नगर, पसौंडा, भोवापुर, कैला भट्ठा, खोड़ा
दूसरी लहर में सबसे कम संक्रमित पांच क्षेत्र
क्षेत्र - संक्रमित - मौत
शहीद नगर - 33 - 00
पसौंडा - 89 - 01
भोवापुर - 124 - 04
कैला भट्ठा - 201 - 03
खोड़ा - 221 - 09
सबसे अधिक संक्रमित पांच क्षेत्र
करहैड़ा द्वितीय - 3318 - 34
कार्टे - 2333 - 65
राजनगर - 1956 - 85
साहिबाबाद द्वितीय - 1751 - 44
मोदीनगर 1462 - 12
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गाजियाबाद। कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण का प्रभाव पॉश इलाकों के मुकाबले पिछड़े क्षेत्रों में कम रहा। शहीद नगर, पसौंडा, भोवापुर, कैला भट्ठा, खोड़ा में संक्रमण सबसे कम रहा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार पिछड़े क्षेत्रों में लोगों ने एहतियात अधिक बरती, जबक पॉश इलाकों में रहने वाले लोगों के मूवमेंट और लापरवाही की वजह से संक्रमण फैलने में मदद मिली।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि पिछली साल जिन क्षेत्रों में शुरुआती दौर में ही लोग संक्रमण की चपेट में आ गए थे, उन क्षेत्रों में जाने-अंजाने अन्य लोग भी संक्रमित हुए थे। इस कारण से दूसरी लहर में लोग कम संक्रमित हुए क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ चुकी थी। पॉश कॉलोनियों में दूसरी लहर में संक्रमण बढ़ना शुरू हुआ तो वहां पर दो परेशानी आई थी, पहला सर्विलांस टीम का क्षेत्र के लोगों ने सहयोग नहीं किया, दूसरा संक्रमण की चपेट में आने पर लोगों ने सबकी जांच नहीं कराई। यही कारण था कि कई-कई घर ऐसे थे कि पूरा संक्रमण की चपेट में आ गया तब जांच कराने के लिए लोग बाहर निकले। जबक घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों ने जांच टीम का सहयोग किया और संक्रमण फैलने के डर से जांच भी खूब कराई।
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यहां बढ़ा था संक्रमण
शहर के चार क्षेत्रों में मार्च में तेजी से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े थे। राजनगर, साहिबाबाद और शास्त्रीनगर क्षेत्र में कोरोना के अधिक मामले सामने आए थे, जबकि इंदिरापुरम, वसुंधरा और वैशाली पीछे हो गया था। इसके बाद अप्रैल महीने में इन क्षेत्रों में कोरोना की रोकथाम के लिए कोविड कंट्रोल रूम के माध्यम से योजना तैयार की गई तो संक्रमितों की संख्या कम हो गई थी। है। इन क्षेत्रों में सर्वे और टेस्टिंग को भी बढ़ा दिया गया था।
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सबसे अधिक मौत राजनगर क्षेत्र में हुई
स्वास्थ्य विभाग के सर्वे के अनुसार राजनगर क्षेत्र में मौत का आंकड़ा 2.4 फीसदी हो गया था। इसका सबसे कारण यह है कि पॉश इलाकों में अधिकांश सेवानिवृत बुजुर्ग रहते हैं, क्योंकि उनके बच्चे या तो विदेश में नौकरी कर रहे होते हैं और बड़े व्यवसाय के लिए बाहर रहते हैं। ऐसे में बुजुर्ग ही घर में बचते हैं। वहीं घनी आबादी या पिछड़े क्षेत्रों में बाहर से आकर नौकरी पेशा वाले होते हैं तो उनके मां-बाप गांव में ही रहते हैं, जबकि पत्नी और बच्चे साथ रहते हैं। शारीरिक श्रम करने वालों की प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक होती है, इसलिए अगर संक्रमित भी होते हैं तो वह जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं।
निगरानी समितियों की निगरानी से संक्रमण रोकने में मिली मदद
पिछले साल कोरोना के जब बड़ी संख्या में मामले सामने आ रहे थे, तब जिले में 400 निगरानी समितियों का गठन किया गया था। शहरी क्षेत्र में मोहल्ला समिति और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम समितियों का गठन किया गया था। इन समितियों का कार्य अपने-अपने क्षेत्रों से संक्रमितों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को देना था। अधिकारियों का कहना है कि इन समितियों की मदद से दोबारा संक्रमण पर काबू पाया गया था।
डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
शहीद नगर, पसौंडा, भोवापुर, कैला भट्ठा, खोड़ा
दूसरी लहर में सबसे कम संक्रमित पांच क्षेत्र
क्षेत्र - संक्रमित - मौत
शहीद नगर - 33 - 00
पसौंडा - 89 - 01
भोवापुर - 124 - 04
कैला भट्ठा - 201 - 03
खोड़ा - 221 - 09
सबसे अधिक संक्रमित पांच क्षेत्र
करहैड़ा द्वितीय - 3318 - 34
कार्टे - 2333 - 65
राजनगर - 1956 - 85
साहिबाबाद द्वितीय - 1751 - 44
मोदीनगर 1462 - 12