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रोजर-पे-एप से ठगी कर पैसों को बिटक्वाइन में बदलकर लाखों कमाने वाला गिरफ्तार
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रोजर-पे-एप से ठगी कर पैसों को बिटक्वाइन में बदलकर लाखों कमाने वाला गिरफ्तार
इंदिरापुरम। नयागांव महाराष्ट्र में रोजर-पे-एप से ठगी कर पैसों को बिटक्वाइन में बदलने वाले गिरोह के हैकर विवेक यादव को इंदिरापुरम पुलिस और साइबर सेल ने गिरफ्तार किया है। पूछताछ में पता चला कि उसने दिल्ली, मुंबई और इंदिरापुरम के तीन मामलों में लोगों से करीब 35 लाख रुपये ठग लिए। बाद में पैसे को अपने खातों में ट्रांसफर कर बिटक्वाइन में बदल दिए। उसके पास से लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद हुआ है। पुलिस गिरोह के दो ठगों की भी तलाश कर रही है।
क्षेत्राधिकारी इंदिरापुरम अभय कुमार मिश्र ने बताया कि विवेक यादव बीसीए पास है। वह गाजीपुर के सैदपुर का रहने वाला है। इन दिनों महाराष्ट्र के नयागांव में महाड़ा कालोनी में किराए के फ्लैट में रहकर लीगल ट्रेडिंग का काम कर रहा था। पिछले दस महीनों से ठगी करने वाले गिरोह के संपर्क में आ गया। उन्होंने विवेक को ठगी के पैसों को सफेद करने यानी ऑनलाइन तरीके से बिटक्वाइन में बदलने की योजना बताई। इंजीनियर होने की वजह से साफ्टवेयर की अच्छी जानकारी रखता है। पूछताछ में उसने बताया कि एस्टर्ड एडमिन और रमेश नाम के दो ठग लोगों से लाखों रुपये ठग चुके हैं। वह इन पैसों को रोजर-पे एप की मदद से अपनी खाते में ट्रांसफर कर तीन से चार दिन के अंदर बिटकॉइन में बदल चुका है।
150 लोगों से करोड़ों की ठगी
अभी तक गिरोह ने मिलकर करीब 150 लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया है। तीन मामले मेें लोगों के खातों सेेे करीब 51 लाख 62 हजार रुपये ठगी के बाद बिटक्वाइन में बदले गए हैं। हैकिंग के बाद पैसे बदलने के लिए उसे 10 से 20 प्रतिशत का कमीशन मिलता है। इसमें वह करीब 35 लाख रुपये कमा चुका है।
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ऑनलाइन प्लेटफार्म पर हुई थी दोस्ती :
निरीक्षक अपराध चंद्रकांत पांडेय ने बताया कि दोनों ठगों से विवेक की दोस्ती ऑनलाइन प्लेटफार्म पर हुई थी। कई दिन बातचीत होने के बाद वह मुंबई जाकर लीगल ट्रेडिंग करने लगा था लेकिन ठगी के खेल में ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में वह भी गिरोह में शामिल हो गया। पुलिस का कहना है कि विवेक के पास चार खाते भी मिले हैं जिनमें लाखों रुपये की ट्रांजेक्शन हुई है। अब यह पैसे किस-किस खाते से आए हैं उस पर साइबर सेल टीम काम कर रही है। इसके अलावा गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में भी अहम सुराग हाथ लगा है। ऐसे में उन्हें भी जल्द पकड़ कर अन्य ठगी का खुलासा किया जाएगा।
इंजीनियर श्याम सुंदर ने पुलिस से की थी शिकायत :
नीतिखंड निवासी इंजीनियर श्याम सुंदर ऑनलाइन वित्तीय सेवा देने वाली कंपनी चलाते हैं। उनका कहना था कि 10-11 अप्रैल को कंपनी के पेमेंट गेटवे रोजर पे खाते को अचानक ठगों ने हैक कर 15.47 लाख रुपये निकाल लिए थे। उन्होंने इसकी शिकायत तुरंत कंपनी के गेटवे कंपनी से की लेकिन पदाधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। कुछ दिन बाद कंपनी के खाते से भी 10 हजार रुपये की ठगी हो गई। 18 अप्रैल को फिर 8.21 लाख रुपये की ट्रांजेक्शन हो गई। लगातार ठगी होने पर उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत दी थी।
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इंदिरापुरम। नयागांव महाराष्ट्र में रोजर-पे-एप से ठगी कर पैसों को बिटक्वाइन में बदलने वाले गिरोह के हैकर विवेक यादव को इंदिरापुरम पुलिस और साइबर सेल ने गिरफ्तार किया है। पूछताछ में पता चला कि उसने दिल्ली, मुंबई और इंदिरापुरम के तीन मामलों में लोगों से करीब 35 लाख रुपये ठग लिए। बाद में पैसे को अपने खातों में ट्रांसफर कर बिटक्वाइन में बदल दिए। उसके पास से लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद हुआ है। पुलिस गिरोह के दो ठगों की भी तलाश कर रही है।
क्षेत्राधिकारी इंदिरापुरम अभय कुमार मिश्र ने बताया कि विवेक यादव बीसीए पास है। वह गाजीपुर के सैदपुर का रहने वाला है। इन दिनों महाराष्ट्र के नयागांव में महाड़ा कालोनी में किराए के फ्लैट में रहकर लीगल ट्रेडिंग का काम कर रहा था। पिछले दस महीनों से ठगी करने वाले गिरोह के संपर्क में आ गया। उन्होंने विवेक को ठगी के पैसों को सफेद करने यानी ऑनलाइन तरीके से बिटक्वाइन में बदलने की योजना बताई। इंजीनियर होने की वजह से साफ्टवेयर की अच्छी जानकारी रखता है। पूछताछ में उसने बताया कि एस्टर्ड एडमिन और रमेश नाम के दो ठग लोगों से लाखों रुपये ठग चुके हैं। वह इन पैसों को रोजर-पे एप की मदद से अपनी खाते में ट्रांसफर कर तीन से चार दिन के अंदर बिटकॉइन में बदल चुका है।
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150 लोगों से करोड़ों की ठगी
अभी तक गिरोह ने मिलकर करीब 150 लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया है। तीन मामले मेें लोगों के खातों सेेे करीब 51 लाख 62 हजार रुपये ठगी के बाद बिटक्वाइन में बदले गए हैं। हैकिंग के बाद पैसे बदलने के लिए उसे 10 से 20 प्रतिशत का कमीशन मिलता है। इसमें वह करीब 35 लाख रुपये कमा चुका है।
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ऑनलाइन प्लेटफार्म पर हुई थी दोस्ती :
निरीक्षक अपराध चंद्रकांत पांडेय ने बताया कि दोनों ठगों से विवेक की दोस्ती ऑनलाइन प्लेटफार्म पर हुई थी। कई दिन बातचीत होने के बाद वह मुंबई जाकर लीगल ट्रेडिंग करने लगा था लेकिन ठगी के खेल में ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में वह भी गिरोह में शामिल हो गया। पुलिस का कहना है कि विवेक के पास चार खाते भी मिले हैं जिनमें लाखों रुपये की ट्रांजेक्शन हुई है। अब यह पैसे किस-किस खाते से आए हैं उस पर साइबर सेल टीम काम कर रही है। इसके अलावा गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में भी अहम सुराग हाथ लगा है। ऐसे में उन्हें भी जल्द पकड़ कर अन्य ठगी का खुलासा किया जाएगा।
इंजीनियर श्याम सुंदर ने पुलिस से की थी शिकायत :
नीतिखंड निवासी इंजीनियर श्याम सुंदर ऑनलाइन वित्तीय सेवा देने वाली कंपनी चलाते हैं। उनका कहना था कि 10-11 अप्रैल को कंपनी के पेमेंट गेटवे रोजर पे खाते को अचानक ठगों ने हैक कर 15.47 लाख रुपये निकाल लिए थे। उन्होंने इसकी शिकायत तुरंत कंपनी के गेटवे कंपनी से की लेकिन पदाधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। कुछ दिन बाद कंपनी के खाते से भी 10 हजार रुपये की ठगी हो गई। 18 अप्रैल को फिर 8.21 लाख रुपये की ट्रांजेक्शन हो गई। लगातार ठगी होने पर उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत दी थी।