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डबल मर्डर केस- गोली मिस होने से बच गई बच्चे की जान
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सरस्वती विहार में विलाप करते परिजन।
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दोहरा हत्याकांड : गोली मिस होने से बच गई बच्चों की जान
गाजियाबाद। घटना के समय गोली मिस न होती तो तीनों बच्चे भी जिंदा न होते। पहले अंशु को गोली मारने के बाद दूसरी गोली सोनू ने डॉली को मारी। डॉली को मारने के बाद तीसरी गोली बच्चों पर चलाई तो वह मिस हो गई। इसके बाद आरोपी रसोई में गया और वहां से चाकू, सिल का बट्टा और पेचकस लेकर आया। उससे अंशु व डॉली के ऊपर प्रहार किया, जिससे वह बच न सकें। उसके बाद चाकू से बच्चों की गर्दन को काटा। उन्हें मृत समझकर छोड़ दिया।
पुलिस ने बताया कि दोनों हत्यारोपी उमा और सोनू पूरी योजना के साथ आए थे कि किसी को भी जिंदा नहीं छोड़ना है। सभी की हत्या करनी है। यदि कोई बच गया तो वह सारे मामले की पोल खोल देगा। घटना के दौरान घायल होने पर एक बेटी बेड के नीचे चली गई, जबकि दो बच्चों को उन्होंने मृत समझ लिया था। उसके बाद आरोपी वहां से निकल लिए। उन्हें लगा सभी लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस ने बताया कि पिस्टल में कई गोलियां थीं, जिसमें से दो गोली चल चुकी थीं और तीसरी गोली पर पिस्टल जाम हो गई थी।
सटाकर गोली मारने से नहीं हुई थी आवाज
पुलिस ने बताया कि आरोपी ने बड़ी चालाकी के साथ घटना को अंजाम दिया। अंशु और डॉली को सटाकर गोली मारी थी, जिससे आवाज कम हो। अगर, वह दूर से गोली मारता तो आवाज ज्यादा होती। इसलिए आसपड़ोस में किसी को पता नहीं चला। क्योंकि आरोपी ने घटना के दौरान कमरे को भी बंद कर लिया था। जिस कमरे में घटना को अंजाम दिया, वह कमरा प्रथम तल पर था। वहां से थोड़ी बहुत आवाज बाहर तक नहीं आती।
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एक घंटे तक घर में घुसे रहे आरोपी
पुलिस ने बताया कि आरोपी घटना करने से एक घंटे पहले ही घर में आ गए थे। वह डॉली के साथ बैठकर बातें भी करते रहे। जबकि उनके बच्चे ट्यूशन पढ़ रहे थे। ट्यूशन पढ़ने के बाद बच्चे नीचे आ गए और अंशु डॉली के पास ही रुकी रही। स्थानीय लोगों ने बताया कि बच्चों को ऊपर बुला लिया। फिर उन्हें कमरे में बंद कर घटना को अंजाम दिया।
हत्या के बाद 20 मिनट तक खंगालते रहे घर
बेखौफ आरोपी हत्या के बाद अलमारी और बेड को 20 मिनट तक खंगालते रहे। उन्हें जरा भी डर नहीं था कि घर के अंदर कोई आ गया तो क्या होगा? उन्होंने बेड और अलमारी में रखे सारे सामान को एकत्र किया और उसके बाद भाग गए।
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गाजियाबाद। घटना के समय गोली मिस न होती तो तीनों बच्चे भी जिंदा न होते। पहले अंशु को गोली मारने के बाद दूसरी गोली सोनू ने डॉली को मारी। डॉली को मारने के बाद तीसरी गोली बच्चों पर चलाई तो वह मिस हो गई। इसके बाद आरोपी रसोई में गया और वहां से चाकू, सिल का बट्टा और पेचकस लेकर आया। उससे अंशु व डॉली के ऊपर प्रहार किया, जिससे वह बच न सकें। उसके बाद चाकू से बच्चों की गर्दन को काटा। उन्हें मृत समझकर छोड़ दिया।
पुलिस ने बताया कि दोनों हत्यारोपी उमा और सोनू पूरी योजना के साथ आए थे कि किसी को भी जिंदा नहीं छोड़ना है। सभी की हत्या करनी है। यदि कोई बच गया तो वह सारे मामले की पोल खोल देगा। घटना के दौरान घायल होने पर एक बेटी बेड के नीचे चली गई, जबकि दो बच्चों को उन्होंने मृत समझ लिया था। उसके बाद आरोपी वहां से निकल लिए। उन्हें लगा सभी लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस ने बताया कि पिस्टल में कई गोलियां थीं, जिसमें से दो गोली चल चुकी थीं और तीसरी गोली पर पिस्टल जाम हो गई थी।
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सटाकर गोली मारने से नहीं हुई थी आवाज
पुलिस ने बताया कि आरोपी ने बड़ी चालाकी के साथ घटना को अंजाम दिया। अंशु और डॉली को सटाकर गोली मारी थी, जिससे आवाज कम हो। अगर, वह दूर से गोली मारता तो आवाज ज्यादा होती। इसलिए आसपड़ोस में किसी को पता नहीं चला। क्योंकि आरोपी ने घटना के दौरान कमरे को भी बंद कर लिया था। जिस कमरे में घटना को अंजाम दिया, वह कमरा प्रथम तल पर था। वहां से थोड़ी बहुत आवाज बाहर तक नहीं आती।
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एक घंटे तक घर में घुसे रहे आरोपी
पुलिस ने बताया कि आरोपी घटना करने से एक घंटे पहले ही घर में आ गए थे। वह डॉली के साथ बैठकर बातें भी करते रहे। जबकि उनके बच्चे ट्यूशन पढ़ रहे थे। ट्यूशन पढ़ने के बाद बच्चे नीचे आ गए और अंशु डॉली के पास ही रुकी रही। स्थानीय लोगों ने बताया कि बच्चों को ऊपर बुला लिया। फिर उन्हें कमरे में बंद कर घटना को अंजाम दिया।
हत्या के बाद 20 मिनट तक खंगालते रहे घर
बेखौफ आरोपी हत्या के बाद अलमारी और बेड को 20 मिनट तक खंगालते रहे। उन्हें जरा भी डर नहीं था कि घर के अंदर कोई आ गया तो क्या होगा? उन्होंने बेड और अलमारी में रखे सारे सामान को एकत्र किया और उसके बाद भाग गए।