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Ghaziabad News: पोलियो उन्मूलन के लिए गाजियाबाद का मॉडल 20 देशाें में हुआ था लागू
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गाजियाबाद। देश ही नहीं विदेशों में भी पोलियो उन्मूलन के लिए गाजियाबाद का मॉडल (अधिकारियों का योगदान रहे, उससे अधिक सामान्य लोगों का विश्वास हासिल किया जाए) लागू किया गया था, इसके पांच साल बाद पोलियो पर विजय मिली थी। बेहतरीन काम करने के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी (वर्तमान में एनएचएआई के चेयरमैन) संतोष यादव को भारत सरकार ने स्विटजरलैंड के जेनेवा स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भेजा था। संतोष ने बताया कि 20 देशों के प्रतिनिधियों को एक कार्ययोजना तैयार कर दिया था। उसमें बताया था कि जितना अधिकारियों का योगदान रहे, उससे अधिक सामान्य लोगों का विश्वास हासिल किया जाए। यही गाजियाबाद में भी किया था।
रिक्शा चालक करते थे महिला सवारियों को जागरूक
संतोष यादव ने बताया कि पोलियो के तीन स्वरूप मिले थे। तीनों के मरीज गाजियाबाद में मिल रहे थे। पोलियो उन्मूलन अभियान को लेकर कुछ क्षेत्र विशेष लोगों में अफवाह फैल गई थी कि पोलियो की खुराक लेने से बच्चों के भविष्य में पिता बनने की क्षमता खत्म हो जाएगी, इसलिए अभियान का विरोध करते थे। तमाम प्रयास के बावजूद लोग अभियान का सहयोग नहीं कर रहे थे, पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाने गई टीम को लोग भगा देते थे। इसके बाद शहर के सभी रिक्शा चालकों की एक दावत कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई थी। वहां पर उनसे पोलियो अभियान को सफल बनाने में मदद मांगी गई। रिक्शा चालकों ने जिलाधिकारी से किया वायदा को निभाया और रिक्शे में बैठने वाली महिलाओं को पोलियो खुराक पिलाने के लाभ के बारे में बताते थे। इसके बाद महिलाएं बच्चों को लेकर स्वयं पोलियो बूथ पर ले जाने लगीं।
धर्म गुरुओं ने भी निभाई थी अहम भूमिका
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि शुरुआती दौर में कुछ विशेष क्षेत्रों में पोलियो अभियान का बहुत विरोध हुआ था। इसमें धर्म गुरुओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सीएमओ का कहना है कि मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और सार्वजनिक जगहों पर नुक्कड़ नाटक से लोगों को जागरूक किया गया था। इसके बाद लोगों ने बच्चों को पोलियो वैक्सीन पिलानी शुरू की थी।
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2010 के बाद नहीं मिला कोई मरीज
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने बताया कि जिले में सन् 2009 में लोनी और डासना में एक-एक मरीज मिले थे। उसके बाद पोलियो का कोई मरीज नहीं मिला। हालांकि 2011 में पश्चिम बंगाल में पी-1 एक मामला मिला था, उसके बाद से पूरे देश में पोलियो का कोई केस नहीं है। सीएमओ ने बताया कि डब्ल्यूएचओ की टीम अब भी सर्विलांस करती है। एक साल में 125 से 150 सैंपल जांच के लिए भेजते हैं।
वर्ष में दो बार आयोजित हो रहा पल्स पोलियो अभियान
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि अभी जिले में प्रतिवर्ष दो बार अभियान चलाया जा रहा है। एक बार में पांच से सात लाख बच्चों को वाइवैलेंट की खुराक दी जाती है।
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रिक्शा चालक करते थे महिला सवारियों को जागरूक
संतोष यादव ने बताया कि पोलियो के तीन स्वरूप मिले थे। तीनों के मरीज गाजियाबाद में मिल रहे थे। पोलियो उन्मूलन अभियान को लेकर कुछ क्षेत्र विशेष लोगों में अफवाह फैल गई थी कि पोलियो की खुराक लेने से बच्चों के भविष्य में पिता बनने की क्षमता खत्म हो जाएगी, इसलिए अभियान का विरोध करते थे। तमाम प्रयास के बावजूद लोग अभियान का सहयोग नहीं कर रहे थे, पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाने गई टीम को लोग भगा देते थे। इसके बाद शहर के सभी रिक्शा चालकों की एक दावत कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई थी। वहां पर उनसे पोलियो अभियान को सफल बनाने में मदद मांगी गई। रिक्शा चालकों ने जिलाधिकारी से किया वायदा को निभाया और रिक्शे में बैठने वाली महिलाओं को पोलियो खुराक पिलाने के लाभ के बारे में बताते थे। इसके बाद महिलाएं बच्चों को लेकर स्वयं पोलियो बूथ पर ले जाने लगीं।
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धर्म गुरुओं ने भी निभाई थी अहम भूमिका
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि शुरुआती दौर में कुछ विशेष क्षेत्रों में पोलियो अभियान का बहुत विरोध हुआ था। इसमें धर्म गुरुओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सीएमओ का कहना है कि मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और सार्वजनिक जगहों पर नुक्कड़ नाटक से लोगों को जागरूक किया गया था। इसके बाद लोगों ने बच्चों को पोलियो वैक्सीन पिलानी शुरू की थी।
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2010 के बाद नहीं मिला कोई मरीज
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने बताया कि जिले में सन् 2009 में लोनी और डासना में एक-एक मरीज मिले थे। उसके बाद पोलियो का कोई मरीज नहीं मिला। हालांकि 2011 में पश्चिम बंगाल में पी-1 एक मामला मिला था, उसके बाद से पूरे देश में पोलियो का कोई केस नहीं है। सीएमओ ने बताया कि डब्ल्यूएचओ की टीम अब भी सर्विलांस करती है। एक साल में 125 से 150 सैंपल जांच के लिए भेजते हैं।
वर्ष में दो बार आयोजित हो रहा पल्स पोलियो अभियान
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि अभी जिले में प्रतिवर्ष दो बार अभियान चलाया जा रहा है। एक बार में पांच से सात लाख बच्चों को वाइवैलेंट की खुराक दी जाती है।