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पीएनजी लगाने के लिए उद्योगों को मिली छह माह की मोहलत
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पीएनजी लगाने के लिए उद्योगों को मिली छह माह की मोहलत
साहिबाबाद। उद्योगों को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के इस्तेमाल के लिए छह महीने की मोहलत मिल गई है। शहर के पांच बड़े औद्योगिक क्षेत्र में पीएनजी की लाइन नहीं होने के कारण वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को यह राहत देनी पड़ी है। इन क्षेत्रों की सभी इकाइयां दिसंबर तक बॉयलर चलाने के लिए अन्य ईंधन का इस्तेमाल कर सकेंगे। जिन क्षेत्रों में पीएनजी की लाइन है, उन्हें कोई छूट नहीं दी गई है। इनके लिए 30 सितंबर तक का समय है।
इससे पहले 15 जून को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने बॉयलर वाली 600 इकाइयों के संचालकों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी थी कि या तो 30 सितंबर तक अपनी फैक्टरी में लकड़ी, कोयला और डीजल बंद प्रयोग करके पीएनजी का इस्तेमाल शुरू कीजिए वरना उत्पादन बंद करना होगा। पीएनजी के विकल्प के तौर पर बायो-ब्रिकेट्स, राइज हक व मस्टर्ड हक जैसे जैविक ईंधन सुझाए गए थे। तब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के अधिकारियों ने कहा था कि लगातार जहरीली होती हवा की सेहत सुधारने के लिए यह कदम उठाया गया है। नोटिस का उद्यमियों ने विरोध किया था। जिले में 400 इकाइयां ही पीएनजी पर शिफ्ट हो पाई हैं।
जारी किया संशोधित आदेश
संशोधित और नया आदेश शुक्रवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में पहुंचा। अधिकारियों ने इस पत्र को हापुड़ और गाजियाबाद की करीब 30 हजार इकाइयों के उद्यमियों को भेज दिया है। गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडेरेशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा का कहना है कि हापुड़ और गाजियाबाद के पांच ऐसे औद्योगिक क्षेत्र हैं जहां पीएनजी की लाइन नहीं है। नए आदेश से तमाम उद्यमी राहत महसूस कर रहे हैं। उद्यमी प्रवीण जैन का कहते हैं कि पीएनजी काफी महंगी है। लकड़ी, कोयला, डीजल की जगह पीएनजी के इस्तेमाल में तीन गुना का अंतर आ जाता है। पहले बायोफ्यूल्स छह से सात रुपये प्रति किलोग्राम था लेकिन अब 13 रुपये किलोग्राम पर पहुंच गया है
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साहिबाबाद। उद्योगों को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के इस्तेमाल के लिए छह महीने की मोहलत मिल गई है। शहर के पांच बड़े औद्योगिक क्षेत्र में पीएनजी की लाइन नहीं होने के कारण वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को यह राहत देनी पड़ी है। इन क्षेत्रों की सभी इकाइयां दिसंबर तक बॉयलर चलाने के लिए अन्य ईंधन का इस्तेमाल कर सकेंगे। जिन क्षेत्रों में पीएनजी की लाइन है, उन्हें कोई छूट नहीं दी गई है। इनके लिए 30 सितंबर तक का समय है।
इससे पहले 15 जून को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने बॉयलर वाली 600 इकाइयों के संचालकों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी थी कि या तो 30 सितंबर तक अपनी फैक्टरी में लकड़ी, कोयला और डीजल बंद प्रयोग करके पीएनजी का इस्तेमाल शुरू कीजिए वरना उत्पादन बंद करना होगा। पीएनजी के विकल्प के तौर पर बायो-ब्रिकेट्स, राइज हक व मस्टर्ड हक जैसे जैविक ईंधन सुझाए गए थे। तब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के अधिकारियों ने कहा था कि लगातार जहरीली होती हवा की सेहत सुधारने के लिए यह कदम उठाया गया है। नोटिस का उद्यमियों ने विरोध किया था। जिले में 400 इकाइयां ही पीएनजी पर शिफ्ट हो पाई हैं।
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जारी किया संशोधित आदेश
संशोधित और नया आदेश शुक्रवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में पहुंचा। अधिकारियों ने इस पत्र को हापुड़ और गाजियाबाद की करीब 30 हजार इकाइयों के उद्यमियों को भेज दिया है। गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडेरेशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा का कहना है कि हापुड़ और गाजियाबाद के पांच ऐसे औद्योगिक क्षेत्र हैं जहां पीएनजी की लाइन नहीं है। नए आदेश से तमाम उद्यमी राहत महसूस कर रहे हैं। उद्यमी प्रवीण जैन का कहते हैं कि पीएनजी काफी महंगी है। लकड़ी, कोयला, डीजल की जगह पीएनजी के इस्तेमाल में तीन गुना का अंतर आ जाता है। पहले बायोफ्यूल्स छह से सात रुपये प्रति किलोग्राम था लेकिन अब 13 रुपये किलोग्राम पर पहुंच गया है
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