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नहीं मिली जमीन, जीडीए ने आधा किया घर बनाने का लक्ष्य
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ghazibad news
- फोटो : GHAZIABAD City
नहीं मिली जमीन, जीडीए ने आधा किया घर बनाने का लक्ष्य
गाजियाबाद। जमीन की कमी की वजह से प्रधानमंत्री आवास योजना का लक्ष्य घटकर आधा रह गया है। भू उपयोग परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूर नहीं मिलना भी इसकी एक वजह है। जिले में अब 19500 की जगह 9850 आवास ही बनेंगे। जीडीए ने लक्ष्य कम करने का शासन को पत्र भेज दिया है।
शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना में सबसे बड़ी रुकावट जमीन को लेकर आई। विभिन्न प्रोजेक्टों की डीपीआर तैयार करते वक्त जमीन का ही पेच फंसा। शहर में जमीन न मिलने के बाद जीडीए ने शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम समाज की जमीन चयनित की, लेकिन शासन स्तर से ही कृषि से जुड़ी जमीन के भू उपयोग परिवर्तन की लंबी कवायद के चलते कई प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही बंद हो गए।
कानपुर विकास प्राधिकरण में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 40 हजार से अधिक भवनों का निर्माण होना था। इनमें से करीब 30 फीसदी भवनों का निर्माण केडीए की ओर से कर लिया गया, लेकिन खरीदार न मिलने से परेशानी आई। ऐसे में बड़ी संख्या में भवन बनाकर खड़े करने की जगह लोगों का रुझान पता कर निर्माण करने का शासन ने निर्णय किया। ऐसे में डिमांड सर्वे में लोगों का रुझान देखने के बाद ही कई प्रोजेक्टों पर काम शुरू किया गया है। वहीं, विभिन्न पीएम आवास प्रोजेक्ट के लिए जमीन नहीं मिल पाना बड़ी रुकावट बनकर सामने आया है।
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बिल्डरों के अधिकांश प्रस्तावों को मंजूरी नहीं
महानगर में निजी विकासकर्ताओं के कई पीएम आवास प्रोजेक्ट पर काम जारी है। राजनगर एक्सटेंशन में एससीसी बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड के 252 ईडब्ल्यूएस भवन, सिग्नेचर ग्लोबल डेवलपर्स का 873 ईडब्ल्यूएस, जय अंबे एस्टेट का 147 ईडब्ल्यूएस, मेसर्स अराध्यम बिल्डर्स के 251 ईडब्ल्यूएस, मेसर्स यूरेका बिल्डर्स के 290 ईडब्ल्यूएस, मेसर्स एटीएस ग्रैंड रियलटर्स के 765 ईडब्ल्यूएस और मेसर्स अजनारा इंडिया के 318 ईडब्ल्यूएस के साथ कुछ अन्य बिल्डरों के प्रोजेक्ट की डीपीआर शासन को भेजी गई। इन प्रोजेक्ट में कृषि भूमि के आवासीय में भू-उपयोग परिवर्तन के प्रस्ताव को शासन से मंजूरी नहीं मिलने के कारण कई बिल्डरों ने भी अपने हाथ खींच लिए हैं।
जीडीए सचिव संतोष कुमार राय ने बताया कि जमीन की कमी, भू-उपयोग परिवर्तन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलने सहित अन्य तकनीकी कारणों से पीएम आवास के निर्माण का लक्ष्य कम किया गया है। इसी के चलते लक्ष्य कम करने का शासन को पत्र भेजा गया है।
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गाजियाबाद। जमीन की कमी की वजह से प्रधानमंत्री आवास योजना का लक्ष्य घटकर आधा रह गया है। भू उपयोग परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूर नहीं मिलना भी इसकी एक वजह है। जिले में अब 19500 की जगह 9850 आवास ही बनेंगे। जीडीए ने लक्ष्य कम करने का शासन को पत्र भेज दिया है।
शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना में सबसे बड़ी रुकावट जमीन को लेकर आई। विभिन्न प्रोजेक्टों की डीपीआर तैयार करते वक्त जमीन का ही पेच फंसा। शहर में जमीन न मिलने के बाद जीडीए ने शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम समाज की जमीन चयनित की, लेकिन शासन स्तर से ही कृषि से जुड़ी जमीन के भू उपयोग परिवर्तन की लंबी कवायद के चलते कई प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही बंद हो गए।
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कानपुर विकास प्राधिकरण में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 40 हजार से अधिक भवनों का निर्माण होना था। इनमें से करीब 30 फीसदी भवनों का निर्माण केडीए की ओर से कर लिया गया, लेकिन खरीदार न मिलने से परेशानी आई। ऐसे में बड़ी संख्या में भवन बनाकर खड़े करने की जगह लोगों का रुझान पता कर निर्माण करने का शासन ने निर्णय किया। ऐसे में डिमांड सर्वे में लोगों का रुझान देखने के बाद ही कई प्रोजेक्टों पर काम शुरू किया गया है। वहीं, विभिन्न पीएम आवास प्रोजेक्ट के लिए जमीन नहीं मिल पाना बड़ी रुकावट बनकर सामने आया है।
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बिल्डरों के अधिकांश प्रस्तावों को मंजूरी नहीं
महानगर में निजी विकासकर्ताओं के कई पीएम आवास प्रोजेक्ट पर काम जारी है। राजनगर एक्सटेंशन में एससीसी बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड के 252 ईडब्ल्यूएस भवन, सिग्नेचर ग्लोबल डेवलपर्स का 873 ईडब्ल्यूएस, जय अंबे एस्टेट का 147 ईडब्ल्यूएस, मेसर्स अराध्यम बिल्डर्स के 251 ईडब्ल्यूएस, मेसर्स यूरेका बिल्डर्स के 290 ईडब्ल्यूएस, मेसर्स एटीएस ग्रैंड रियलटर्स के 765 ईडब्ल्यूएस और मेसर्स अजनारा इंडिया के 318 ईडब्ल्यूएस के साथ कुछ अन्य बिल्डरों के प्रोजेक्ट की डीपीआर शासन को भेजी गई। इन प्रोजेक्ट में कृषि भूमि के आवासीय में भू-उपयोग परिवर्तन के प्रस्ताव को शासन से मंजूरी नहीं मिलने के कारण कई बिल्डरों ने भी अपने हाथ खींच लिए हैं।
जीडीए सचिव संतोष कुमार राय ने बताया कि जमीन की कमी, भू-उपयोग परिवर्तन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलने सहित अन्य तकनीकी कारणों से पीएम आवास के निर्माण का लक्ष्य कम किया गया है। इसी के चलते लक्ष्य कम करने का शासन को पत्र भेजा गया है।