सांसों पर संकट: 458 AQI के साथ देश में सबसे जहरीली रही गाजियाबाद की हवा, ग्रैप-4 सिर्फ कागजों तक सीमित
गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 458 रहा। रविवार का दिन सीजन का दूसरा सबसे प्रदूषित दिन रहा। इससे साफ जाहिर है कि प्रशासनिक प्रयास खानापूर्ति तक सिमटे हैं।
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कोहरे के साथ ही प्रदूषण बढ़ने से गाजियाबाद में सांसों पर संकट गहरा गया है। रविवार को जिले की हवा देश में सबसे जहरीली रही। औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 458 दर्ज किया गया। इसके साथ ही यह इस सीजन का दूसरा सबसे अधिक प्रदूषित दिन रहा। सर्वाधिक 461 एक्यूआई 14 दिसंबर 2025 को दर्ज किया गया था।
जिले के सभी निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। लोनी में एक्यूआई 479 और वसुंधरा में 475 तक पहुंच गया है। यहां सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। इंदिरापुरम और संजयनगर में भी प्रदूषण गंभीर श्रेणी में है। इसके बावजूद ग्रेप-4 की सख्ती सिर्फ आदेशों और फाइलों तक सिमटी नजर आई। सड़कों पर धूल उड़ती रही। खुलेआम निर्माण कार्य चलते रहे और कूड़ा जलाने की घटनाएं सामने आती रहीं।
खानापूर्ति तक सिमटी प्रदूषण पर लगाम की कोशिशें
देश में सबसे जहरीली हवा के बाद भी प्रदूषण पर लगाम के लिए प्रशासन व प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों की कोशिशें खानापूर्ति तक सिमटी हैं। कहीं औपचारिक जांच कर ली गई, कहीं कुछ नोटिस थमा दिए गए और जिम्मेदारी पूरी मान ली गई। न बड़े निर्माण स्थलों पर काम रुका और न ही फैक्टरियों की चिमनियों से निकलता धुआं थम सका। लोगों का कहना है कि जब प्रदूषण देश में सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है तो फिर विभागों की कार्रवाई क्यों बेअसर नजर आ रही है।
बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की मुश्किलें बढ़ीं
लोगों का कहना है कि जिन नियमों के जरिये हवा साफ होनी थी, वे नियम खुद हवा में उड़ते दिखाई दे रहे हैं। इस लापरवाही की सबसे बड़ी कीमत आम जनता चुका रही है। जहरीली हवा के कारण बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। डॉक्टर लगातार एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही। दिसंबर में भी बड़े दावे किए गए थे, मगर हालात जस के तस हैं। गाजियाबाद की हवा ही नहीं, व्यवस्था की साख भी दम तोड़ रही है।
इस सीजन सर्वाधिक एक्यूआई
14 दिसंबर- 461
13 दिसंबर- 431
11 नवंबर- 428
15 दिसंबर- 427
12 नवंबर- 418
17 जनवरी- 417
23 दिसंबर- 412
13 नवंबर- 404
29 दिसंबर- 401