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पमेंट के फेेर मंे परेशान होते हैं मरीज
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पेमेंट के फेर में मरीजाें को परेशान करते हैं अस्पताल
गाजियाबाद। आयुष्मान भारत योजना में पेमेंट के फेर में मरीजों को परेशान किए जाने के भी कई मामले सामने आए हैं। खासतौर पर निजी अस्पताल लाभार्थी मरीजों को एडमिट करने से बचते हैं। मरीजों को थक-हारकर सरकारी अस्पतालों में ही शरण लेनी पड़ती है। कई बार लाभार्थी मरीजों के इलाज में आने वाले खर्च को लेकर निजी अस्पताल संचालक स्वास्थ्य विभाग के सामने परेशानी भी रख चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। भुगतान में लेटलतीफी का खामियाजा आखिरकार मरीजों को ही उठा पड़ रहा है।
जिले में योजना के शुरू होने से अब तक 2123 मरीजों के इलाज में आई 22180619 का क्लेम स्वास्थ्य विभाग ने किया है। इसमें से केंद्र और प्रदेश सरकार से जिले के अस्पतालों को 14696500 रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 5881927 रुपये का क्लेम बकाया है। कुछ मामलों में त्रुटियां होने पर 16 लाख 192 रुपये का क्लेम रिजेक्ट भी किया गया है। गाजियाबाद जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत 24 निजी और पांच सरकारी अस्पताल शामिल किए गए हैं। जहां लाभार्थी पांच लाख रुपये तक का निशुल्क उपचार करा सकते हैं लेकिन इन अस्पतालों में पेमेंट रूकने या देरी से आने जैसी संभावनाओं केचलते मरीजों को भर्ती करने के बजाय टरकाया जाता है।
ये अस्पताल हैं योजना में शामिल
जिला एमएमजी अस्पताल, संयुक्त अस्पताल संजयनगर, जिला महिला अस्पताल, डासना सीएचसी, मोदीनगर सीएचसी, शकुंतला देवी अस्पताल, श्रेया मल्टी स्पेशिलिटी, एटालंटा मेडी वर्ल्ड, शिवम अस्पताल, एपेक्स हेल्थ केयर, मानव अस्पताल, गणेश अस्पताल, यशोदा अस्पताल, चौधरी मल्टी स्पेशिलिटी, पन्नालाल-श्यामलाल हॉस्पिटल सहित अन्य अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत पैनल में शामिल हैं।
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गोल्डन कार्ड है, पर नहीं मिल रहा इलाज
अमर उजाला के अभियान कितनी सुधरी सेहत लोग मोबाइल नंबर पर लोग कॉल और व्हाट्सएप कर योजना से संबंधित परेशानियों को भी साझा कर रहे हैं। गोविंदपुरम के स्वर्णजयंतीपुरम निवासी रूपराम ने बताया कि गोल्डन कार्ड होने के बावजूद पत्नी शीला के इलाज के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। जनवरी में उनकी पत्नी के पैर में पस पड़ गया था। तब योजना में नाम था, लेकिन गोल्डन कार्ड नहीं बना था। अपने खर्च पर एक हास्पिटल में पत्नी का इलाज कराया। पत्नी की तबीयत इन दिनों ज्यादा खराब है। उसके इलाज के लिए योजना के तहत पैनल में शामिल कविनगर के दो निजी अस्पतालों में लेकर गया, लेकिन भर्ती करने के नाम पर अस्पताल साफ मना कर देते हैं। अब अपने खर्चे पर इलाज करा रहा हूं।
आयुष्मान योजना को लेकर पैनल में शामिल अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश हैं। लाभार्थी मरीज को प्राथमिकता पर लेकर भर्ती किया जाए। अगर किसी भी लाभार्थी को परेशानी आती है तो मेरे कार्यालय में आकर शिकायत कर सकता है। इस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। - डा. एनके गुप्ता, सीएमओ
आयुष्मान भारत योजना से संबंधित किसी भी सुझाव या जानकारी के लिए व्हाट्सएप करें : 9711635666
या gbd-cityreporter@gbd.amarujala.com पर ईमेल करें।
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गाजियाबाद। आयुष्मान भारत योजना में पेमेंट के फेर में मरीजों को परेशान किए जाने के भी कई मामले सामने आए हैं। खासतौर पर निजी अस्पताल लाभार्थी मरीजों को एडमिट करने से बचते हैं। मरीजों को थक-हारकर सरकारी अस्पतालों में ही शरण लेनी पड़ती है। कई बार लाभार्थी मरीजों के इलाज में आने वाले खर्च को लेकर निजी अस्पताल संचालक स्वास्थ्य विभाग के सामने परेशानी भी रख चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। भुगतान में लेटलतीफी का खामियाजा आखिरकार मरीजों को ही उठा पड़ रहा है।
जिले में योजना के शुरू होने से अब तक 2123 मरीजों के इलाज में आई 22180619 का क्लेम स्वास्थ्य विभाग ने किया है। इसमें से केंद्र और प्रदेश सरकार से जिले के अस्पतालों को 14696500 रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 5881927 रुपये का क्लेम बकाया है। कुछ मामलों में त्रुटियां होने पर 16 लाख 192 रुपये का क्लेम रिजेक्ट भी किया गया है। गाजियाबाद जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत 24 निजी और पांच सरकारी अस्पताल शामिल किए गए हैं। जहां लाभार्थी पांच लाख रुपये तक का निशुल्क उपचार करा सकते हैं लेकिन इन अस्पतालों में पेमेंट रूकने या देरी से आने जैसी संभावनाओं केचलते मरीजों को भर्ती करने के बजाय टरकाया जाता है।
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ये अस्पताल हैं योजना में शामिल
जिला एमएमजी अस्पताल, संयुक्त अस्पताल संजयनगर, जिला महिला अस्पताल, डासना सीएचसी, मोदीनगर सीएचसी, शकुंतला देवी अस्पताल, श्रेया मल्टी स्पेशिलिटी, एटालंटा मेडी वर्ल्ड, शिवम अस्पताल, एपेक्स हेल्थ केयर, मानव अस्पताल, गणेश अस्पताल, यशोदा अस्पताल, चौधरी मल्टी स्पेशिलिटी, पन्नालाल-श्यामलाल हॉस्पिटल सहित अन्य अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत पैनल में शामिल हैं।
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गोल्डन कार्ड है, पर नहीं मिल रहा इलाज
अमर उजाला के अभियान कितनी सुधरी सेहत लोग मोबाइल नंबर पर लोग कॉल और व्हाट्सएप कर योजना से संबंधित परेशानियों को भी साझा कर रहे हैं। गोविंदपुरम के स्वर्णजयंतीपुरम निवासी रूपराम ने बताया कि गोल्डन कार्ड होने के बावजूद पत्नी शीला के इलाज के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। जनवरी में उनकी पत्नी के पैर में पस पड़ गया था। तब योजना में नाम था, लेकिन गोल्डन कार्ड नहीं बना था। अपने खर्च पर एक हास्पिटल में पत्नी का इलाज कराया। पत्नी की तबीयत इन दिनों ज्यादा खराब है। उसके इलाज के लिए योजना के तहत पैनल में शामिल कविनगर के दो निजी अस्पतालों में लेकर गया, लेकिन भर्ती करने के नाम पर अस्पताल साफ मना कर देते हैं। अब अपने खर्चे पर इलाज करा रहा हूं।
आयुष्मान योजना को लेकर पैनल में शामिल अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश हैं। लाभार्थी मरीज को प्राथमिकता पर लेकर भर्ती किया जाए। अगर किसी भी लाभार्थी को परेशानी आती है तो मेरे कार्यालय में आकर शिकायत कर सकता है। इस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। - डा. एनके गुप्ता, सीएमओ
आयुष्मान भारत योजना से संबंधित किसी भी सुझाव या जानकारी के लिए व्हाट्सएप करें : 9711635666
या gbd-cityreporter@gbd.amarujala.com पर ईमेल करें।