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Friendship Day: 27 साल बाद ढूंढ निकाला दो सहेलियों ने अपने बचपन के दोस्तों को, फेसबुक बना मददगार
Sun, 07 Aug 2022 12:58 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, साहिबाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, साहिबाबाद
Published by: गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 07 Aug 2022 12:58 AM IST
सार
बचपन के दोस्तों की यादें दिल में इतनी गहरी थी कि सहेलियों ने उन्हें ढूंढ निकालने का संकल्प लिया और अपने इस उद्देश्य में कामयाब रहीं। इस बार का फ्रेंडशिप डे इनके लिए स्पेशल है।
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फ्रेंडशिप डे
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कई बार बचपन के दोस्त दुनिया की भीड़ में गुम हो जाते हैं। बाद मेें केवल उनकी यादें ही रह जाती हैं। बचपन की यादों को जीवंत करने और 2022 की फ्रेंडशिप डे को स्पेशल बनाने के लिए वसुंधरा की दो सहेलियों ने अपने बचपन के दोस्तों को 27 साल बाद बरेली की गलियों से ढूंढ निकाला।
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बचपन के दोस्तों की यादें दिल में इतनी गहरी थी कि सहेलियों ने उन्हें ढूंढ निकालने का संकल्प लिया और अपने इस उद्देश्य में कामयाब रहीं। इस बार का फ्रेंडशिप डे इनके लिए स्पेशल है। वसुंधरा की वंदना शर्मा ने बताया कि पापा की पोस्टिंग के दौरान उन्होंने अपने स्नातक की पढ़ाई बरेली से ही की। उसके बाद उनका परिवार वहां से लौट आया और शादी के बाद वंदना वसुंधरा में रहने लगी।
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वह कहती हैं कि उनकी एक सहेली जिसका नाम वंदना कुशवाहा है, वह भी शादी के बाद टीएचए में ही आ गई। दोनों बाद में भी साथ रहीं लेकिन हमेशा से बचपन के छह दोस्तों की यादें हमेशा संग थी। दोनों ही सहेलियां लंबे समय से अपने दोस्तों को सोशल साइट पर ढूंढने का प्रयास करती रहीं लेकिन उनमें से केवल एक दोस्त प्रमोद सिन्हा ही फेसबुक पर मिल सका।
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वंदना ने बताया कि प्रमोद के अलावा और कोई भी नहीं मिल सका। वह कहती हैं कि अन्य सभी दोस्त के बारे में यह तो मालूम था कि वह लोग मूल रूप से बरेली से ही हैं, ऐसे में बरेली जाने का प्लान बना और दोनों सहेलियां अपने बच्चों के साथ बरेली पहुंची।
गलियों का लगाया चक्कर, तब मिला पता
वंदना कुशवाहा ने बताया कि वह लोग पहले अपने बचपन के स्कूल में पहुंचे और पुराना रिकॉर्ड निकलवाया, जिसमें से कुछ दोस्तों का मूल पता मिल गया। वहीं दो सहेलियों की गलियों में पहुंचे जहां वह रहती थीं, वहां से भी मालूम हुआ और इस तरह उन्हें अपनी सहेली अंशु के बारे में पता चला जो अब अलीगढ़ रहती हैं। वहीं बरेली में सुनील कुमार, मिथुन सक्सेना और प्रियंका सक्सेना मिले इस तरह आठ के ग्रुप में से छह दोस्त अब मिल चुके हैं। वंदना कहती हैं कि यह बचपन की दोस्ती ही थी जिसकी खातिर उम्र के दूसरे पड़ाव में दोस्तों को ढूंढ निकाला।