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हैरतअंगेज करतबों से सीआईएसएफ के जवानों ने दिखाया अपना दमखम
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हैरतअंगेज करतबों से सीआईएसएफ के जवानों ने दिखाया दमखम
साहिबाबाद। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का 52वां स्थापना दिवस बुधवार को मनाया गया। इस दौरान सीआईएसएफ के जवानों ने मॉक ड्रिल के जरिए दमखम दिखाया। कार्यक्रम में वाईपी रेस्क्यू और फायर रेस्क्यू ड्रिल आकर्षण का केंद्र रही। हैरतअंगेज करतबों से जवानों ने दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया। इस बार कोरोना प्रोटोकोल के मद्देनजर कार्यक्रम काफी छोटा रहा। इसके साथ ही काफी कम संख्या में लोगों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया।
सुबह करीब आठ बजे मुख्य अतिथि गृह सचिव अजय कुमार भल्ला पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने जीप पर परेड का निरीक्षण किया। परेड कमांडर केके भारद्वाज से गृह सचिव अजय भल्ला ने सलामी दी। इसके बाद निशान टोली समेत जवानों की अन्य टोलियों ने परेड निकाली। जवानों द्वारा पेश की गई साइलेंट ड्रिल ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। साइलेंट ड्रिल में जवानों का समन्वय और हथियारों पर नियंत्रण देखने लायक था। एक दूसरे से कदम ताल मिलने के साथ ही एक दूसरे पर विश्वास का अजब परिचय जवानों ने पेश किया। इसके बाद वीआईपी रेस्क्यू मॉक ड्रिल में सीआईएसएफ के जवानों का साहस देखने को मिला। जिसमें दिखाया गया कि सीआईएसएफ के जवान वीआईपी पर होने वाले हमले में कैसे उनकी रक्षा करते हैं और किस फुर्ती से दुश्मनों को पकड़ते हैं। इसके बाद फायर ड्रिल हुई। जिसमें विभिन्न उपक्रमों में आग लगने के दौरान सीआईएसएफ के अग्निशमन विभाग के जवानों ने अपनी जान पर खेलकर आग बुझाने के साथ आग में फंसे लोगों की जान बचाने का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में आए लोगों ने तालियां बजाकर जवानों का उत्साह बढ़ाया।
सीआईएसएफ का बल अब एक लाख 60 हजार से ज्यादा
इस दौरान सीआईएसएफ के महानिदेशक सुबोध कुमार जायसवाल ने कहा कि 1969 में बना यह बल आज देश के सभी क्रिटिकल एस्टेबलिशमेंट की सुरक्षा जिम्मेदारी संभाल रहा है। सीआईएसएफ का बल अब एक लाख 60 हजार से ज्यादा हो गया है जो 350 इकाइयों को सुरक्षा प्रदान कर रहा है। इसके साथ ही हमारे स्पेशल फोर्स 102 वीआईपी की सुरक्षा दे रही है। उन्होंने कहा कि 2007 से 2020 के बीच राजपथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में सीआईएसएफ कंटीजन को बेस्ट मार्चिंग ट्रॉफी अब तक छह बार मिल चुकी है। यह सीआईएसएफ के जवानों की प्रशिक्षण, लगन और कुछ कर गुजरने की चाहत का परिणाम है। आज की यह परेड इसी उत्साह और समर्पण का विस्तार है। सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पालन करते हुए एक उच्च स्तरीय परेड का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि सीआईएसएफ के कर्मठ सदस्यों उपनिरीक्षक महावीर प्रसाद खुराना, आरक्षक महेंद्र कुमार पासवान और आरक्षक सतीश कुमार कुशवाहा को याद करता हूं। जिन्होंने 2020 में अलग-अलग जगह हुए भीषण अग्नि कांड में अपने प्राणों की आहुति दी। इसके लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया है। उन 44 जवानों को भी वह नमन करते है जिन्होंने कोविड के दौरान अपनी भूमिका निभाते हुए अपने प्राण को न्योछावर किया। उन्होंने कहा कि लगातार सीआईएसएफ की जिम्मेदारी बढ़ रही है। जिन्हें प्रभावी रूप से सीआईएसएफ के जवान निभा रहे हैं।
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साहिबाबाद। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का 52वां स्थापना दिवस बुधवार को मनाया गया। इस दौरान सीआईएसएफ के जवानों ने मॉक ड्रिल के जरिए दमखम दिखाया। कार्यक्रम में वाईपी रेस्क्यू और फायर रेस्क्यू ड्रिल आकर्षण का केंद्र रही। हैरतअंगेज करतबों से जवानों ने दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया। इस बार कोरोना प्रोटोकोल के मद्देनजर कार्यक्रम काफी छोटा रहा। इसके साथ ही काफी कम संख्या में लोगों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया।
सुबह करीब आठ बजे मुख्य अतिथि गृह सचिव अजय कुमार भल्ला पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने जीप पर परेड का निरीक्षण किया। परेड कमांडर केके भारद्वाज से गृह सचिव अजय भल्ला ने सलामी दी। इसके बाद निशान टोली समेत जवानों की अन्य टोलियों ने परेड निकाली। जवानों द्वारा पेश की गई साइलेंट ड्रिल ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। साइलेंट ड्रिल में जवानों का समन्वय और हथियारों पर नियंत्रण देखने लायक था। एक दूसरे से कदम ताल मिलने के साथ ही एक दूसरे पर विश्वास का अजब परिचय जवानों ने पेश किया। इसके बाद वीआईपी रेस्क्यू मॉक ड्रिल में सीआईएसएफ के जवानों का साहस देखने को मिला। जिसमें दिखाया गया कि सीआईएसएफ के जवान वीआईपी पर होने वाले हमले में कैसे उनकी रक्षा करते हैं और किस फुर्ती से दुश्मनों को पकड़ते हैं। इसके बाद फायर ड्रिल हुई। जिसमें विभिन्न उपक्रमों में आग लगने के दौरान सीआईएसएफ के अग्निशमन विभाग के जवानों ने अपनी जान पर खेलकर आग बुझाने के साथ आग में फंसे लोगों की जान बचाने का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में आए लोगों ने तालियां बजाकर जवानों का उत्साह बढ़ाया।
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सीआईएसएफ का बल अब एक लाख 60 हजार से ज्यादा
इस दौरान सीआईएसएफ के महानिदेशक सुबोध कुमार जायसवाल ने कहा कि 1969 में बना यह बल आज देश के सभी क्रिटिकल एस्टेबलिशमेंट की सुरक्षा जिम्मेदारी संभाल रहा है। सीआईएसएफ का बल अब एक लाख 60 हजार से ज्यादा हो गया है जो 350 इकाइयों को सुरक्षा प्रदान कर रहा है। इसके साथ ही हमारे स्पेशल फोर्स 102 वीआईपी की सुरक्षा दे रही है। उन्होंने कहा कि 2007 से 2020 के बीच राजपथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में सीआईएसएफ कंटीजन को बेस्ट मार्चिंग ट्रॉफी अब तक छह बार मिल चुकी है। यह सीआईएसएफ के जवानों की प्रशिक्षण, लगन और कुछ कर गुजरने की चाहत का परिणाम है। आज की यह परेड इसी उत्साह और समर्पण का विस्तार है। सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पालन करते हुए एक उच्च स्तरीय परेड का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि सीआईएसएफ के कर्मठ सदस्यों उपनिरीक्षक महावीर प्रसाद खुराना, आरक्षक महेंद्र कुमार पासवान और आरक्षक सतीश कुमार कुशवाहा को याद करता हूं। जिन्होंने 2020 में अलग-अलग जगह हुए भीषण अग्नि कांड में अपने प्राणों की आहुति दी। इसके लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया है। उन 44 जवानों को भी वह नमन करते है जिन्होंने कोविड के दौरान अपनी भूमिका निभाते हुए अपने प्राण को न्योछावर किया। उन्होंने कहा कि लगातार सीआईएसएफ की जिम्मेदारी बढ़ रही है। जिन्हें प्रभावी रूप से सीआईएसएफ के जवान निभा रहे हैं।
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