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वैशाली से मोहननगर मेट्रो स्टेशन तक बनेगा रोपवे
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वैशाली से मोहननगर मेट्रो स्टेशन तक बनेगा रोपवे
गाजियाबाद। वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच रोपवे बनाने की योजना है। सर्वे के बाद जीडीए की ओर से नियुक्त सलाहकार फर्म ने फिजिबिलिटी रिपोर्ट जीडीए को सौंप दी है। रिपोर्ट में रूट पर रोपवे का निर्माण संभव होने और कोई रुकावट नहीं होने की बात कही है। ऐसे में अब जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करुणेश ने सलाहकार फर्म को एक माह के अंदर डिटेल रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच सीधी लाइन व कोई रुकावट न होने से यह निर्णय लिया गया है।
ऐसे में रोपवे की योजना परवान चढ़ने से मेट्रो की ब्लू लाइन की रेड लाइन से सीधी कनेक्टिविटी होने से सफर और आसान हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री व क्षेत्रीय सांसद वीके सिंह के सुझाव पर जीडीए ने रोपवे प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। रोपवे के निर्माण की योजना प्रोजेक्ट की कम लागत और लोगों को मिलने वाली सुविधा को देखकर तैयार की गई। सुझाव के बाद ही जीडीए ने सलाहकार फर्म को नियुक्त कर पहले सर्वे और फिर फिजिबिलिटी रिपोर्ट सौंपने को कहा। प्राधिकरण अधिकारियों को सौंपी गई फिजिबिलिटी रिपोर्ट में पहले रूट पर रोपवे के निर्माण में कोई बाधा न होने की बात शामिल है। ऐसे में प्रोजेक्ट की डीपीआर पर अब काम शुरू होगा।
प्रोजेक्ट में मेट्रो से कई गुना कम आएगा खर्च
जीडीए ने महानगर में तीन रूटों पर रोपवे चलाने की योजना बनाई थी। इनमें नया बस अड्डा (शहीद स्थल) मेट्रो स्टेशन से पुराना रेलवे स्टेशन, वैशाली मेट्रो स्टेशन से नोएडा सेक्टर-62 (इलेक्ट्रानिक सिटी) और वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच रोपवे निर्माण प्रस्तावित है। ऐसे में पहले चरण में वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच रोपवे प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। रोपवे प्रोजेक्ट की लागत मेट्रो प्रोजेक्ट से कई गुना कम है। रोपवे प्रोजेक्ट पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च आने की संभावना जताई जा रही है। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी।
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बाकी दो रूटों की फिजिबिलिटी रिपोर्ट पर निर्णय बाद में
जीडीए की ओर से पहले चरण में वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच रोपवे निर्माण प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ा जाएगा। बाकी दो अन्य रोपवे प्रोजेक्ट नया बस अड्डा (शहीद स्थल) मेट्रो स्टेशन से पुराना रेलवे स्टेशन और वैशाली मेट्रो स्टेशन से नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी के बीच रोपवे निर्माण की फिजिबिलिटी रिपोर्ट में दूसरे चरण में काम किया जाएगा। प्राधिकरण की योजना रोपवे के तीनों प्रोजेक्टों को सिलसिलेवार आगे बढ़ाने की है। ऐसे में एजेंसी को पहले प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने को कहा गया है।
मेट्रो फेज-तीन व चार कॉरिडोर की 3225 करोड़ थी लागत:
जीडीए की ओर से रोपवे से पहले तैयार किए गए मेट्रो फेज-तीन व चार कॉरिडोर की कुल लागत 3225 करोड़ थी। वैशाली से मोहननगर कॉरिडोर की कुल लंबाई 5.04 किमी है। इस कॉरिडोर की कुल लागत 1808.22 करोड़ है। दूसरी ओर नोएडा से साहिबाबाद मेट्रो कॉरिडोर की कुल लंबाई 5.017 किमी है। इस कॉरिडोर की लागत 1517 करोड़ है। दोनों कॉरिडोर में वैशाली से मोहननगर और नोएडा से साहिबाबाद कॉरिडोर को जोडने के लिए जंक्शन प्रस्तावित था। प्रोजेक्ट फंडिंग पैटर्न में तीन साल से शासन में लटका हुआ था।
कोट...
कंसलटेंट फर्म ने वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच रोपवे प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में रूट में रोपवे निर्माण में कोई रुकावट न होने की बात शामिल है। ऐसे में अब एजेंसी को प्रोजेक्ट की डिटेल रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा दिया गया है। -- विवेकानंद सिंह, मुख्य अभियंता, जीडीए
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गाजियाबाद। वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच रोपवे बनाने की योजना है। सर्वे के बाद जीडीए की ओर से नियुक्त सलाहकार फर्म ने फिजिबिलिटी रिपोर्ट जीडीए को सौंप दी है। रिपोर्ट में रूट पर रोपवे का निर्माण संभव होने और कोई रुकावट नहीं होने की बात कही है। ऐसे में अब जीडीए उपाध्यक्ष कृष्णा करुणेश ने सलाहकार फर्म को एक माह के अंदर डिटेल रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच सीधी लाइन व कोई रुकावट न होने से यह निर्णय लिया गया है।
ऐसे में रोपवे की योजना परवान चढ़ने से मेट्रो की ब्लू लाइन की रेड लाइन से सीधी कनेक्टिविटी होने से सफर और आसान हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री व क्षेत्रीय सांसद वीके सिंह के सुझाव पर जीडीए ने रोपवे प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। रोपवे के निर्माण की योजना प्रोजेक्ट की कम लागत और लोगों को मिलने वाली सुविधा को देखकर तैयार की गई। सुझाव के बाद ही जीडीए ने सलाहकार फर्म को नियुक्त कर पहले सर्वे और फिर फिजिबिलिटी रिपोर्ट सौंपने को कहा। प्राधिकरण अधिकारियों को सौंपी गई फिजिबिलिटी रिपोर्ट में पहले रूट पर रोपवे के निर्माण में कोई बाधा न होने की बात शामिल है। ऐसे में प्रोजेक्ट की डीपीआर पर अब काम शुरू होगा।
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प्रोजेक्ट में मेट्रो से कई गुना कम आएगा खर्च
जीडीए ने महानगर में तीन रूटों पर रोपवे चलाने की योजना बनाई थी। इनमें नया बस अड्डा (शहीद स्थल) मेट्रो स्टेशन से पुराना रेलवे स्टेशन, वैशाली मेट्रो स्टेशन से नोएडा सेक्टर-62 (इलेक्ट्रानिक सिटी) और वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच रोपवे निर्माण प्रस्तावित है। ऐसे में पहले चरण में वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच रोपवे प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। रोपवे प्रोजेक्ट की लागत मेट्रो प्रोजेक्ट से कई गुना कम है। रोपवे प्रोजेक्ट पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च आने की संभावना जताई जा रही है। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी।
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बाकी दो रूटों की फिजिबिलिटी रिपोर्ट पर निर्णय बाद में
जीडीए की ओर से पहले चरण में वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच रोपवे निर्माण प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ा जाएगा। बाकी दो अन्य रोपवे प्रोजेक्ट नया बस अड्डा (शहीद स्थल) मेट्रो स्टेशन से पुराना रेलवे स्टेशन और वैशाली मेट्रो स्टेशन से नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी के बीच रोपवे निर्माण की फिजिबिलिटी रिपोर्ट में दूसरे चरण में काम किया जाएगा। प्राधिकरण की योजना रोपवे के तीनों प्रोजेक्टों को सिलसिलेवार आगे बढ़ाने की है। ऐसे में एजेंसी को पहले प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने को कहा गया है।
मेट्रो फेज-तीन व चार कॉरिडोर की 3225 करोड़ थी लागत:
जीडीए की ओर से रोपवे से पहले तैयार किए गए मेट्रो फेज-तीन व चार कॉरिडोर की कुल लागत 3225 करोड़ थी। वैशाली से मोहननगर कॉरिडोर की कुल लंबाई 5.04 किमी है। इस कॉरिडोर की कुल लागत 1808.22 करोड़ है। दूसरी ओर नोएडा से साहिबाबाद मेट्रो कॉरिडोर की कुल लंबाई 5.017 किमी है। इस कॉरिडोर की लागत 1517 करोड़ है। दोनों कॉरिडोर में वैशाली से मोहननगर और नोएडा से साहिबाबाद कॉरिडोर को जोडने के लिए जंक्शन प्रस्तावित था। प्रोजेक्ट फंडिंग पैटर्न में तीन साल से शासन में लटका हुआ था।
कोट...
कंसलटेंट फर्म ने वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच रोपवे प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में रूट में रोपवे निर्माण में कोई रुकावट न होने की बात शामिल है। ऐसे में अब एजेंसी को प्रोजेक्ट की डिटेल रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा दिया गया है। -- विवेकानंद सिंह, मुख्य अभियंता, जीडीए