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88 दिनों में सिर्फ 4 दिन सांस लेने लायक रही हवा
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गाजियाबाद शहर में ग्रैप लागू हुए करीब 88 दिन हो गए हैं। इस दौरान प्रदूषण फैलाने पर 70 से अधिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। 90 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। सात करोड़ रुपये का बारूद नष्ट किया गया। 140 अवैध फैक्टरियों को ध्वस्त किया गया। लेकिन नतीजा शून्य रहा। 88 दिन में सिर्फ चार दिन ही हवा सांस लेने लायक रही। इतनी कार्रवाई होने के बाद भी प्रदूषण क्यों नहीं घटा, इसका जवाब पीसीबी के पास भी नहीं है। विभाग सिर्फ कार्रवाई करने की बात तक सीमित है।
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दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर 15 अक्तूबर से ग्रैप लागू किया गया है। इस दौरान प्रशासन और पीसीबी (प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड) की तरफ से कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए। ग्रैप लागू करने के बाद विभाग अभी तक इसके नियमों का पालन नहीं करने वाले 70 से अधिक लोगों और प्रतिष्ठानों पर विभाग कार्रवाई कर चुका है। इन पर विभाग की तरफ से करीब 90 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ ही दिवाली के समय पीसीबी और प्रशासन ने सात करोड़ रुपये की आतिशबाजी भी नष्ट की थी। यही नहीं प्रशासन की तरफ से प्रदूषण फैलाने वाली करीब 140 अवैध फैक्टरियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा चुकी है। विभाग ने 29 दिसंबर 2020 को छह कंपनियों के खिलाफ प्रदूषण फैलाने पर कोर्ट में केस भी दायर किया है। इसके बाद भी लगातार गाजियाबाद शहर का प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है। वर्ष 2021 का पहला ही दिन सबसे प्रदूषित रहा था। एक जनवरी 2021 को एक्यूआई 470 तक पहुंच गया था। वहीं, वर्ष 2020 में नौ नवंबर को एक्यूआई सबसे अधिक 482 दर्ज किया गया। अभी भी शहर का एक्यूआई मानकों से तीन गुना अधिक बना हुआ है।
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120 किलोमीटर तक सड़कों पर किया जा चुका है पानी का छिड़काव
शहर में प्रदूषण का स्तर न बढ़े इसके लिए रोजाना नगर निगम और जीडीए की तरफ से पानी का छिड़काव किया जा रहा है। ग्रैप अवधि के दौरान अब तक गाजियाबाद में 120 किलोमीटर से ज्यादा सड़क पर पानी का छिड़काव किया जा चुका है। रोजाना करीब 22 टैंकरों से पानी का छिड़काव सड़कों पर किया जाता है। इसके साथ ही नगर निगम और जीडीए की आठ स्वीपिंग मशीनें भी सड़क से धूल साफ करने में लगी हैं।
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